अजय कुमार
उत्तर प्रदेश के नोएडा की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के पिता व लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता इंद्र देव सिंह के तीन कातिलों को सीबीआई कोर्ट ने हत्या और साजिश में दोषी करार दिया है। सीबीआई-दो के विशेष न्यायाधीश वायु नंदन मिश्रा ने ने कातिलों को सजा सुनाने के लिए सात जुलाई की तारीख तय की है। यह सजा सुनाने में कोर्ट को करीब 24 साल लग गये। कोर्ट ने इंद्र देव की हत्या में शूटर विक्रम यादव उर्फ कालिया उसके साथी पन्ना सिंह और ब्रजेश कुमार यादव उर्फ मुन्ना पर दोष सिद्ध होते ही कोर्ट रूम में बैठीं दिवंगत अधिवक्ता इंद्र देव की पत्नी नयनतारा की आंखे भर आईं। कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआई के विशेष अभियोजन अधिकारी केपी सिंह ने साक्ष्य प्रस्तुत किए।सीबीआई के अभियोजन अधिकारी केपी सिंह ने बताया कि शूटर कालिया काफी समय से जेल में था, जबकि पन्ना सिंह और ब्रजेश कुमार उर्फ मुन्ना यादव जमानत पर थे। दोष सिद्ध होते ही कोर्ट ने पन्ना सिंह और ब्रजेश कुमार को जेल भेज दिया।
बहरहाल, अधिवक्ता आरके यादव के मुताबिक अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह लखनऊ के छन्नी लाल चौराहे के पास स्थित अपनी कोठी में परिवार में रहते थे। आठ अगस्त 2002 को स्कूटर से कचहरी जा रहे थे, इस बीच कलेक्ट्रेट के पीछे वाली गली में स्कूटर सवार बदमाशों ने उन्हें दो गोलियां मारी थी। एक गोली उनकी गर्दन में लगी और वह मौके पर ही गिर गए। पुलिस और सीबीआई की तफ्तीश में पता चला था कि वारदात को अंजाम शूटर कालिया और उसके साथी ब्रजेश ने दिया था। दोनों हत्यारे भी स्कूटर से ही थे। ब्रजेश स्कूटर चला रहा था और कालिया पीछे बैठा था। कैसरबाग कोतवाली में इंद्रदेव की पत्नी नयनतारा की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था। मुकदमे में सुरजन लाल वर्मा, डॉ. सुषमा वर्मा और सुरेश वर्मा आरोपी बने थे। पुलिस और सीबीआई की तफ्तीश में तीनों के खिलाफ साक्ष्य नहीं मिले थे। तफ्तीश में शूटर कालिया, पन्ना सिंह, ब्रजेश, मन्ना लाल गुप्ता, वेद प्रकाश उर्फ नेता और छोटेलाल उर्फ छोटू के नाम सामने आए थे। अधिवक्ता आरके यादव के मुताबिक मन्ना लाल गुप्ता (पूर्व लेखपाल) व हत्या के मुख्य साजिशकर्ता, वेद प्रकाश उर्फ नेता, छोटे लाल उर्फ छोटू की मुकदमे के ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी थी। बहुचर्चित हत्याकांड में तीनों मृत हत्यारोपियों के अलावा शूटर विक्रम यादव उर्फ कालिया, पन्ना सिंह और ब्रजेश कुल छह आरोपी थी।





