वैश्विक संकट से मजबूत लोकतंत्र की ओर

From global crisis to stronger democracy

अश्वनी ए कौशिक
अधिवक्ता हाई कोर्ट, दिल्ली

वैश्विक ऊर्जा संकट एवं पश्चिम एशिया तनाव के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना की एक सभा को संबोधित करते हुए देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने एवं राष्ट्रहित में सात महत्वपूर्ण अपील की है, जिसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार को बचाना, ईंधन की खपत को कम करना और भारत को आत्मनिर्भर बनाना है।यह आज के समय की मांग है कि हम भारत के विकास एवं तरक्की के लिए कुछ संकल्प लें, ताकि एकजुट प्रयास और जन भागीदारी से इस संकट का डटकर सामना किया जा सके। प्रत्येक राष्ट्र की शक्ति केवल सरकारी प्रयासों तक ही सीमित नहीं होती बल्कि उसके नागरिकों के सहयोग एवं सामूहिक जिम्मेदारी से भी बनती है। प्रधानमंत्री जी का संदेश -“देशभक्ति का अर्थ सिर्फ देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान देना ही नहीं है बल्कि कठिन समय में जिम्मेदारी से जीना और देश के प्रति दायित्वों का निर्वहन करना भी है। ” इस बात का संदेश स्पष्ट है कि देश के 140 करोड़ नागरिक जब देश की आर्थिक मजबूती में अपने-अपने दायित्वों का यथोचित निर्वहन करेंगे, तो हम निश्चित ही इस समस्या से पार पा लेंगे।

उन्होंने पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करने की अपील की है, इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी बल्कि युद्ध के प्रतिकूल प्रभाव को कम भी किया जा सकेगा। नागरिकों के द्वारा निजी वाहनों के स्थान पर मेट्रो एवं सार्वजनिक परिवहन का उपयोग, यथासंभाव कार पूलिंग,माल परिवहन के लिए रेलवे को प्राथमिकता,इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर ऊर्जा से संचालित साधनों से हम पेट्रो उत्पादों पर अपने निर्भरता को कम कर सकते हैं। यह अपनाना और भी आवश्यक इसीलिए हो जाता है क्योंकि भारत 85 प्रतिशत तेल बाहर से मंगाता है और इस संकट के चलते क्रूड ऑयल की कीमत 120 डॉलर तक पहुंच गई है। जबकि इस संकट का नकारात्मक प्रभाव पहले ही सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, क्योंकि पिछले दो-तीन माह से इन उत्पादों की बिक्री पुराने दामों पर करने से उन्हें प्रतिदिन 1600 से 1700 करोड रुपए का नुकसान हो रहा है।एक अनुमान के अनुसार गत दस सप्ताह में सार्वजनिक क्षेत्र की इन कंपनियों को लगभग 1 लाख करोड रुपए से अधिक का नुकसान हो चुका है। अतः अन्य विकल्पों के माध्यम से जैसे सौर ऊर्जा, पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण, सीएनजी का प्रयोग आदि से भी हम इस ऊर्जा संकट का सामना कर सकते हैं।
कंपनियों को वर्क फ्रॉम होम की सलाह से ईंधन की खपत एवं यातायात को कम करने का सीधा-सीधा संबंध है। दफ्तर आने जाने में हर रोज लाखो लीटर पेट्रोल डीजल लगता है। और यदि हम वर्क फ्रॉम होम, वर्चुअल मीटिंग,ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस एवं क्लास को अपनाते हैं तो एक तरफ तो ईंधन की बचत और आयात का बोझ कम होगा दूसरी तरफ पर्यावरण संकट एवं AQI के स्तर से जूझ रहे भारत को स्वास्थ्य संबंधी अप्रत्यक्ष फायदा भी होगा। यह इसलिए और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि यह कोई नया प्रयोग नहीं है कि जिससे जनता अनजान हो।कोरोना काल में हम इन साधनों को भली भांति अपनाकर देख भी चुके हैं तथा स्वच्छ वायु,आकाश एवं पर्यावरण को महसूस भी कर चुके हैं,जो हमारे लिए ही फायदेमंद है।
उन्होंने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखने एवं “रुपए के संरक्षक” के रूप में कार्य करने का आग्रह किया है। इसके लिए अनावश्यक विदेश यात्राओं, विदेशी पर्यटन,विदेश में शादी( डेस्टिनेशन वेडिंग) के आयोजन के स्थान पर जब हम घरेलू पर्यटन एवं भारत में ही उत्सव मनाने को प्रोत्साहन देंगे तो इस कदम का प्रत्यक्ष प्रभाव होगा मुद्रा को बाहर जाने से रोकना (क्योंकि रुपया 85 से टूटकर 93 पर आ गया है अतः डॉलर बचाना जरूरी है) तथा अप्रत्यक्ष किंतु दूरगामी परिणाम होगा,भारतीय संस्कृति एवं ऐतिहासिक विरासत के नजदीक आना। हमारी भावी पीढ़ी जो विश्व के सात आश्चर्य को तो जानती है, पर उसे अजंता, एलोरा, बृहदेश्वर, सांची, कांची, मदुराई एवं कोणार्क जैसी महान भारतीय वास्तुकला एवं स्थापत्य के अतुल्य भारत से भी परिचित होने का अवसर मिलेगा।

विदेशी ब्रांडो की बजाय देश में निर्मित और स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों को प्राथमिकता देने का आवाहन किया गया है। आर्थिक एवं स्वास्थ्य कारणों से खाद्य तेलों के इस्तेमाल में कमी लाने का सुझाव बहुत ही आवश्यक है। रोजमर्रा के उपभोग का सामान बनाने वाली (एफएमसीजी) कंपनीयों के हालिया तिमाही नतीजों के अनुसार पश्चिम एशिया के इस भू राजनीतिक तनाव के चलते, वैश्विक सप्लाई चैन प्रभावित हुई है, जिससे अभी तक लगभग 8-10 प्रतिशत की लागत बढ़ चुकी है।और यदि यह क्रम ऐसे ही चलता रहा तो संभावित रूप से लगभग 20% तक होने वाली यह वृद्धि देशवासियों को महंगाई की और मार झेलने को विवश करेगी।अतः दैनिक उपयोग की वस्तुओं के साथ-साथ “मेड इन इंडिया” तथा “वोकल फॉर लोकल” को प्राथमिकता देकर देश के उद्योग धंधों और रोजगार को फायदा पहुंचाना, हम देशवासियों के लिए ही श्रेयस्कर होगा।

एक वर्ष तक गैर आवश्यक सोने की खरीदारी से बचने की अपील और भी महत्वपूर्ण है।चूंकि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीददार देश है और हम प्रत्येक वर्ष लगभग 5 लाख करोड रुपए का सोना आयात करते हैं।शादी के सीजन, दिवाली, धनतेरस और अक्षय तृतीया जैसे अवसरों पर सोने की खरीदारी में 200 प्रतिशत तक का उछाल देखा गया है। जिससे व्यापार घाटे की स्थिति बनती है। यह सही है कि सोने की कीमत और रुपए की कमजोरी के बीच सीधा-सीधा संबंध होता है, अतः जैसे-जैसे सोना महंगा होता है तो रुपया और टूट जाता है।अतः हमारे सोने के गहने खरीदने में कमी से विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग 50% तक घटाने एवं प्राकृतिक खेती को अपनाने के साथ ही डीजल पंप की जगह सौर पंप लगाने की अपील भी बहुत महत्वपूर्ण है।भारत पोटाश,फास्फेट और यूरिया की अपनी जरूरतों के लिए अधिकतर आयात पर ही निर्भर है।गत वर्ष उर्वरक सब्सिडी का बोझ लगभग 1.75 लाख करोड़ का था, साथ ही यूरिया के उत्पादन के लिए भी ईंधन और गैस चाहिए। जिसके आयात का ही तो संकट यह चल रहा है। अतः खाद के मूल्य में आ रही महंगाई का स्थानापन्न समाधान है -प्राकृतिक खेती।इस कदम का अप्रत्यक्ष लाभ होगा भूमि के उत्पादकता में सुधार के साथ साथ मानव स्वास्थ्य में सुधार।चूंकि उर्वरको के अत्यधिक प्रयोग से भूमि को लगातार नुकसान पहुंच रहा है और एजेंसीयां पहले से ही ऑर्गेनिक फसल,अनाज एवं उत्पादों की आवश्यकता अर्थात जैविक खेती पर लगातार जोर दे रही हैं।

पिछले दो महीने से चल रहे इस वैश्विक संकट का असर पूरी दुनिया पर तो है ही परंतु भारत पर और भी गंभीर असर पड़ा है। भारत सरकार लगातार इसके लिए प्रयास कर रही है। गृहमंत्री अमित शाह के अनुसार वैश्विक संकट के इस दौर में मोदी जी की अपील…भारत को आत्मनिर्भर और एनर्जी सिक्योर राष्ट्र बनाने का स्पष्ट रोड मैप है। यह वैश्विक चुनौतियों के बीच देश को एक राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में निर्णायक सिद्ध होगा। हालांकि यह अपील भारत के सामने भविष्य में आने वाले संकट का स्पष्ट संकेत भी दिखाई दे रहा है। अतः ऐसी स्थिति में एक सशक्त एवं आत्मनिर्भर लोकतंत्र की सफलता इस बात पर ही निर्भर करती है, कि हम इस चुनौती का सामना, सरकार के साथ जन भागीदारी के बल पर करें।