दीपक कुमार त्यागी
- आईजीएल के फर्जी लिंक से लोगों को चूना लगा रहे हैं साइबर ठग!
- इजरायल-अमेरिका व ईरान युद्ध के चलते गैस की कमी के इस दौर में भय का फायदा उठा रहे हैं साइबर ठग!
- लोगों को आईजीएल के फेक
एपीके लिंक भेजकर के फ्रॉड कर रहे हैं साइबर ठग! - साइबर फ्रॉड करने वाले लोग विश्वसनीय संस्थानों के फर्जी ऐप्स व वेबपोर्टल बनाकर देते हैं निरंतर ठगी को अंजाम!
आईजीएल लिंक से ठगी के मामले सबसे चिंताजनक बात यह है कि साइबर फ्राड गैंग के सदस्य अधिकतर मामलों में खाते में धनराशि ट्रांसफर ना करके विभिन्न मर्चेंट से फ्राड की गई धनराशि से खरीददारी कर रहे हैं, जिसके चलते इस तरह के साइबर फ्राड के मामले में धनराशि रिकवर होने की संभावना नहीं होती है!
पुलिस व आईजीएल उपभोक्ताओं को निरंतर चेतावनी जारी कर उन्हें साइबर ठगों से बचने की दे रहा है टिप्स!
दिल्ली : साइबर ठगों से बचना देश व दुनिया में दिन-प्रतिदिन चुनौतीपूर्ण कार्य होता जा रहा है। इजरायल-अमेरिका व ईरान युद्ध के इस दौर में गैस की किल्लत के बेवजह के भय का साइबर ठग निरंतर फायदा उठा कर लोगों को ठगने का कार्य कर रहे हैं। हालांकि आये दिन देश भर में पुलिस के साइबर सैल लगातार साइबर धोखाधड़ी के संगठित रैकेटों का भंडाफोड़ करते रहते है, लेकिन फिर भी साइबर ठग नये-नये हथकंडों से भोले-भाले लोगों के साथ ठगी करने से बाज नहीं आते हैं। हाल ही साइबर ठगों ने इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) के नाम से लोगों को लिंक भेज करके बड़े पैमाने पर ठगी करना शुरू कर रखा है, यह साइबर ठग गैंग के गुर्गे आईजीएल के अधिकारी बन लोगों के गैस के कनेक्शन को काटने के धमकी देकर के भोले-भाले उपभोक्ताओं के बैंक खातों से उनकी जीवन भर की कमाई ठगने का कार्य कर रहे हैं। साइबर ठग गैंग के सदस्य आम-जनमानस के उपयोग के विभिन्न आधिकारिक लिंक व यूटिलिटी ऐप्स के रूप में छिपे हुए मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके आम लोगों के मोबाइल फोन के माध्यम से उनके वित्तीय डेटा व बैंक खातों तक अनधिकृत पहुंच बनाकर ठगी करने का कार्य करते हैं।
आईजीएल के नाम पर ठगी करने वाले इन साइबर ठगों के कारनामों की एक छोटी सी बानगी देखें तो सूत्रों के अनुसार गाजियाबाद के एक अकेले थाने में ही पिछले लगभग एक माह में ही लगभग 4 दर्जन के करीब मामलों में ही एक करोड़ों रुपए की ठगी साइबर ठग कर चुके हैं। ठगी का शिकार बनाने के लिए यह लोगों की जल्दबाजी, फ्री का लालच और अज्ञानता का साइबर ठगों के गैंग के गुर्गे जमकर लाभ उठाते रहते हैं। दूसरी तरफ़ आकंड़ों को देंखे तो देश भर में साइबर ठगी के बढ़ते हुए अपराधों के अनुपात में पुलिस के पास बेहद ही सीमित संसाधन हैं, जिससे समय रहते धरातल पर तेज़ी के साथ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती है, जिसका लाभ साइबर ठगों के गैंग जमकर ले रहे हैं।
आईजीएल के लिंक के नाम पर चल रही ठगी के मामलों से जुड़े एक जांचकर्ताओं ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि गैंग के गुर्गे आईजीएल के प्रतिनिधि बनकर उपभोक्ताओं से संपर्क करता है और उन्हें कथित तौर पर गैस के लंबित बिल, केवाईसी अपडेट या कनेक्शन काटे जाने की धमकी देता है। साइबर ठगों के गैंग के यह गुर्गे पीड़ितों को बरगलाते हुए उन पर दबाव डालते है कि वह तुरंत वाट्सएप या मेसेज आदि पर भेजी गई आईजीएल की एपीके फ़ाइल डाउनलोड करें और एक बार लिंक पर क्लिक करने के साथ ही यह फ़ाइल इंस्टॉल होने के साथ ही धोखे से बहुत सारी महत्वपूर्ण अनुमतियाँ साइबर ठग प्राप्त कर लेते हैं, जिन अनुमति के माध्यम से साइबर ठग मोबाइल हैक करते हुए उपभोक्ता का पासवर्ड व ओटीपी पढ़ने, फोन की स्क्रीन को मिरर करने, संदेशों को इंटरसेप्ट करने और बैंकिंग एप्लिकेशन तक अपनी पहुँचने बनाने सुविधा हासिल कर लेते हैं। जिसके माध्यम से चंद ही मिनटों में लोगों के बैंक खातों से अनधिकृत लेनदेन हो जाते हैं और उन्हें समय रहते हुए पता तक भी नहीं चल पाता है, जिसके चलते ही पीड़ित समय रहते अपने बचाव की कोई भी कार्रवाई नहीं कर पाते हैं और साइबर ठग उनके जीवन भर की कमाई को लेकर के बैखौफ होकर चंपत हो जाते हैं।
साइबर विशेषज्ञ की सलाह
साइबर ठगों से बचने के बेहद ज्वलंत मुद्दे पर पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद के इन्दिरापुरम थाने के साइबर सैल के तेजतर्रार प्रभारी अनिल वर्मा कहते हैं कि साइबर सुरक्षा के संदर्भ में पुलिस आम-जनमानस को निरंतर जागरूक करने का कार्य करती रहती है, लेकिन फिर भी लोग साइबर ठगों के झांसे में आ जाते हैं। इसलिए साइबर सुरक्षा के दृष्टिकोण से लोगों को हमेशा आधिकारिक लिंक व ऐप का ही उपयोग करना चाहिए, किसी भी अनाधिकृत लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए। आईजीएल के मामले में भुगतान करने के लिए केवल उपभोक्त IGL Connect App या आईजीएल की आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें। किसी भी तरह की संदेहास्पद लिंक पर क्लिक करने से हमेशा बचें, किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही कोई संदिग्ध APK फाइल अपने मोबाइल में इंस्टॉल करें। वहीं आईजीएल के नाम से कोई भी संदेहास्पद लिंक या मैसेज मिलने पर आईजीएल के अधिकारिक टोल-फ्री नंबर पर संपर्क करें। किसी भी तरह की ठगी होने पर तुरंत ही साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर 24 घंटे के अंदर कॉल करें, उसके बाद National Cyber Crime Reporting Portal पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। किसी भी डिजिटल प्लेटफार्म का उपयोग करते समय समझदार बने सुरक्षित रहें।





