- पश्चिम बंगाल में कांटे का मुकाबला,सरकार बनाने के निकट पहुंच सकती है भाजपा
- दक्षिणी राज्यों में केरल में कांग्रेस गठबन्धन की सरकार बनने के आसार और तमिलनाडु में डीएमके गठबन्धन को झटका दे सकती है मशहूर अभिनेता विजय थलापति की पार्टी टीवीके
एन जी भट्ट
देश के पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल्स ने देश की राजनीति को लेकर कई महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। यद्यपि एग्जिट पोल अंतिम परिणाम नहीं होते, फिर भी वे मतदाताओं के रुझानों और राजनीतिक धाराओं का एक प्रारंभिक खाका अवश्य प्रस्तुत करते हैं। इन पांच राज्यों में इस वर्ष 2026 में हुए विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल ने राज्यवार सीटों और संभावित परिणामों की एक स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत की है। कुल मिलाकर इन राज्यों में 824 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ है, जिसमें पश्चिम बंगाल (294), तमिलनाडु (234), असम (126), केरल (140) और पुडुचेरी (30) विधानसभा की सीटें शामिल हैं।
इस बार के एग्जिट पोल का समग्र विश्लेषण भारतीय राजनीति की बहुस्तरीय प्रकृति को उजागर करता है। एग्जिट पोल दर्शाते हैं कि विभिन्न राज्यों में अलग -अलग राजनीतिक रुझान उभर रहे हैं। कहीं क्षेत्रीय दल मजबूत हैं तो कहीं राष्ट्रीय दल बढ़त बना रहे हैं। एग्जिट पोल के अनुसार असम में भाजपा हैट्रिक लगाती नजर आ रही है, वहीं पुडुचेरी में भाजपा गठबन्धन फिर से सत्ता पर काबिज होता दिखाई दे रहा है। वहीं दक्षिणी राज्य केरल में कांग्रेस के नेतृत्व में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) पर विजय दिखाई दे रही है। यदि ऐसा होता है तो केरल में भी सीपीएम नेता पिनराई विजयन की दस वर्षों की सत्ता तो जायेगी ही देश में अब पश्चिम बंगाल,त्रिपुरा और केरल के बाद कोई वामपंथी सरकार अस्तित्व में नहीं रहेगी।
एग्जिट पोल के अनुसार एक और दक्षिणी राज्य तमिलनाडु की डीएमके की स्टालिन की गठबंधन सरकार भी इस बार मशहूर अभिनेता विजय (जिन्हें थलापति विजय भी कहा जाता है) की टीवीके पार्टी के साथ कड़े मुकाबले में है और इस बार टीवीके के सबसे बड़ी पार्टी बनने के अनुमानों के चलते स्टालिन सरकार संकट में पड़ सकती है। हालांकि इस बार डीएमके की परंपरागत विरोधी पार्टी एआईडीएमके का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहने का अनुमान है।
देश की नजरें जिस प्रदेश के चुनाव परिणामों पर सबसे अधिक है, एग्जिट पोल के अनुसार पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में काँटे का मुकाबला नजर आ रहा है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच करीबी टक्कर होने के संकेत मिल रहे हैं, हालांकि पश्चिम बंगाल में इस बार दोनों चरणों में आजादी के बाद की सबसे अधिक वोटिंग होने के चुनाव आयोग के दावों यानी बंपर मतदान को देखते हुए कुछ एग्जिट पोल्स ने भाजपा को चुनावी बढ़त मिलने का अनुमान लगाया जा रहा हैं। यदि ऐसा होता है पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के 15 वर्षों के शासन का अन्त हो जाएगा।
पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव आयोग ने भारी केन्द्रीय बलों की तैनाती कर चुनाव कराया जिससे इस बार चुनावी हिंसा को घटनाएं नहीं के बराबर हुई हुई। हालांकि बुधवार को हुए दूसरे चरण के मतदान में कतिपय घटनाओं के होने की खबरें आ रही है। इस प्रकार पश्चिम बंगाल में मुकाबला काफी दिलचस्प नजर आ रहा है। कुछ एग्जिट पोल भाजपा को बढ़त दे रहे हैं तो कुछ तृणमूल कांग्रेस को बढ़त दे रहे है। यह स्थिति बताती है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में ध्रुवीकरण अपने चरम पर है और मतदाता दो प्रमुख विकल्पों के बीच बंटे हुए हैं। यहां का परिणाम राष्ट्रीय राजनीति पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
मतगणना पूर्व के अनुमानों में पूर्वोत्तर के असम राज्य की 126 सीटों में भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए को करीब 90 से अधिक सीटें मिलने की संभावना जताई गई है,जबकि कांग्रेस सहित विपक्ष काफी पीछे दिख रहा है। केरल की 140 सीटों में सत्ता परिवर्तन के संकेत हैं,जहां यूडीएफ को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। वहीं पुडुचेरी की 30 सीटों में एनडीए को 16 से 19 सीटें मिलने का अनुमान है, जो सरकार बनाने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। असम में एग्जिट पोल अपेक्षाकृत स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं और भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की वापसी के संकेत मिल रहे हैं। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह भाजपा के लिए पूर्वोत्तर में अपनी पकड़ को और मजबूत करने का अवसर होगा। असम में लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने की संभावना भाजपा के संगठनात्मक कौशल और हेमन्त बिस्वा सरमा नेतृत्व की स्वीकार्यता को दर्शाती है।
पुडुचेरी में गठबंधन राजनीति का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। यहां एनडीए के फिर से सत्ता में लौटने के संकेत मिल रहे हैं। छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गठबंधन की राजनीति अक्सर निर्णायक भूमिका निभाती है और पुडुचेरी इसका एक ज्वलंत उदाहरण बन रहा है।
एग्जिट पोल के अनुसार दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में 234 सीटों में से डीएमके गठबंधन को लगभग 150 से160 सीटें मिलने का अनुमान है, जो स्पष्ट बहुमत का संकेत है। तमिलनाडु में एक बार फिर क्षेत्रीय दलों का दबदबा कायम रहने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, कुछ एग्जिट पोल अभिनेता थलापति विजय की टीवीके जैसी नई पार्टी को सबसे बड़े दल के रूप में उभरने का दावा कर रहे हैं। यह पार्टी मशहूर अभिनेता विजय जिन्हें थलापति विजय भी कहा जाता है, द्वारा बनाई गई है। अभिनेता विजय ने 2024 में इस राजनीतिक दल की स्थापना की थी और कालान्तर में यह पार्टी लोकप्रिय होती गई। एग्जिट पोल के अनुसार एक और दक्षिणी राज्य तमिलनाडु की डीएमके की स्टालिन की गठबंधन सरकार भी इस बार मशहूर अभिनेता विजय (जिन्हें “थलापति विजय” भी कहा जाता है) की टीवीके पार्टी के सबसे बड़ी पार्टी बनने के अनुमानों के चलते संकट में पड़ सकती है। हालांकि इस बार डीएमके की परंपरागत विरोधी पार्टी एआईडीएमके का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहने का अनुमान है।
एक और दक्षिणी राज्य केरल की बात करें तो यहां पर पारंपरिक सत्ता परिवर्तन का ट्रेंड जारी रहने की संभावना जताई जा रही है। एग्जिट पोल के अनुसार यू डी एफ को बढ़त मिल सकती है, जो एल डी एफ के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा करता है। केरल की राजनीति लंबे समय से दो मोर्चों के बीच घूमती रही है और हर चुनाव में सत्ता परिवर्तन की परंपरा लगभग कायम रही है। यह एंटी-इन्कम्बेंसी की मजबूत भावना को भी दर्शाता है
कुल मिलाकर इन पांचों राज्यों के एग्जिट पोल को समग्र रूप से देखें तो तीन प्रमुख प्रवृत्तियां उभरकर सामने आती हैं। पहली, भारत की राजनीति अभी भी क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों के बीच संतुलन बनाए हुए है। जहां एक ओर भाजपा अपने विस्तार के प्रयासों में सफल होती दिख रही है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय दल अपने-अपने राज्यों में मजबूत बने हुए हैं। दूसरी प्रवृत्ति एंटी-इन्कम्बेंसी की है, जो विशेष रूप से केरल जैसे राज्यों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। तीसरी और महत्वपूर्ण प्रवृत्ति नई राजनीतिक शक्तियों टीवीके जैसी पार्टियों का उभार है, जो आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों को बदल सकती है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि एग्जिट पोल हमेशा सटीक नहीं होते। कई बार वास्तविक परिणाम इन अनुमानों से अलग भी हो सकते हैं। फिर भी, ये मतदाताओं के मानस और चुनावी रुझानों को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। वैसे 4 मई को मतगणना होने के साथ ही चुनाव परिणामों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
इस प्रकार पांच राज्यों के एग्जिट पोल यह संकेत देते हैं कि भारतीय लोकतंत्र में विविधता और बहुलता आज भी जीवंत है। कोई एक राजनीतिक दल पूरे देश पर वर्चस्व स्थापित नहीं कर पा रहा है, बल्कि हर राज्य की अपनी अलग राजनीतिक पहचान और प्राथमिकताएं हैं। यही भारत की लोकतांत्रिक ताकत भी है और इसकी जटिलता भी। आने वाले परिणाम इन अनुमानों की पुष्टि करेंगे या उन्हें खारिज करेंगे, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि देश की राजनीति एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है।





