ब्राह्मण परशुरामजी में क्षत्रियों वाले गुण आश्चर्यचकित करते हैं

The Kshatriya qualities in Brahmin Parashurama are surprising

गोवर्द्धन दास बिन्नाणी “राजा बाबू”

सनातन धर्मावलम्बियों में भगवान परशुरामजी का एक विशिष्ट स्थान है। ये प्रभु श्री हरि विष्णुजी के छठे अवतार हैं।ये प्रभु महादेवजी के परम भक्त तो हैं हीं साथ में अनुशासित शिष्य भी। इन्होंने सभी तरह की शिक्षा-दीक्षा व युद्ध कला वगैरह प्रभु महादेव जी से ही प्राप्त की।इनकी कड़ी तपस्या से प्रसन्न हो प्रभु शिवजी ने इन्हें परशु [फरसा] नामक एक अस्त्र प्रदान किया। इसके बाद ये वह परशु अस्त्र हमेशा साथ रखने लगे जिसके चलते वे कालान्तर में परशुराम के नाम से विख्यात हो गये जबकि इनके माता – पिता ने इनका नाम राम रखा था ।

अब संक्षेप में प्रस्तुत कर रहा हूँ भगवान परशुरामजी से सम्बन्धित कुछ आवश्यक जानकारीयाँ –

परशुरामजी का अवतार कौन से युग में हुआ था और कब हुआ?

– इनका जन्म त्रेता युग में वैशाख शुक्ल तृतीया को अर्थात अक्षय तृतीया के दिन हुवा था।

परशुराम जी किस के अवतार थे तथा कौन से अवतार थे ?
– प्रभु श्री हरि विष्णुजी के छठे अवतार थे।

परशुराम जी किस के वंशज थे ?

– ब्रह्मा जी के मानस पुत्र भृगु ऋषि के वंशज।

ब्रह्मा जी की कौन सी पीढ़ी में परशुरामजी अवतरित हुए ?

– पाॅंचवी पीढी में (ब्रह्मा जी के भृगु ऋषि,भृगु ऋषि के ऋचिक,ऋचिक के जमदग्नि, जमदग्नि के परशुरामजी)।

परशुराम जी के माता पिता का नाम ?

– रेणुका और जमदग्नि।

परशुरामजी के दादाजी और दादीजी का नाम क्या था ?

– सत्यवती और ऋचीक मुनि।

जमदग्नि ऋषि की सन्तान में परशुरामजी का कौन सा स्थान था ?

– परशुरामजी सब से छोटे पुत्र थे।

ऋषि जमदग्नि की हत्या किसने की ?

-सहस्रार्जुन ने ऋषि जमदग्नि का वध किया था।

परशुरामजी की माता ने किस प्रकार देह त्याग की ?

– ऋषि जमदग्नि की हत्या के पश्चात् शोक मग्न होकर सती हो गई।

परशुराम जी के गुरु कौन थे ?

– शंकर भगवान्।

बाल्यावस्था में परशुराम जी ने भगवान् की तपस्या कौन से स्थान पर की थी ?

– परम पवित्र चक्रतीर्थ।

परशुराम जी के पिता सप्तर्षियों के मण्डल में कौन से ऋषि हुए ?

– सातवें ऋषि

पृथ्वी पर कौन से वंश का अन्त करने के लिए स्वयं भगवान् ने परशुराम के रूप में अंशावतार ग्रहण किया था ?

– हैहयवंश का।पौराणिक कथाओं के अनुसार, परशुराम ने हैहय वंश के राजा सहस्त्रार्जुन और उसके पुत्रों का वध किया था। यह वंश अत्याचारी और दुष्ट माना जाता था, इसलिए परशुराम ने उन्हें दंडित किया।

परशुराम जी ने किस राजा का वध किया ?

– कार्तवीर्यार्जुन, जिन्हें सहस्त्रबाहु अर्जुन या सहस्रार्जुन भी कहा जाता है। ये हैहय साम्राज्य के राजा थे।वे सुदर्शन चक्र के अवतार और भगवान दत्तात्रेय के भक्त थे। उनके हजार हाथ थे। जब इसने ऋषि जमदग्नि का वध कर दिया तब भगवान परशुरामजी ने इसके वंश को समाप्त करने का संकल्प लिया।

फिर जब इनका युद्ध भगवान परशुरामजी से हुवा तब इनके सभी हाथ काट भगवान परशुरामजी ने इनका अन्त कर दिया।

परशुरामजी ने पृथ्वी को कितनी बार आततायी विहीन कर दिया था ?

– इक्कीस बार।

भगवान् परशुराम जी की गति किस के समान बताई गई है ?

– मन और वायु के समान।

परशुरामजी के प्रमुख शिष्यों के नाम ?

– भीष्म पितामह,गुरु द्रोणाचार्य,दानवीर कर्ण।

कैलाश पर्वत पर परशुराम जी का किस के साथ युद्ध हुआ और उसका क्या परिणाम रहा ?

– गणेश जी के साथ और उस युद्ध के परिणाम स्वरूप गणेश जी का एक दाँत टूट गया । तत्पश्चात वो एकदन्त कहलाये।

परशुरामजी का सहस्त्रबाहु से युद्ध किस स्थल पर हुआ था ?

– नर्मदाजी के तट पर।

प्रभु शंकरजी ने परशुरामजी को कौन सा दुर्लभ मन्त्र दिया था ?

– प्रभु महादेवजी ने उन्हें प्रभु श्रीकृष्णजी का त्रेलोक्य विजय कवच – जो तीन लोकों में विजय प्राप्त करने की शक्ति प्रदान करता है, प्रदान किया। त्रैलोक्य विजय कवच के अलावा शिवजी से उन्हें स्तवराज स्तोत्र एवं मन्त्र कल्पतरु भी प्राप्त हुए।

मत्स्यराज से कवच माँगने के लिए परशुरामजी ने कौन सा रूप धारण किया ?

– शृंगधारी संन्यासी का।

भागवत महापुराण के अनुसार आज भी परशुराम जी कौन से पर्वत पर निवास कर रहे हैं ?

– महेन्द्र पर्वत पर।

अन्त में यह अवश्य बताना चाहूँगा कि सर्वशक्तिमान प्रभु श्री शंकरजी ने परशुरामजी को, उनकी तपस्या और भक्ति से प्रसन्न हो अमरता प्रदान की। अतः परशुराम जी आज भी धरती पर ही मौजूद हैं। इसी कारण से परशुराम जी की पूजा नहीं बल्कि उनका आवाह्न किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि योग-ध्यान से भक्त आज भी उनका आवाह्न करते हैं, जिससे साधक को पराक्रम और साहस की प्राप्ति होती है।