ऋतुपर्ण दवे
होम्योपैथी एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति जरूर है, लेकिन बहुत ही तेजी से लोकप्रिय भी हो रही है। यह रोगी के समग्र स्वास्थ्य जिसमें मानसिक और शारीरिक स्थिति पर ध्यान केंद्रित करके प्राकृतिक रूप से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने की ताकत होती है। होमियोपैथी को एक सुरक्षित चिकित्सा पद्धिति माना जाता है क्योंकि इससे कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होते हैं। लेकिन सोचिए, यही होमियोपैथी यदि कृषि के क्षेत्र में भी उपयोगी साबित हो तो इसे किसी चमत्कार से कम नहीं कहा जा सकता। इन दिनों दुनिया भार में एग्रो-होमियोपैथी पर लेकर न केवल बड़े-बड़े शोध चल रहे हैं बल्कि तेजी से उपयोग भी बढ़ रहा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है।
कृषि क्षेत्र में इसका सफल प्रयोग कई दशकों से हो रहा है। इसकी शुरुआत हालाकि शौकिया तौर पर हुई, लेकिन जब इसके फायदे नजर आने लगे तो तेजी से शोध और परीक्षण भी होने लगे और लोगों की इसको लेकर उत्सुकता भी बढ़ी। अब नतीजे भी दिखने लगे हैं। होम्योपैथी दवाओं के टिंचर की कुछ बूंदे थोड़े से पानी में मनुष्यों को देकर यह विश्वास उत्पन्न किया जाता है कि यह बीमारी की जड़ तक पहुंच उसका समाधान करता है। बस यही फॉर्मूला कृषि क्षेत्र में भी अपनाया जा रहा है।
वास्तव में होम्योपैथिक दवाएं बैक्टीरिया या कीटों को सीधे नहीं मार, पौधों की अपनी जैविक प्रणालियों को प्रभावित करती हैं जिससे वो अपना प्राकृतिक रक्षा तंत्र, जरूरत के हिसाब से विकसित और सक्रिय कर पाते हैं। एग्रीकल्चर सेक्टर में होम्योपैथी का उपयोग उसी सिध्दांत पर आधारित है जिसमें किसी बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए धीरे-धीरे डायल्यूट दवाओं से किसी बीमारी को काबू किया जाता है जिससे वह जड़ से ही समाप्त हो जाती है। यह पौधों की आनुवंशिक गतिविधियों और चयापचय यानी मेटाबॉलिज्म में परिवर्तन की प्रक्रिया को प्रेरित कर सकता है, जिससे रक्षा प्रणालियां सक्रिय होती हैं।
देश में एग्रो-होम्योपैथी को लेकर पुडुचेरी प्रयोग खासा सफल और चर्चाओं में है। श्री अरबिंदो सोसाइटी (एसएएस) की अगुवाई में एक नई पहचान बन रही है। एग्रो-होम्योपैथी से दोहरा लाभ भी सामने आया। जहां पानी की खपत घटी और इस कारण भूजल स्तर भी बढ़ा। 2018 में शुरू हुई आहार परियोजना में कृषि क्षेत्र में होम्योपैथी के उपयोग की संभावनाओं का पता लगाने के लिए शुरु हुए इस प्रोजेक्ट की सफलता का अंदाज इसी से लगता है कि कुछ ही समय में इसे नाबार्ड और उसके बाद टाटा ट्रस्ट का समर्थन मिला। वैज्ञानिक प्रयोगों के बाद जब यह फॉर्मूला खेतों में पहुंचा तो वहां भी बेहद असरकारक रहा। पहले भिंडी उसके बाद धान की उपज में काफी सकारात्मक परिणाम आए। उत्साहित वैज्ञानिकों ने तीनों सीजन रबी, खरीफ और जायद में भी इसकी क्षमता को आजमाया और सकारात्मक नतीजे हासिल किए।इससे मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ी जिससे रसायनों पर निर्भरता घटी।
सर्वविदित है कि खेतों में उर्वरकों का छिड़काव करने से मिट्टी के सूक्ष्म जीवों को नुकसान होता है लेकिन कृषि-होम्योपैथी के मिश्रण ने पत्तियों को नई जान तो दी साथ ही पौधों की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाई। शोधकर्ताओं ने कृषि-होम्योपैथी की लागत को बेहद सस्ती पाया। पहले जहां कृषक 20 से 30 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर रसायनों पर व्यय करता था, वही होम्योपैथिक दवाओं पर केवल 700 रुपए प्रति हेक्टेयर ही खर्च कर और भी बेहतर परिणाम हासिल करने लगा। यह कमाल ही था जो होम्योपैथिक दवाओं की चंद मिलीमीटर दवाओं ने सैकड़ों लीटर पानी में घुले रसायनों पर भारी पड़ कर असर दिखाया। इससे खेती में हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल रुकने से फसल की चमक और पुष्टता भी बेहतर हुई जिससे किसानों को उपज की अच्छी कीमत मिलने लगी।
होम्योपैथी दवाएं वनस्पतियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को जबरदस्त बढ़ाती हैं। इससे वनस्पतियां, फसल होने वाली बीमारी को अपने आप ठीक कर लेते हैं। एग्रो-होम्योपैथी में अलग-अलग और बेहद सस्ती चंद मिलीमीटर दवाएं बीजों के अंकुरण से लेकर रोगों से बचाव और फूलने-फलने को बेहतर बनाने में कारगर सिध्द हो रही है। ये दवाएं कीट प्रबंधन की दिशा में भी काफी सफल हैं। यहां तक कि फसल में वायरस या बैक्टीरिया के दुष्प्रभावों पर भी असरकारक हैं। वह दिन दूर नहीं जब निरंतर शोध और प्रयोगों के बाद एग्रो-होम्योपैथी की भी ढेरों और अलग-अलग शाखाएं बनना तय है। यह भविष्य का वृहद कृषि पारिस्थितिकी तंत्र होगा। इसमें भी उपचारों की अलग-अलग विधियां होंगी। लेकिन इतना तो तय है कि रसायनों और उर्वरकों के बोझ से आहत मिट्टी को यदि कोई नया जीवन और जहरीले तत्वों से मुक्ति दिलाएगा तो वह होगा भविष्य का एग्रो-होम्योपैथी सेक्टर जहां मिट्टी, पानी अपने मूल स्वरूप में आकर फिर से हमारी प्रकृति में नया जोश भरने का काम करेंगे। हाँ, इतना कहा जा सकता है कि वैश्विक स्तर पर होम्योपैथी की नई शाखा यानी एग्रो-होम्योपैथी जल्द ही अपनी शानदार धमक दिखाने को तैयार है।





