डायबिटीज के साथ भी जिएं स्वस्थ और खुशहाल जीवन

Live a healthy and happy life with diabetes

सत्य भूषण शर्मा

आज की तेज रफ्तार जिंदगी, अनियमित खानपान, तनाव, शारीरिक निष्क्रियता और बदलती जीवनशैली ने मधुमेह अर्थात डायबिटीज को एक गंभीर और तेजी से फैलती हुई बीमारी बना दिया है। पहले यह बीमारी मुख्यतः बुजुर्गों में दिखाई देती थी, लेकिन अब युवा और बच्चे भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। भारत में डायबिटीज के मरीजों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय बन चुकी है।

हालांकि डायबिटीज एक गंभीर रोग है, लेकिन सही जानकारी, नियमित जांच, संतुलित जीवनशैली और सकारात्मक सोच के माध्यम से इसके साथ भी स्वस्थ, सक्रिय और खुशहाल जीवन जिया जा सकता है।

डायबिटीज क्या है?

जब शरीर में रक्त में मौजूद ग्लूकोज अर्थात शुगर का स्तर सामान्य से अधिक बढ़ जाता है, तब व्यक्ति डायबिटीज से पीड़ित माना जाता है। सामान्य भाषा में ऐसे व्यक्ति को “डायबिटिक” कहा जाता है।

हमारे शरीर में अग्न्याशय (पैंक्रियाज) इंसुलिन नामक हार्मोन बनाता है। यह इंसुलिन भोजन से प्राप्त ग्लूकोज को ऊर्जा में बदलने का कार्य करता है। जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता, तब रक्त में शुगर बढ़ने लगती है।

डायबिटीज मुख्यतः दो प्रकार की होती है—

  • टाइप-1 डायबिटीज : इसमें शरीर इंसुलिन बनाना लगभग बंद कर देता है।
  • टाइप-2 डायबिटीज : इसमें शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता। यह सबसे सामान्य प्रकार है।

आनुवांशिकता और डायबिटीज का संबंध:

विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज का संबंध केवल खानपान और जीवनशैली से ही नहीं बल्कि आनुवांशिकता से भी जुड़ा होता है। यदि परिवार में माता-पिता, दादा-दादी या अन्य करीबी रिश्तेदारों को डायबिटीज है, तो अगली पीढ़ी में इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।

हालांकि आनुवांशिकता केवल जोखिम बढ़ाती है, बीमारी तय नहीं करती। यदि व्यक्ति नियमित व्यायाम करे, वजन नियंत्रित रखे, संतुलित भोजन ले और समय-समय पर जांच करवाए, तो डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए जिन लोगों के परिवार में मधुमेह का इतिहास है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

डायबिटीज के वर्तमान मानक:

डायबिटीज की पहचान और नियंत्रण के लिए कुछ चिकित्सीय मानक निर्धारित किए गए हैं—

सामान्य शुगर स्तर:

  • फास्टिंग ब्लड शुगर : 70 से 99 mg/dL
  • भोजन के दो घंटे बाद : 140 mg/dL से कम
  • HbA1c : 5.7% से कम

प्री-डायबिटिक स्थिति:

  • फास्टिंग शुगर : 100 से 125 mg/dL
  • HbA1c : 5.7% से 6.4%

डायबिटीज की स्थिति:

  • फास्टिंग शुगर : 126 mg/dL या उससे अधिक
  • भोजन के बाद शुगर : 200 mg/dL या उससे अधिक
  • HbA1c : 6.5% या उससे अधिक

विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश मरीजों में HbA1c को 7% से नीचे रखना बेहतर माना जाता है।

डायबिटीज के सामान्य लक्षण:

शुरुआत में इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं, लेकिन समय रहते ध्यान न देने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। इसके सामान्य लक्षण हैं—

  • बार-बार प्यास लगना
  • बार-बार पेशाब आना
  • अत्यधिक भूख लगना
  • जल्दी थकान होना
  • अचानक वजन कम होना
  • आंखों से धुंधला दिखाई देना
  • घावों का देर से भरना
  • हाथ-पैरों में झनझनाहट
  • त्वचा संक्रमण या खुजली

यदि ऐसे लक्षण लगातार दिखाई दें तो तुरंत ब्लड शुगर जांच करवानी चाहिए।

शरीर पर डायबिटीज के दुष्प्रभाव: यदि डायबिटीज लंबे समय तक अनियंत्रित रहे तो यह शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकती है।

हृदय पर प्रभाव: डायबिटीज से हार्ट अटैक, उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

आंखों पर प्रभाव: लगातार बढ़ी हुई शुगर आंखों की रोशनी कमजोर कर सकती है। समय पर इलाज न मिलने पर अंधापन तक हो सकता है।

किडनी पर प्रभाव: मधुमेह किडनी को नुकसान पहुंचाकर उसकी कार्यक्षमता कम कर सकता है।

नसों और पैरों पर प्रभाव: हाथ-पैरों में दर्द, जलन, सुन्नपन तथा घावों का देर से भरना आम समस्या बन जाती है। गंभीर स्थिति में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

मानसिक प्रभाव: लगातार बीमारी और दवाओं के कारण कई मरीज तनाव और चिंता का शिकार भी हो जाते हैं।

क्या नियमित टेस्ट रिकॉर्ड जरूरी है?

डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए नियमित जांच और उसका रिकॉर्ड रखना अत्यंत आवश्यक है। केवल दवा लेना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि यह जानना भी जरूरी है कि शरीर उपचार पर कैसी प्रतिक्रिया दे रहा है।

यदि मरीज नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच कर उसका रिकॉर्ड रखता है, तो डॉक्टर को दवा, भोजन और व्यायाम संबंधी सही सलाह देने में सुविधा होती है।

किन जांचों का रिकॉर्ड रखें?

  • फास्टिंग ब्लड शुगर
  • भोजन के बाद की शुगर
  • HbA1c टेस्ट
  • ब्लड प्रेशर
  • वजन
  • कोलेस्ट्रॉल स्तर
  • आंखों और किडनी की जांच रिपोर्ट

आजकल ग्लूकोमीटर मशीन, मोबाइल ऐप और डायरी के माध्यम से रिकॉर्ड रखना आसान हो गया है।

डायबिटीज में क्या खानपान रखें?

डायबिटिक मरीजों के लिए संतुलित और नियंत्रित भोजन सबसे बड़ा उपचार माना जाता है। सही खानपान से शुगर को काफी हद तक नियंत्रित रखा जा सकता है।

क्या खाएं?

  • हरी पत्तेदार सब्जियां
  • साबुत अनाज और मल्टीग्रेन आटा
  • दालें और अंकुरित अनाज
  • सलाद और फाइबरयुक्त भोजन
  • कम शुगर वाले फल जैसे अमरूद, सेब, पपीता
  • पर्याप्त मात्रा में पानी
  • कम वसा वाला दूध और दही

किन चीजों से बचें?

  • अत्यधिक मीठे पदार्थ
  • कोल्ड ड्रिंक और पैकेट जूस
  • जंक फूड और फास्ट फूड
  • अत्यधिक तला-भुना भोजन
  • सफेद ब्रेड और मैदे से बनी चीजें
  • धूम्रपान और शराब

थोड़ी-थोड़ी मात्रा में समय पर भोजन करना अधिक लाभदायक माना जाता है। देर रात भोजन करने से भी बचना चाहिए।

संतुलित जीवनशैली ही सबसे बड़ा उपचार:

नियमित व्यायाम, योग और प्राणायाम शुगर नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रतिदिन कम से कम तीस मिनट पैदल चलना लाभदायक माना जाता है।

सकारात्मक सोच, पर्याप्त नींद और तनाव से दूरी भी मधुमेह नियंत्रण में सहायक होती है। परिवार का सहयोग और आत्मविश्वास मरीज को मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं।

जागरूकता ही बचाव है:

डायबिटीज जीवन का अंत नहीं बल्कि जीवनशैली सुधारने का संकेत है। यदि समय पर जांच, संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह का पालन किया जाए तो मधुमेह के साथ भी एक स्वस्थ, सक्रिय और खुशहाल जीवन जिया जा सकता है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि लोग डायबिटीज को छिपाने के बजाय इसके प्रति जागरूक बनें तथा दूसरों को भी जागरूक करें। समय पर सावधानी और अनुशासित जीवनशैली ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।