कलियुगी मानव का काक्रोच अवतार

The cockroach incarnation of the Kaliyuga man

विनोद कुमार विक्की

ईश्वर के नरसिंह अवतार, शूकर (वराह) अवतार, मत्स्य अवतार, कच्छप अवतार आदि के बारे में तो सबने सुना है, पर इन दिनों मानव के ‘काक्रोच अवतार’ को देखना पड़ रहा है।

जब दुनिया हार्मुज़ की खाड़ी से तेल निकालने की जुगत में उलझी हुई है, तब हमारे यहाँ तिलचट्टों का ‘निकलना’ शुरू हो गया है। फर्क बस इतना है कि ये नाली और रसोई से कम, और सोशल मीडिया से ज्यादा निकल रहे हैं।

वैसे तेल के मामले में हम भले खाड़ी देशों और रूस पर निर्भर हों, लेकिन तिलचट्टों के मामले में हम पूरी तरह आत्मनिर्भर हो रहे हैं। पहले ये प्राणी किचन, बाथरूम और गंदगी में पनपते थे; अब इंस्टा, एक्स और फेसबुक जैसे ‘डिजिटल स्थलों’ में फल-फूल रहे हैं। विचार, व्यवहार और विकास की गंदगी में ही नई प्रजाति पनपती है।

एआई और सोशल मीडिया के प्रसव से इन दिनों मानवीय तिलचट्टा नामक एक नई प्रजाति की उत्पत्ति हुई है। यह प्रजाति बड़ी तेज़ी से फैल रही है और रातों-रात ‘वैश्विक सदस्य’, ‘जिला अध्यक्ष’, ‘प्रदेश संयोजक’ और ‘राष्ट्रीय प्रवक्ता’ जैसे पदों पर विराजमान भी हो रही है। ऐसे गैर-निबंधित स्वघोषित पदों हेतु योग्यता की बजाय ‘ऑनलाइन सक्रियता’ ही डिग्री का मानक बन चुकी है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि असली तिलचट्टे अपने एंटीना से वातावरण की नमी, गंध, कंपन आदि का आकलन कर लेते हैं। वहीं मानवीय तिलचट्टे एआई के सहारे राजनीतिक हवा का रुख भाँप रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि इन तिलचट्टों में अधिकांश युवा हैं, जो बेरोज़गारी की तपिश में तप रहे थे। अचानक उन्हें ‘डिजिटल राजनीति’ में शरण मिल गई। अब वे दिन-रात पोस्ट, ट्वीट और कमेंट के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, मानो रोजगार नहीं, ‘एंगेजमेंट’ ही असली कमाई हो।

कुछ पत्रकार इस नई प्रजाति का गर्मजोशी से स्वागत कर रहे हैं, शायद उन्हें कंटेंट की नई फसल मिल गई है। वहीं पुराने घाघ नेताओं को इस ‘तिलचट्टा उछाल’ से हल्का-सा टाइफायड बुखार चढ़ने लगा है। उन्हें डर है कि कहीं ये डिजिटल कीड़े उनकी कुर्सियों तक न पहुँच जाएँ।

बहरहाल, राजनीति अब केवल मैदानों और सभाओं तक सीमित नहीं रही। अब सोशल मीडिया पर ‘काक्रोच जनता पार्टी’ भी सक्रिय है, जिसकी शाखाएँ हर प्लेटफॉर्म पर फैल रही हैं। इसके जवाब में विरोधी दल भी एआई के बूते अपनी-अपनी ‘रेड हीट जनता पार्टी’ खड़ी कर रहे हैं।

तेल की कमी ने आम आदमी का तेल निकाला, तो लोग मोटर साइकिल से साइकिल पर उतर आएं, जबकि कथित काक्रोच टिप्पणी और बेरोजगारी ने युवाओं का तेल निकाला, तो वे काक्रोच बन सोशल मीडिया पर उतर आएं।

कुल मिलाकर, स्थितियाँ ऐसी बन पड़ी हैं कि तेल की कमी तो है, पर तिलचट्टों की नहीं। मानव के तिलचट्टा अवतार की तपिश के बीच प्रचंड गर्मी के इस मौसम में ‘हीट वेब’ और ‘रेड हीट’ भी काफी चर्चा में है।