अशोक भाटिया
महिलाओं को आरक्षण के पहले रक्षण (सुरक्षा) की आवश्यकता का मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023) के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। कई राजनीतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि केवल आरक्षण देने से महिलाओं का जीवन नहीं बदलेगा। जब तक समाज में महिलाओं के खिलाफ अपराध (रक्षण) कम नहीं होंगे, तब तक आरक्षण का वास्तविक लाभ हाशिए पर खड़ी महिलाओं तक नहीं पहुंचेगा।
गौरतलब है कि नासिक का टीसीएस का मामला अब एक साधारण कॉर्पोरेट विवाद से निकलकर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन चुका है। यौन उत्पीड़न के आरोप, धर्मांतरण का आरोप, कॉर्पोरेट जिहाद की बहस, मुख्य आरोपी निदा खान का फरार होना, उसकी अग्रिम जमानत की अर्जी, और अब एनआईए की एंट्री। इन सबने इस केस को बेहद पेचीदा बना दिया है। सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक इस पर बहस तेज है। शुरुआती दिनों में जहां कई तरह की अपुष्ट खबरें सामने आईं वहीं अब खुद टीसीएस के सीईओ के। कृतिवासन ने सामने आकर कई बड़े दावों को खारिज किया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि निदा खान न तो एचआर मैनेजर हैं और न ही भर्ती से जुड़ी कोई जिम्मेदारी निभाती थीं। साथ ही डेलॉयट और ट्राइलीगल जैसी बाहरी एजेंसियों को जांच में शामिल कर यह संकेत दिया गया है कि मामला बेहद गंभीर है और हर स्तर पर सच्चाई सामने लाने की कोशिश हो रही है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने भी इस मामले में रुचि दिखाई। नासिक पुलिस ने धर्म परिवर्तन और वित्तीय लेन-देन से जुड़े अहम दस्तावेज NIA को सौंप दिए हैं। वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी एक विशेष जांच समिति गठित कर दी है। ऐसे में अब यह केस केवल कंपनी के दायरे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संवेदनशीलता से भी जुड़ गया है। सवाल यह है कि आखिर इस पूरे ‘गंदे खेल’ के पीछे सच्चाई क्या है और जांच एजेंसियां क्या खुलासा करती हैं।
नासिक टीसीएस धर्मांतरण कांड पर और भी खुलासे होते जा रहे है। टीसीएस नासिक कांड की मास्टरमाइंड मानी जा रही निदा खान ने जेल जाने से बचने के लिए नया दांव खेला है। पहले कहा गया कि निदा खान कंपनी की एचआर है। मगर परिवार का दावा है कि वह कंपनी की एचआर हेड नहीं है। वह कंपनी में एक टेलीकॉलर थी। बहरहाल, उस पर आईटी की दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक यूनिट में जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवाने का आरोप है। उसके परिवार वालों का कहना है कि निदा खान प्रेग्नेंट है और मुंबई में हैं।आरोपी निदा खान अभी टीसीएस के नासिक यूनिट में कथित धर्मांतरण मामले में फरार चल रही है। सूत्रों का कहना है कि आरोपी निदा खान ने अग्रिम जमानत के लिए स्थानीय अदालत में अर्जी दाखिल कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, निदा खान अपनी गर्भावस्था को मुख्य आधार बनाकर अग्रिम जमानत की मांग करेगी।
सूत्रों के मुताबिक, 26 वर्षीय निदा खान ने पिछले साल जनवरी में शादी के बाद मुंबई शिफ्ट किया था। उसने कंपनी के मुंबई ब्रांच में ट्रांसफर लिया था। निदा खान गर्भावस्था के शुरुआती चरण में है। उसे अग्रिम जमानत के लिए मुख्य तर्क के रूप में पेश किया जाएगा। वहीं, अभियोजन पक्ष जमानत का विरोध कर सकता है। उनका कहना है कि निदा खान इस मामले की ‘मास्टरमाइंड’ हैं, जिन्होंने पीड़ितों को धार्मिक गतिविधियों के लिए मजबूर किया।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए मामले को गंभीर बताया। उन्होंने कहा, ‘नासिक टीसीएस की घटना बहुत गंभीर है। यह एक मॉड्यूल लग रहा है, जिसकी गहरी जड़ों तक जांच चल रही है। जहां जरूरी लग रही है, वहां केंद्रीय एजेंसियों की मदद ली जा रही है। टीसीएस ने इस घटना की गंभीरता को समझा है और इसे निंदनीय बताया है। कंपनी पूरी तरह सहयोग कर रही है और जरूरी कदम उठा रही है।’
पुलिस के अनुसार, सभी आरोपियों में से केवल टीसीएस कर्मचारी निदा खान ही अभी गिरफ्तार नहीं हुई है। उसके वकील बाबा सय्यद ने कहा कि वे जल्द ही उसकी ओर से अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल करेंगे। वकील ने दावा किया कि निदा खान ‘मीडिया ट्रायल’ की शिकार है। उन्होंने बताया कि निदा खान गर्भवती है, इसलिए परिवार उसके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है।
बताया जाता है कि इस मामले में कुल 9 एफआईआर दर्ज हुई हैं। इनमें से 8 एफआईआर में यौन उत्पीड़न (Section 75 BNS) के आरोप हैं।5 एफआईआर में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने (Section 299 BNS) के आरोप हैं।कम से कम 3 मामलों में शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि उन्होंने पहले कंपनी में शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इस मामले के आरोपियों में से 5 दानिश शेख, निदा खान, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी और आसिफ अंसारी टीसीएस नासिक ब्रांच के एसोसिएट थे। रजा मेमन और तौसिफ अत्तार को शिकायतकर्ताओं ने टीम लीडर बताया है। वहीं पुणे स्थित ऑपरेशंस मैनेजर अश्विनी चैनानी एकमात्र सीनियर कर्मचारी हैं, जिन पर आरोपियों की मदद करने (abetment) का आरोप है। आरोप है कि शिकायतें मिलने के बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे आरोपी और हिम्मतवर हुए।
अन्य FIRs में भी कई चौंकाने वाले आरोप सामने आए हैं, जिनमें महिला कर्मचारियों के साथ छेड़छाड़, अश्लील इशारे करना, आपत्तिजनक टिप्पणियां करना और पुरुष कर्मचारियों पर धार्मिक दबाव बनाना शामिल है। एक शिकायत में आरोप है कि एक कर्मचारी को जबरन नमाज पढ़ने और बीफ खाने के लिए मजबूर किया गया, जबकि वह सख्त शाकाहारी था। कुछ मामलों में धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और निजी जीवन से जुड़े अनुचित सवाल पूछने के आरोप भी लगे हैं।
कई शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्होंने कंपनी के अंदर शिकायत करने की कोशिश की, लेकिन या तो उन्हें नजरअंदाज किया गया या कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। एक FIR में दावा किया गया है कि ऑपरेशंस हेड ने शिकायत को टालते हुए कहा कि ‘स्पॉटलाइट में क्यों आना चाहती हो, इसे छोड़ दो।’ कुछ मामलों में डर, नौकरी खोने की आशंका और आरोपियों के प्रभाव के कारण भी शिकायत नहीं की गई।
मुख्य आरोपियों की भूमिका भी कोई कम नहीं है । उनमें क्रमवार दानिश शेख: पहली एफआईआर (156) में मुख्य आरोपी। महिला से दोस्ती के नाम पर शारीरिक संबंध बनाने और शादी का झांसा देने का आरोप। बाद में उसकी पत्नी ने फोन कर दो बच्चों की जानकारी दी।तौसीफ अत्तार: 6 एफआईआर में नाम। यौन उत्पीड़न, धार्मिक धमकी, गैर-शाकाहारी खाना जबरन खिलाने और हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने के आरोप।रजा मेमन: 5 एफआईआर में नाम। महिला सहकर्मियों के साथ अश्लील व्यवहार, साड़ी का पल्लू खींचना और व्यक्तिगत जीवन में दखल देने के आरोप।निदा खान: केवल एक एफआईआर में नाम। हिंदू देवता का अपमान करने का आरोप।
इस बीच, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने अपने बयान में कहा है कि कंपनी में POSH कमेटी मौजूद है और इस मामले में पहले कोई लिखित शिकायत नहीं मिली थी। कंपनी ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है और इसके लिए के। कृतिवासन के नेतृत्व में बाहरी विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है।टीसीएस के सीईओ और एमडी के। कृष्णिवासन ने शुक्रवार को बयान जारी कर कहा कि कंपनी ने डेलॉइट और प्रॉमिनेंट लॉ फर्म ट्राइलिगल की सेवाएं ली हैं। आंतरिक जांच की निगरानी के लिए स्वतंत्र निदेशक केकी मिस्त्री की अध्यक्षता में ओवरसाइट कमिटी बनाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निदा खान एचआर मैनेजर नहीं थी, बल्कि प्रोसेस एसोसिएट थी और भर्ती या नेतृत्व की कोई जिम्मेदारी उसके पास नहीं थी। कंपनी ने यह भी कहा कि नासिक यूनिट पूरी तरह चालू है और बंद होने की खबरें गलत हैं।
यह मामला नासिक पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। पुलिस अब पूरे मॉड्यूल की गहराई तक जांच कर रही है और केंद्रीय एजेंसियों की मदद ले रही है। टीसीएस भी अपनी आंतरिक जांच तेज कर रही है। मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग बढ़ रही है, खासकर जब इसमें यौन उत्पीड़न, धार्मिक भावनाएं और SC-ST अत्याचार जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
वे अक्सर कहते थे, जाओ हिंदू लड़कियों को अपनी प्रेमिका बनाओ और उनसे निकाह करो… अपना धर्म बदलो और केवल अपने मजहब की बातें करो। देश की सबसे बड़ी आईटी दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नासिक ऑफिस से निकले इन अल्फाजों ने न केवल कॉर्पोरेट गलियारों को सुन्न कर दिया है बल्कि एक गहरी साजिश की ओर भी इशारा किया है। एक कांट्रेक्चुअल एम्प्लॉय ने एनडीटीवी से बातचीत करते हुए इस बात का खुलासा किया। बताया गया कि यौन शोषण और जबरन धर्मांतरण का ये काला खेल साल 2021 से चल रहा था।
आरोप है कि यह सब सिर्फ बातों तक सीमित नहीं था बल्कि इसके लिए बकायदा फंडिंग की जा रही थी। चश्मदीद के मुताबिक, “एचआर मैडम को भी इसके लिए फंड मिलता था।” यह मामला तब और भी संगीन हो जाता है जब शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि महिला एचआर मैनेजर जिन्हें लेडी कैप्टन कहा जाता था, पहले लड़कियों से दोस्ती करती थीं, उन्हें सहज महसूस कराती थीं और फिर धीरे-धीरे उन्हें हिजाब पहनने और नमाज पढ़ने की ट्रेनिंग देने लगती थीं। जो लड़कियां विरोध करती थीं उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती थी। टाटा संस के चेयरमैन एन। चंद्रशेखरन ने इस पूरे घटनाक्रम को अत्यधिक पीड़ादायक बताते हुए आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं लेकिन बंद कमरों के पीछे हुई इस साजिश ने वर्कप्लेस कल्चर पर कई अनसुलझे सवाल छोड़ दिए हैं।
हालफ़िलहाल आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने अपने नासिक यूनिट में संचालन अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया है। कंपनी ने कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि वे कैंपस में रिपोर्ट न करें। सभी कर्मचारियों को अगले आदेश तक वर्क फ्रॉम होम दे दिया गया है। इसके साथ ही नासिक यूनिट में नई भर्तियां भी रोक दी गई हैं। सूत्रों के अनुसार पुलिस जांच पूरी होने तक भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाई गई है। यह फैसला टीसीएस के इस बीपीओ यूनिट में लगे गंभीर आरोपों के बाद लिया गया है। आरोपों में यौन उत्पीड़न, जबरन धार्मिक रूपांतरण और महिला कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार शामिल है।पुलिस ने 40 दिनों तक अंडरकवर ऑपरेशन चलाया, जिसमें सात महिला पुलिस अधिकारी कर्मचारियों के रूप में काम करती रहीं। इस दौरान कई FIR दर्ज की गईं, जिनकी संख्या नौ तक पहुंच गई। अब तक इस मामले में सात कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें एक एचआर मैनेजर भी शामिल है। टीसीएस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपियों को सस्पेंड कर दिया है।
कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि टीसीएस की लंबे समय से यौन उत्पीड़न के प्रति जीरो टॉलरेंस पॉलिसी है। जैसे ही हमें इस मामले की जानकारी हुई, हमने त्वरित कदम उठाए। जांच के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को पूछताछ पूरी होने तक सस्पेंड कर दिया गया है। हम स्थानीय पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग कर रहे हैं और जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे।





