युवा शक्ति, रेलवे और विकसित भारत का नया संकल्प

Youth power, Railways and a new resolve for a developed India

किसी गरीब परिवार का युवा जब रेलवे,डाक विभाग,बैंकिंग,सुरक्षा बल या प्रशासनिक सेवा में चयनित होता है,तो वह केवल अपनी जिंदगी नहीं बदलता,बल्कि अपने पूरे परिवार को आर्थिक असुरक्षा से बाहर निकालता है।इसीलिए रोजगार मेलों के दृश्य भावनात्मक महत्व भी रखते हैं।
51 हजार से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरण में झलका आत्मनिर्भर भारत का आत्मविश्वास

विनोद कुमार सिंह ‘तकियावाला’

भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में कुछ क्षण ऐसे होते हैं,जो केवल सरकारी आयोजनों तक सीमित नहीं रहते,बल्कि वे बदलते हुए राष्ट्र-चरित्र,व्यवस्था और समय की दिशा के प्रतीक बन जाते हैं। बीते दिनों ऐसा ही एक दृश्य तब सामने आया,जब देशभर के 51 हजार से अधिक युवाओं को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए।यह कार्यक्रम केवल सरकारी नौकरियों के वितरण का औपचारिक आयोजन नहीं था,बल्कि उस नए भारत का प्रतिबिंब था,जो अपनी युवा शक्ति को विकास,आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ऊर्जा मानकर आगे बढ़ रहा है।विशेष महत्व की बात यह रही कि इन नियुक्तियों में 50 प्रतिशत से अधिक अवसर भारतीय रेल से जुड़े विभिन्न विभागों में प्रदान किए गए। यह तथ्य केवल भर्ती का सरकारी आंकड़ा नहीं,बल्कि आने वाले भारत की विकास दिशा का स्पष्ट संकेत भी है।यह बताता है कि केंद्र सरकार देश की आधारभूत संरचना,विशेषकर रेलवे नेटवर्क को 21वीं सदी के भारत की आर्थिक धुरी बनाने की दिशा में तेज गति से आगे बढ़ रही है।इस अवसर पर नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आज का भारत युवाओं को अवसर देने वाला भारत है।सरकार की प्राथमिकता केवल योजनाओं की घोषणा करना नहीं,बल्कि उन्हें धरातल तक पहुंचाकर युवाओं के हाथों में अवसर,विश्वास और आत्मसम्मान सौंपना है।उन्होंने यह भी कहा कि बीते वर्षों में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी,तकनीक आधारित और समयबद्ध बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए गए हैं, ताकि युवाओं को वर्षों तक प्रतीक्षा और अनिश्चितता के दौर से न गुजरना पड़े।दरअसल,पिछले कुछ वर्षों में “रोजगार मेला” केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि शासन व्यवस्था की नई कार्यशैली के रूप में उभरा है। एक समय था,जब सरकारी भर्तियाँ वर्षों तक विवादों,लंबित परीक्षाओं, भ्रष्टाचार और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों के बीच उलझी रहती थीं।लाखों युवा आयु सीमा पार होने की चिंता में अपने सपनों को टूटते हुए देखते थे। लेकिन अब मिशन मोड में रिक्त पदों को भरने और भर्ती प्रक्रियाओं को गति देने का प्रयास दिखाई देता है।यही कारण है कि देश के विभिन्न राज्यों और शहरों में आयोजित रोजगार मेलों के माध्यम से अब तक लाखों युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए जा चुके हैं।भारत जैसे विशाल और युवा देश में रोजगार का प्रश्न केवल आर्थिक विषय नहीं है।यह सामाजिक स्थिरता,पारिवारिक सुरक्षा,आत्मसम्मान और राष्ट्रीय आत्मविश्वास से भी गहराई से जुड़ा हुआ विषय है।जब किसी युवा के हाथ में नियुक्ति पत्र आता है,तब केवल एक व्यक्ति को नौकरी नहीं मिलती,बल्कि एक परिवार के सपनों को स्थिरता और समाज को नई ऊर्जा मिलती है।किसी गरीब किसान का बेटा,किसी मजदूर की बेटी या किसी निम्न मध्यमवर्गीय परिवार का युवा जब सरकारी सेवा में चयनित होता है,तब उसके साथ पूरा परिवार नई आशा से भर उठता है।ग्रामीण भारत में आज भी सरकारी नौकरी केवल रोजगार नहीं,बल्कि सम्मान,सुरक्षा और स्थायित्व का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जाती है।गाँवों और कस्बों में सरकारी नौकरी पाने वाला युवा केवल अपने घर का भविष्य नहीं बदलता,बल्कि वह पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है।यही कारण है कि रोजगार मेलों के मंच केवल प्रशासनिक मंच नहीं रह जाते,बल्कि वे सामाजिक परिवर्तन और नई संभावनाओं के मंच बन जाते हैं।सरकारी सेवा को राष्ट्र सेवा का माध्यम बताते हुए युवाओं से ईमानदारी,संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य करने का आह्वान किया गया।यह बात भारतीय लोकतंत्र की मूल भावना को भी व्यक्त करती है।कोई भी व्यवस्था तभी मजबूत होती है,जब उसमें कार्य करने वाले लोग सेवा भाव के साथ जनता के बीच काम करें।लोकतंत्र केवल संसद और सरकार से नहीं चलता,बल्कि उन लाखों कर्मचारियों और अधिकारियों से चलता है,जो रोज़मर्रा की व्यवस्था को आम जनता तक पहुंचाते हैं।आज भारत जिस “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, उसमें युवा शक्ति की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी युवा है।यह केवल जनसांख्यिकीय तथ्य नहीं,बल्कि विश्व राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की सबसे बड़ी ताकत है।दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं वृद्ध होती आबादी की चुनौती से जूझ रही हैं, जबकि भारत के पास युवा ऊर्जा का विशाल आधार मौजूद है।यदि यही युवा शक्ति शिक्षित,प्रशिक्षित और रोजगारयुक्त होगी,तो भारत आने वाले दशकों में विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक शक्तियों में शामिल हो सकता है।इस रोजगार मेले की सबसे बड़ी विशेषता भारतीय रेल में बड़ी संख्या में नियुक्तियाँ रही हैं।कुल नियुक्तियों में लगभग आधे से अधिक अवसर रेलवे से जुड़े विभिन्न विभागों में दिए गए।इसका महत्व केवल रोजगार तक सीमित नहीं है,बल्कि यह भारत की बदलती आर्थिक संरचना और विकास मॉडल को भी दर्शाता है।
भारतीय रेल केवल एक परिवहन तंत्र नहीं,बल्कि भारत की जीवन रेखा है।यह देश की आर्थिक गतिविधियों,सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संवाद का सबसे बड़ा माध्यम है।हिमालय की वादियों से लेकर कन्याकुमारी के समुद्री तट तक और पूर्वोत्तर के दुर्गम इलाकों से लेकर पश्चिमी भारत के औद्योगिक नगरों तक रेलवे भारत को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य करती है।आज जब भारत तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास मॉडल की ओर बढ़ रहा है,तब रेलवे की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।वंदे भारत ट्रेनों का विस्तार, अमृत भारत स्टेशन योजना, समर्पित माल गलियारे,हाईस्पीड रेल परियोजनाएं, रेलवे ट्रैक का विद्युतीकरण और आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम जैसी परियोजनाएं भारतीय रेल को नए युग में पहुंचा रही हैं।इन परियोजनाओं के लिए विशाल मानव संसाधन की आवश्यकता स्वाभाविक है।इंजीनियर, तकनीशियन,परिचालन कर्मचारी, सुरक्षा बल, प्रशासनिक अधिकारी और सेवा क्षेत्र से जुड़े हजारों पद रेलवे की नई संरचना का हिस्सा बन रहे हैं।यही कारण है कि रेलवे आज देश का सबसे बड़ा रोजगार सृजनकर्ता विभाग बनकर उभर रहा है।पिछले कुछ वर्षों में रेलवे को केवल यात्रा का माध्यम नहीं,बल्कि आर्थिक क्रांति का इंजन बनाने की दिशा में कार्य हुआ है।आज छोटे शहरों के रेलवे स्टेशन भी आधुनिक स्वरूप में विकसित किए जा रहे हैं। स्टेशन पुनर्विकास परियोजनाएं स्थानीय व्यापार,पर्यटन और निवेश की नई संभावनाएं पैदा कर रही हैं।रेलवे के आधुनिकीकरण से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के रोजगार तेजी से बढ़ रहे हैं।एक समय था जब सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते थे। प्रतियोगिता परीक्षाओं में धांधली,वर्षों तक लंबित परिणाम,पेपर लीक और भर्ती घोटाले युवाओं में गहरी निराशा पैदा करते थे।पिछले कुछ वर्षों में तकनीक आधारित भर्ती प्रणाली ने इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने का प्रयास किया है।ऑनलाइन आवेदन,कंप्यूटर आधारित परीक्षाएं,डिजिटल दस्तावेज सत्यापन और समयबद्ध चयन प्रक्रिया ने पारदर्शिता को मजबूत किया है।हालाँकि चुनौतियां अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं,लेकिन यह स्वीकार करना होगा कि तकनीकी सुधारों ने युवाओं के भीतर व्यवस्था के प्रति विश्वास को मजबूत किया है।आज का युवा केवल नौकरी नहीं चाहता,बल्कि वह सम्मानजनक और पारदर्शी अवसर चाहता है।यही कारण है कि जब नियुक्ति पत्र सीधे देश के सर्वोच्च नेतृत्व के माध्यम से युवाओं तक पहुंचता है,तो वह प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर मनोवैज्ञानिक विश्वास का भी निर्माण करता है।भारत की राजनीति में बेरोजगारी लंबे समय से बड़ा मुद्दा रही है। विपक्ष लगातार सरकार से रोजगार के आंकड़े मांगता रहा है,जबकि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर,स्टार्टअप और स्वरोजगार आधारित अवसरों को रोजगार वृद्धि का आधार बताती रही है।ऐसे समय में रोजगार मेलों का आयोजन केवल प्रशासनिक पहल नहीं,बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि रिक्त पदों को भरने और युवाओं को अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में सक्रियता दिखाई दे रही है।हालाँकि यह भी सच है कि भारत जैसे विशाल देश में केवल सरकारी नौकरियों के माध्यम से सभी युवाओं को रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जा सकता।इसके लिए निजी क्षेत्र,उद्योग,कृषि आधारित उद्यम,पर्यटन,डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप संस्कृति को भी समान गति से आगे बढ़ाना होगा। “स्किल इंडिया”, “स्टार्टअप इंडिया”,“मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” जैसी योजनाएं इसी व्यापक सोच का हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य युवाओं को बहुआयामी अवसर उपलब्ध कराना है।आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है।डिजिटल तकनीक और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था ने लाखों नए अवसर पैदा किए हैं।इसके साथ-साथ सरकारी रोजगार की सामाजिक विश्वसनीयता आज भी बनी हुई है।यही कारण है कि रोजगार मेलों को लेकर युवाओं में विशेष उत्साह दिखाई देता है।
यदि आज भारत के विकास मॉडल को समझना हो,तो रेलवे को समझना आवश्यक है। रेलवे अब केवल ट्रेनों की आवाजाही तक सीमित नहीं रह गई है।यह देश की आर्थिक संरचना,लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और औद्योगिक विकास की रीढ़ बन चुकी है।समर्पित माल गलियारों के निर्माण से माल परिवहन की गति बढ़ रही है।इससे उद्योगों को लाभ मिलेगा और लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी। रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास छोटे शहरों को आधुनिक शहरी केंद्रों में बदलने की क्षमता रखता है।वंदे भारत ट्रेनें केवल आधुनिक ट्रेनों का प्रतीक नहीं,बल्कि उस आत्म विश्वासी भारत का प्रतीक हैं,जो अब तकनीक और गति दोनों में वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहता है। रेलवे में बढ़ती नियुक्तियां इसी व्यापक परिवर्तन का हिस्सा हैं।आने वाले वर्षों में रेलवे,मेट्रो और क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क के विस्तार से लाखों नए रोजगार अवसर पैदा होने की संभावना है।विश्व की अनेक बड़ी अर्थव्यवस्थाएं वृद्ध होती आबादी की चुनौती से जूझ रही हैं।वहीं भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी मौजूद है।यह भारत के लिए सबसे बड़ा अवसर भी है और सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी।यदि युवाओं को शिक्षा,कौशल और रोजगार मिलेगा,तो भारत आने वाले दशकों में विश्व की अग्रणी आर्थिक शक्ति बन सकता है।यदि यही युवा अवसरों से वंचित रह गए,तो सामाजिक असंतोष और आर्थिक असंतुलन की स्थिति भी पैदा हो सकती है।इसी सोच के साथ युवाओं को “अमृत पीढ़ी” बताते हुए विकसित भारत के निर्माण में उनकी भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब आज का युवा आत्मनिर्भर, प्रशिक्षित और अवसरों से संपन्न होगा।रोजगार मेलों के माध्यम से युवाओं को केवल नियुक्ति पत्र नहीं दिए जा रहे,बल्कि यह संदेश भी दिया जा रहा है कि राष्ट्र निर्माण की यात्रा में उनकी सीधी भागीदारी सुनिश्चित है।आज भी भारत का बड़ा हिस्सा गांवों और छोटे शहरों में बसता है।वहाँ सरकारी नौकरी केवल आय का स्रोत नहीं,बल्कि सामाजिक सुरक्षा का आधार मानी जाती है। किसी गरीब परिवार का युवा जब रेलवे,डाक विभाग,बैंकिंग,सुरक्षा बल या प्रशासनिक सेवा में चयनित होता है,तो वह केवल अपनी जिंदगी नहीं बदलता,बल्कि अपने पूरे परिवार को आर्थिक असुरक्षा से बाहर निकालता है।इसीलिए रोजगार मेलों के दृश्य भावनात्मक महत्व भी रखते हैं।नियुक्ति पत्र लेते हुए युवाओं की आंखों में दिखाई देने वाली चमक दरअसल नए भारत के आत्म विश्वास की चमक है।यदि केवल आंकड़ों के आधार पर देखा जाए,तो 51 हजार नियुक्तियां भारत की विशाल युवा आबादी की तुलना में सीमित प्रतीत हो सकती हैं,लेकिन इन नियुक्तियों का प्रतीकात्मक महत्व कहीं अधिक बड़ा है।यह कार्यक्रम यह संदेश देता है कि रिक्त पदों को भरने,भर्ती प्रक्रियाओं को गति देने और युवाओं को अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास हो रहे हैं।साथ ही यह भी स्पष्ट है कि भारत की विकास यात्रा अब रोजगार आधारित विकास मॉडल की ओर बढ़ रही है।केवल जीडीपी वृद्धि पर्याप्त नहीं होगी,बल्कि रोजगार सृजन और आय वृद्धि को भी समान महत्व देना होगा।भारत की युवा शक्ति यदि कौशल, तकनीक और अवसरों से जुड़ती है,तो आने वाले दशकों में भारत केवल आर्थिक महाशक्ति ही नहीं,बल्कि मानव संसाधन की वैश्विक राजधानी भी बन सकता है।यह पूरा आयोजन वास्तव में नए भारत की बदलती मानसिकता और विकास दृष्टि का प्रतीक है।विशेष रूप से रेलवे में 50 प्रतिशत से अधिक नियुक्तियां यह स्पष्ट संकेत देती हैं कि आने वाले समय में भारत इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास को और अधिक गति देने जा रहा है।रेलवे,सड़क,मेट्रो, एयरपोर्ट और डिजिटल नेटवर्क का विस्तार केवल सुविधाओं का विस्तार नहीं,बल्कि करोड़ों सपनों और संभावनाओं का विस्तार भी है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकारी रोजगार के साथ-साथ निजी क्षेत्र,उद्योग,कृषि आधारित उद्यम,पर्यटन,स्टार्टअप और कौशल विकास को भी समान गति मिले।तभी भारत की युवा शक्ति वास्तव में राष्ट्र शक्ति में परिवर्तित हो सकेगी।जब किसी युवा के हाथ में नियुक्ति पत्र आता है,तब केवल एक परिवार का भविष्य सुरक्षित नहीं होता, बल्कि राष्ट्र का आत्मविश्वास भी मजबूत होता है।यही आत्मविश्वास विकसित भारत कीऔर शायद यही इस रोजगार मेले का सबसे बड़ा संदेश भी है।