एन जी भट्ट
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने मई 2014 से जून 2026 तक बारह वर्षों का कार्यकाल पूरा कर लिया है। यह अवधि भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखी जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी और 10 जून 2026 तक उनका प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल लगभग 4,398 दिन (12 वर्ष और 15 दिन) का हो चुका है। तुलनात्मक दृष्टि से देखा जाए तो देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू लगभग 6,130 दिन (1947–1964) प्रधानमंत्री रहे, जो अब भी भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री हैं। मोदी भारत के इतिहास में एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में प्रधानमंत्री पद पर सबसे लंबे समय तक रहने वाले नेताओं में शीर्ष स्थानों पर हैं और लगातार तीसरे कार्यकाल में हैं। पण्डित जवाहर लाल नेहरू 1947 से 1952 तक मनोनीत प्रधानमंत्री रहें क्योंकि देश में पहला आम चुनाव 1952 में हुए।फिर भी यदि मोदी अपना वर्तमान कार्यकाल जून 2029 तक पूरा करते हैं, तो उनका कुल कार्यकाल लगभग 5,500 दिन के आसपास पहुँच जाएगा, जोकि पण्डित नेहरू के रिकॉर्ड से तब भी कुछ कम रहेगा। लेकिन यदि नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री के कार्यकाल को जोड़कर देखा जाए, तो वे 7 अक्टूबर 2001 से लगातार किसी न किसी निर्वाचित सरकार के प्रमुख (सी एम/पी एम ) के रूप में कार्यरत रहे हैं। 7 अक्टूबर 2001 से 10 जून 2026 तक,कुल अवधि: लगभग 24 वर्ष 8 माह कुल समय: लगभग 9,013 दिन (समावेशी गणना के अनुसार) वे अनवरत शासन में है। यदि इन दिनों का विभाजन किया जाए तो नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 7 अक्टूबर 2001 – 26 मई 2014 (लगभग 12 वर्ष 7 माह) रहे हैं और भारत के प्रधानमंत्री: 26 मई 2014 – 10 जून 2026 (12 वर्ष से अधिक) तक बने हुए है।
इस प्रकार मोदी भारत के उन विरले नेताओं में हैं जो लगभग पौने 25 वर्ष से लगातार किसी राज्य या केंद्र सरकार के निर्वाचित प्रमुख पद पर बने हुए हैं। भारतीय राजनीति में इतने लंबे समय तक निरंतर शासन-नेतृत्व के उदाहरण बहुत कम मिलते हैं। केवल जवाहर लाल नेहरू का प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल उनसे लंबा था, लेकिन मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों पदों को जोड़कर देखें तो मोदी का लगातार शासनकाल भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे लंबे कार्यकालों में शामिल हो चुका है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के कार्यकाल की तुलना कई दृष्टियों से की जा सकती है, लेकिन एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में देखें तो दोनों की राजनीतिक यात्रा और जनादेश का स्वरूप अलग-अलग रहा है।
जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त 1947 से 27 मई 1964 तक लगभग 17 वर्ष प्रधानमंत्री रहे। नरेन्द्र मोदी 26 मई 2014 से लगातार प्रधानमंत्री हैं और जून 2026 तक 12 वर्ष पूरे कर चुके हैं। पण्डित नेहरू ने 1952, 1957 और 1962 के आम चुनावों में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत दिलाया। मोदी ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को सत्ता तक पहुँचाया। 2014 और 2019 में भाजपा को अपने दम पर बहुमत मिला, जबकि 2024 में एनडीए गठबंधन को बहुमत प्राप्त हुआ ।
पण्डित नेहरू स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेता रहे और स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की नींव रखने में उनकी केंद्रीय भूमिका रही। मोदी ने संगठनात्मक राजनीति से उभरकर मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्रीय नेतृत्व स्थापित किया। वे गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में आए और आदिनांक तक अनवरत सेवा शासन कर रहे है।पण्डित नेहरू का जोर लोकतांत्रिक संस्थाओं, सार्वजनिक क्षेत्र, वैज्ञानिक विकास और गुटनिरपेक्ष विदेश नीति पर था। वहीं मोदी का जोर बुनियादी ढाँचे, डिजिटल शासन, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, कल्याणकारी योजनाओं, विनिर्माण और भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत करने पर रहा है।
राजनीतिक शैली की दृष्टि से पण्डित जवाहर लाल नेहरू की पहचान वैचारिक और संसदीय बहसों के नेता के रूप में थी। मोदी की पहचान जनसंपर्क, बड़े जन अभियानों और प्रत्यक्ष संवाद आधारित नेतृत्व शैली से जुड़ी है। उस प्रकार यदि केवल लगातार निर्वाचित जनादेश और प्रधानमंत्री पद पर समय की दृष्टि से देखें, तो नेहरू अब भी भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री हैं। वहीं मोदी स्वतंत्र भारत के उन चुनिंदा प्रधानमंत्रियों में शामिल हो चुके हैं जिन्होंने लगातार तीन लोकसभा चुनावों में जीत हासिल कर एक दशक से अधिक समय तक सत्ता में बने रहने का रिकॉर्ड बनाया है। दोनों नेताओं ने अलग-अलग ऐतिहासिक परिस्थितियों में देश का नेतृत्व किया और अपने-अपने दौर की चुनौतियों के अनुसार भारत की दिशा तय की।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले बारह वर्षों के लगातार अपने शासन काल में भारत ने आर्थिक, सामाजिक, कूटनीतिक और तकनीकी क्षेत्रों में अनेक परिवर्तन देखे हैं। साथ ही इस दौर में सरकार की नीतियों और निर्णयों को लेकर व्यापक बहस भी हुई है। इसलिए मोदी सरकार के बारह वर्षों का मूल्यांकन उपलब्धियों और चुनौतियों दोनों के संदर्भ में किया जाना चाहिए। वर्ष 2014 में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलने के बाद नरेंद्र मोदी ने एक मजबूत और निर्णायक नेतृत्व की छवि स्थापित की। 2019 और 2024 के आम चुनावों में भी भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को जनादेश प्राप्त हुआ। इससे केंद्र में राजनीतिक स्थिरता बनी रही, जो किसी भी देश के दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं को एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित किया, जो सीधे जनता से संवाद करता है और राष्ट्रीय मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाता है। उनकी लोकप्रियता ने भाजपा को देश के अनेक राज्यों में विस्तार करने में मदद की।मोदी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में आधारभूत ढांचे का विस्तार, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विकास और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना शामिल है। जनधन योजना, डिजिटल भुगतान व्यवस्था, यूपीआई, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) तथा स्टार्टअप और नवाचार को प्रोत्साहन देने वाली योजनाओं ने प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने का प्रयास किया। भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ और वैश्विक स्तर पर उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। सड़क, रेलवे, बंदरगाह और हवाई अड्डों के निर्माण में उल्लेखनीय निवेश किया गया। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं के माध्यम से विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। हालांकि बेरोजगारी, महंगाई और ग्रामीण आय जैसे मुद्दों पर सरकार को आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा। विपक्ष का तर्क रहा कि आर्थिक विकास के लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच पाए हैं। लेकिन मोदी सरकार ने गरीब और वंचित वर्गों के लिए अनेक योजनाएँ शुरू कीं। उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन, प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से आवास, स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय निर्माण तथा आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य योजनाओं ने करोड़ों लोगों को प्रभावित किया। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं ने जीवन स्तर सुधारने और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दूसरी ओर आलोचक इन योजनाओं के क्रियान्वयन, लाभार्थियों की वास्तविक स्थिति और रोजगार सृजन से जुड़े सवाल उठाते रहे हैं।
मोदी सरकार के बारह वर्षों में भारत की विदेश नीति अधिक सक्रिय दिखाई दी। भारत ने अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों के साथ संबंधों को मजबूत किया। जी-20 की अध्यक्षता और वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका को इस दौर की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।भारत ने स्वयं को वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की आवाज के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया। कोविड-19 महामारी के दौरान वैक्सीन मैत्री कार्यक्रम और आपदा राहत सहयोग ने भी भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को मजबूती दी।राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक तथा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने जैसे निर्णयों को अपनी प्रमुख उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), तीन तलाक कानून और समान नागरिक संहिता पर चल रही बहस जैसे मुद्दों ने भी राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित किया।
समर्थकों के अनुसार ये निर्णय राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा को मजबूत करने वाले कदम थे, जबकि आलोचकों ने इन्हें संवैधानिक और सामाजिक दृष्टि से विवादास्पद बताया।
बारह वर्षों के दौरान सरकार को कई कठिन चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा। कोविड-19 महामारी, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, बेरोजगारी, कृषि संकट और सामाजिक ध्रुवीकरण जैसे विषय लगातार चर्चा में रहे। कृषि कानूनों के खिलाफ हुए किसान आंदोलन और बाद में उन कानूनों की वापसी ने यह भी दिखाया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार को जनमत के दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
विपक्ष और कुछ नागरिक संगठनों ने संस्थाओं की स्वायत्तता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक विमर्श को लेकर भी चिंताएँ व्यक्त की हैं।
कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारह वर्ष भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली और परिवर्तनकारी दौरों में गिने जाएंगे। इस अवधि में भारत ने डिजिटल क्रांति, आधारभूत संरचना के विस्तार, सामाजिक कल्याण योजनाओं और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। वहीं बेरोजगारी, सामाजिक समरसता, कृषि और आर्थिक असमानता जैसी चुनौतियाँ अभी भी नीति-निर्माताओं के सामने मौजूद हैं।निष्पक्ष रूप से कहा जाए तो मोदी युग का मूल्यांकन केवल राजनीतिक लोकप्रियता या आलोचना के आधार पर नहीं, बल्कि इस बात से होगा कि इन बारह वर्षों में शुरू किए गए परिवर्तन भारत के दीर्घकालिक विकास, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कितना मजबूत बना पाए हैं।
बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित एनडीए के मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री सम्मेलन को संबोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ हासिल की हैं। उन्होंने एनडीए शासित राज्यों से केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के साथ “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आकांक्षी भारत ही विकसित भारत की मजबूत नींव है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, ड्रोन और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भारत को वैश्विक नेतृत्व दिलाने पर जोर दिया तथा जनभागीदारी को विकास की सबसे बड़ी शक्ति बताया।
नई दिल्ली में एनडीए मुख्यमंत्रियों की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष रूप से झालमुड़ी परोसी गई, जिसे उन्होंने खाया भी। यह बंगाल का लोकप्रिय पारंपरिक नाश्ता है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुवेंद्रु अधिकारी ने प्रधानमंत्री को झालमुड़ी परोसी। इस दौरान का वीडियो और तस्वीरें भी चर्चा में रहीं। झालमुड़ी वाला प्रसंग इसलिए भी चर्चित रहा क्योंकि गंभीर राजनीतिक बैठक के बीच प्रधानमंत्री का यह सहज और अनौपचारिक अंदाज लोगों को देखने को मिला। नई दिल्ली के भारत मंडपम में एनडीए मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों की बैठक के दौरान कुछ रोचक बातें भी चर्चा में रहीं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताओं के साथ अनौपचारिक माहौल में बातचीत की, जिससे बैठक केवल राजनीतिक रणनीति तक सीमित नहीं रही।
बैठक में “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को लेकर राज्यों की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया।
विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने राज्यों की सफल योजनाओं और नवाचारों की प्रस्तुति दी, ताकि दूसरे राज्य भी उनसे सीख सकें।प्रधानमंत्री ने सुशासन, तकनीक के उपयोग, निवेश आकर्षित करने और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।बैठक में राजनीतिक मुद्दों से अधिक शासन, विकास और सेवा वितरण को केंद्र में रखने का संदेश दिया गया। एनडीए के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उपलब्धियों और भविष्य की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
एनडीए की दिल्ली बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल को “सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण” का काल बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना रहा है और राजस्थान सरकार भी “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
बैठक के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि राजस्थान में सुशासन, निवेश, आधारभूत ढाँचे के विकास, युवा सशक्तिकरण और जनकल्याण की योजनाओं को गति दी जा रही है। जिसे एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।





