विद्या भवन संस्थान उदयपुर में उत्कृष्ट विद्यार्थी सम्मान समारोह

Best Student Award Ceremony at Vidya Bhavan Institute, Udaipur

जी एन भट्ट

उदयपुर/जयपुर : राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष डॉ वासुदेव देवनानी ने कहा है कि वर्तमान समय अवसर एवं कठोर प्रतिस्पर्धा और एआई का युग है। फिर भी हमें एआई का दास नहीं बनना है ,बल्कि उसका स्वामी बनना है। क्योंकि एआई हमें सिर्फ सूचना देता है, वो भी सही हों उसकी गारंटी नहीं । साथ ही उसमें चरित्र, संवेदनाएं एवं करुणा का अभाव भी है।

डॉ देवनानी ने यह बात शनिवार को उदयपुर में विद्या भवन संस्थान के ऑडिटोरियम में आयोजित उत्कृष्ट विद्यार्थी सम्मान समारोह के दौरान बतौर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कही। इस अवसर पर जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल, विद्या भवन समिति के अध्यक्ष डॉ जितेंद्र तायलिया एवं मुख्य संचालक सेवानिवृत आई ए एस राजेंद्र भट्ट, विद्याभवन पॉलिटेक्निक महाविद्यालय प्रिंसिपल डॉ अनिल मेहता, कृषि विज्ञान केंद्र उदयपुर के डॉ प्रफुल्ल भटनागर सहित समिति के सदस्य गण, स्कूली बच्चे और अभिभावकगण उपस्थित थे।

*स्वामी विवेकानंद के प्रेरक संदेश और
भारतीय संस्कार, संस्कृति एवं सनातन को नहीं भूले *

डॉ देवनानी ने पूरे उदयपुर संभाग से आए दसवीं एवं 12वीं कक्षा में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले लगभग दो सौ से अधिक विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों एवं गणमान्य लोगों को संबोधित करते हुए युवाओं का आह्वान किया कि हमें स्वामी विवेकानंद के प्रेरक संदेश “उठो, जागो एवं लक्ष्य प्राप्ति तक नहीं रुको ” का अनुसरण करते हुए देश एवं राष्ट्र के लिए कार्य करना है। साथ ही भारतीय संस्कार, संस्कृति एवं सनातन को नहीं भूलते हुए युगानुकूल परिवर्तनों के माध्यम से दिशानुकूल कार्य करने हैं।

समझाया पांच “डी” का महत्व

अपने संबोधन में प्रो देवनानी ने कहा कि शिक्षा हमें अज्ञान, भय, दुर्बलता और सीमाओं से मुक्त करती है। हमें अपने प्राचीन भारतीय आदर्शों को आत्मसात करते हुए वर्तमान को गढ़ना चाहिए जिससे एक बेहतर भविष्य का निर्माण हो सकते। उन्होंने बच्चों को पांच “डी” का महत्व समझाते हुए जीवन का लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा दी। देवनानी ने कहा कि डेकोरम (मर्यादा), डिसिप्लिन (अनुशासन), डिवोशन (समर्पण) और डिटरमिनेशन (प्रतिबद्धता) को जीवन में उतारें तो व्यक्तित्व का डेवलपमेंट (विकास) होना निश्चित है। उन्होंने जीवन को बैंक लॉकर की उपमा देते हुए कहा कि जिस प्रकार लॉकर की दो चाबियां, एक ग्राहक और दूसरी मैनेजर के पास होती है और दोनों चाबियां से ही लाकर खुलता है । ठीक उसी प्रकार कर्म और परिश्रम तथा भाग्य नाम की दो चाबियों से ही सफलता प्राप्त होती है। इसलिए जीवन में लगातार ईमानदारी के साथ कर्म एवं परिश्रम करते रहना चाहिए भाग्य का साथ मिलते ही सफलता सुनिश्चित है।

विद्या भवन से अपने अन्तरंग जुड़ाव को याद किया

विधानसभाध्यक्ष देवनानी ने अपने संबोधन में विद्या भवन संस्थान से अपने अन्तरंग जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि उन्होंने विद्या भवन पॉलिटेक्निक कॉलेज में लंबे समय तक बतौर प्रिंसिपल सेवाएं दी। उन्होंने बताया कि उदयपुर में अंग्रेजी शासनकाल के दौरान शिक्षा का अभाव था, उस समय उदयपुर में स्व.मोहन सिंह मेहता और स्व. जनार्दन राय नागर ने अपने बलबूते और प्रयासों से दो संस्थाओं को खड़ा किया । साथ ही विशेष कर आदिवासी अंचलों में शिक्षा का प्रसार किया। विद्या भवन एवं राजस्थान विद्यापीठ नाम की यह दोनों संस्थाएं आज भी आदिवासी बाहुल्य दक्षिणी राजस्थान में शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत स्तंभ के रूप में खड़ी है।

विद्या भवन के गौरवशाली अतीत की नींव पर बने भविष्य की इमारत

उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि विद्या भवन की वर्तमान कार्यकारिणी समय के अनुरूप आवश्यक परिवर्तन एवं संवर्धन करते हुए संस्थान को आगे की दिशा में ले जा रही है। इसके गौरवशाली अतीत को ध्यान में रखते हुए सुंदर वर्तमान गढ़ा जा रहा है मुझे विश्वास है कि यह प्रयास अच्छे भविष्य का निर्माण करेगा। मेरी शुभकामनाएं हैं कि मेवाड़ और वागड़ के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाने वाला यह संस्थान विद्याभवन देश का सर्वोच्च संस्थान बने।

कार्यक्रम के आरंभ में विद्या भवन समिति के अध्यक्ष डॉ जितेंद्र तायलिया ने विद्याभवन समिति की विभिन्न गतिविधियों और कार्यों पर विस्तृत प्रकाश डाला। आईआईटी और आईआईएम के छात्र रहे आईएएस टॉपर उदयपुर के जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल ने छात्रों को अपने छात्र जीवन के अनुभव सुनाते हुए केरियर में आगे बढ़ने के लिए टिप्स दिए । उन्होंने कहा कि माता–पिता और शिक्षकों का मार्गदर्शन और संस्कार जीवन में सफलता के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते है।