- हरमनप्रीत और फुल्टन की ’जुगलबंदी‘ को जिता सकती है भारत को पदक
- हरमनप्रीत होंगे भारत का ‘ब्रह्मास्त्र’, मैन टू मैन मार्किंग तोड़ने में सिवाच अहम
सत्येन्द्र पाल सिंह
एम्सतलवीन (नीदरलैंड) : 1975 का स्वर्ण पदक विजेता भारत दुनिया के बेहतरीन ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह की ‘सरपंची’ में शनिवार से यहां शुरू हो रहे 16 एफआईएच पुरुष हॉकी विश्व कप में 51 बरस के पदक के सूखे को खत्म करने उतरेगा। भारत को 2026 हॉकी विश्व कप में तकदीर बदलने की उम्मीद है। चीफ कोच क्रेग फुल्टन और कप्तान हरमनप्रीत सिंह की पहली कोशिश भारत के 1975 में पहली और आखिरी बार हॉकी विश्व कप जीतने के बाद से सेमीफाइनल तक में न पहुंचने के सिलसिले को यहां तोड़ कर उसे पदक जिताने की होगी। 2024 के पेरिस ओलंपिक की तरह चीफ कोच फुल्टन और कप्तान हरमनप्रीत सिंह की ’जुगलबंदी‘ चली तो इस बार बेशक भारत हॉकी विश्व कप में पांच दशक के बाद पदक जीत सकता है। भारत ने 1971 में बार्सीलोना में पहले संस्करण में कांसा, 1973 में यहीं एम्सतलवीन में दूसरे में रजत और अशोक कुमार सिंह के विजयदाई गोल से 1975 में क्वालालंपुर में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को तीसरे में फाइनल में हरा कर पहली और आखिरी बार हॉकी विश्व कप जीता था। भारत इसके 51 बरस पदक तो छोड़ ही दें हॉकी विश्व कप के सेमीफाइनल तक में नहीं पहुंच पाया। अनुभवी और नौजवान खिलाड़ियों की संतुलित भारतीय टीम एफआईएच प्रो लीग के आखिरी चरण में दमदार प्रदर्शन सही वक्त पर रंग में आई है। भारत कामयाबी की नई कहानी लिखने उतरेगा। कप्तान हरमनप्रीत सिंह सहित भारतीय टीम के हॉकी कौशल और चीफ कोच की रणनीति का इम्तिहान होगा। हरमनप्रीत की अगुआई में नई केसरिया जर्सी में आजादी देश की आजादी 75 वीं वर्षगांठ पर भारतीय हॉकी टीम हर के मन की विश्व कप में पदक जिताने की मुराद को बेशक पूरा करने की पुरजोर कोशिश करेगी।
एफआईएच रैंकिंग में फिलहाल आठवें स्थान पर काबिज सही समय पर रंगत पाने वाली भारतीय टीम ने खुद को स्विटजरलैंड में पैडी अपटन जैसे मनोवैज्ञानिक के साथ शिविर में विश्व कप के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से बढ़िया तैयार भी किया है। बेशक कप्तान ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह पेनल्टी कॉर्नर भारत के हॉकी विश्व कप में ब्रह्मास्त्र हैं, लेकिन इसके लिए जरूरी है मध्यपंक्ति में मनप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह और विवेक सागर प्रसाद के प्रयासों पर अग्रिम पंक्ति में अभिषेक नैन, सुखजीत, मनदीप, दिलप्रीत व शिलानंद लाकरा को मैदानी गोल करने के साथ भरपूर पेनल्टी कॉर्नर भी बनाए। नए जमाने की हॉकी में खासतौर पर यूरोपीय टीमों की मैन टू मैन मार्किंग को तोड़ने में खासतौर पर नवोदित मिडफील्डर यशदीप सिवाच का रोल अहम रहने वाला है। भारत मेजबान नीदरलैंड के खिलाफ फाइनल शूटआउट में 1973 एम्सतलवीन के इसी मैदान पर दूसरे हॉकी विश्व कप में मैदान पर टीम के लिए अमूमन पेनल्टी स्ट्रोक लेने वाले दिग्गज के इनकार करने पर बीपी सडन डेथ में गोविंदा स्ट्रोक लेने गए गेंद गोल स्तंभ को लग कर बाहर निकल गई और भारत दूसरे प्रयास में खिताब जीतने से चूक गया। भारत इस बार बेशक फाइनल में पहुंच कर इस कहानी को पलट कर कामयाबी की नई कहानी लिखने की कोशिश करेगा। भारतीय हॉकी टीम ने 2026 विश्व कप से पहले मेंटल कंडीशनिंग कोच पैडी अपटन के मार्गदर्शन में खुद को मनोवैज्ञानिक रूप से तैयार करनी की कोशिश की है।
भारत के चीफ कोच क्रेग फुल्टन ने यह ठीक ही कहा कि कुछ हॉकी विश्लेषक का भारत के विश्व कप जीतने के अवसर महज पांच फीसदी बताना उसे शांत रह कर इस बार पदक जीतने और भारतीय हॉकी के इतिहास में नया अध्याय लिखने का मौका देगा। वहीं भारत के कप्तान और तुरुप के इक्के हरमनप्रीत सिंह कहते हैं टीम के लिए विश्व कप में पहले मैच की सीटी बजने से प्रतिद्वंद्वी की पर दबाव बना हर मौके को भुनाना बेहद अहम होगा। 16 टीमों के 16 वें हॉकी विश्व कप का फॉर्मेट सह मेजबान बेल्जियम के दबाव में बदल क्वॉर्टर फाइनल खत्म कर दिया। अब पहले चरण में टीमों को चार चार टीमों के चार पूल -ए, बी, सी और डी में बांटा गया है। इसमें चारों पूल की शीर्ष दो दो टीमें दूसरे दौर में पूल ई और एफ दो पहुंचेंगी इन दो पूल की दो दो शीर्ष टीमें सीधे सेमीफाइनल में पहुंचेगी। भारत की पुरुष टीम पूल डी में इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स के साथ है। भारत का प्रदर्शन पूल डी में उसके शीर्ष दो में रहने का पक्का विश्वास जगाता है। भारत ने एफआईएच प्रो लीग के आखिरी चरण में उसने जिस तरह सह मेजबान नीदरलैंड, जर्मनी और इंग्लैंड को हराया उससे उसके दूसरे चरण में शीर्ष दो रहकर सेमीफाइनल में स्थान बनाने का भरोसा जगता है। अब तक हुए 15 हॉकी विश्व कपों में पाकिस्तान ने सबसे ज्यादा चार बार खिताब जीता है और जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड के पास 2026 में उसकी बराबरी का मौका होगा। वहीं भारत और बेल्जियम ने अब तक एक एक बार खिताब जीता है । मौजूदा चैंपियन जर्मनी, सह नीदरलैंड और बेल्जियम के साथ ऑस्ट्रेलिया का इस बार भी हॉकी विश्व कप के प्रमुख दावेदार है। दक्षिण अफ्रीका के क्रेग फुल्टन के मार्गदर्शन में भारत यूरोपीय शैली से पहले रक्षण और फिर जवाबी हमले की शैली पर भरोसा कर खेल रहा है। क्रेग फुल्टन 2023 में चीफ हॉकी की जिम्मेदारी संभालने के बाद भारत को 2023 में हांगजू एशियाई खेलों का स्वर्ण जिता सीधे 2024 के पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कराया और वहां टीम ने अपना कांसा बरकरार रखा। भारत ने फुल्टन के मार्गदर्शन में साथ ही 2023 में चेन्नै में एशियन चैंपियंस ट्रॉफी और 2025 में राजगीर(बिहार) में पुरुष हॉकी एशिया कप जीत कर सीधे एफआईएच हॉकी विश्व कप बेल्जियम और नीदरलैंड 2026 के लिए क्वालिफाई किया। भारत ने 1971 में अजित पाल सिंह की कप्तानी में पहले विश्व कप में कांसा और 1975 में स्वर्ण पदक जीता था। अजित पाल सिंह के बाद हरमनप्रीत सिंह दूसरे ऐसे कप्तान हैं जो कि दूसरे हॉकी विश्व कप में भारत की पुरुष टीम की कप्तानी करेंगे।
भारत ने पुरुष हॉकी विश्व कप में 1982 में मुंबई और 1994 में सिडनी में पांचवें और 2018 में भुवनेश्वर में छठा स्थान पाया। भारत अब तक हुए एफआईएच 15 पुरुष हॉकी विश्व कपों में 1971 में तीसरे, 1973 में दूसरे, 1975 में पहले, 1978 में छठे, 1982 में पांचवें, 1986 में 12 वें, 1990 में दसवें, 1994 में पांचवें, 1998 में नौवें, 2002 में दसवें, 2006 में 11 वें, 2010 में आठवें, 2014 में नौवें, 2018 में छठे, 2023 में नौवें स्थान पर रहा था। भारत ने अब तक चार बार 1982(मुंबई ), 2010 (दिल्ली), 2018 (भुवनेश्वर) और 2023 में भुवनेश्वर -राउरकेला में पुरुष हॉकी विश्व कप की मेजबानी की, पर अफसोस इनमें पदक तो दूर एक के भी सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच पाया। भारत ने विश्व कप से ठीक पहले एफआईएच प्रो हॉकी लीग में रॉटरडम और लंदन में बढ़िया प्रदर्शन कर अपने आठ में पांच मैच जीते और इनमें उसने जर्मनी व नीदरलैंड, इंग्लैंड और चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को भी हराया।
भारत की टीम में भुवनेश्वर और राउरकेला में हुए 2023 के पुरुष हॉकी विश्व कप में खेलने वाली टीम के -जर्मनप्रीत सिंह, हरमनप्रीत सिंह, अमित रोहिदास, हार्दिक सिंह, मनप्रीत सिंह, नीलकांत शर्मा, विवेक सागर प्रसाद, सुखजीत सिंह, मनदीप सिंह, अभिषेक नैन जैसे दस खिलाड़ी 2026 के संस्करण में भी टीम में हैं। मनदीप सिंह और मनप्रीत सिंह अपना लगातार चौथा विश्व कप खेल कर भारत को अब तक इकलौता विश्व कप जिताने वाले राइट आउट अशोक कुमार सिंह और धनराज पिल्लै की बराबरी कर लेंगे। वहीं हरमनप्रीत सिंह (कप्तान), अमित रोहिदास, हार्दिक सिंह और नीलकांत शर्मा भारत के लिए लगातार तीसरा और विवेक सागर प्रसाद, सुखजीत सिंह,अभिषेक नैन, सुमित व दिलप्रीत सिंह भारत के लिए दूसरा हॉकी विश्व कप खेलेंगे। गोलरक्षक मोहित एचएस और सूरज करकेरा, सेंटर हाफ यशदीप सिवाच, फुलबैक संजय, राजिंदर सिंह, आदित्य अर्जुन लालगे, शिलानंद लाकरा, जुगराज सिंह अपना पहला विश्व कप खेलेंगे। वहीं 2018 में टीम में शामिल रहने के बाद 2023 में टीम से बाहर रहे सुमित और दिलप्रीत सिंह ने एक विश्व कप के बाद फिर भारतीय टीम में वापसी की है।
चीफ कोच फुल्टन अपने मार्गदर्शन में भारत अपनी 5-3-2 की परंपरागत आक्रामक शैली को छोड़ इसके उलट अपने उस्ताद फुल्टन के मार्गदर्शन में भारत 2-3-5 की पहले रक्षण और मौका मिलते ही फिर आक्रमण की यूरोपीय शैली को अपना हॉकी खेल रहा है। बेशक यूरोप ने हॉकी को इसके नियमों को अपने मुताबिक बना कर भारत ही नहीं, दुनिया को अपनी शैली के मुताबिक खेलने को मजबूर कर दिया। फु्ल्टन यशदीप सिवाच को ऐसा बहुपयोगी खिलाड़ी मानते हैं जो कि मध्य पंक्ति और रक्षापंक्ति में कहीं भी खेल सकते हैं और बतौर डिफेंडर भी वह खासे मजबूत हैं। सिवाच की इस हॉकी विश्व कप में भूमिका मैन टू मार्किंग में यकीन रख खेलने वाली यूरोपीय टीम के जवाबी हमलों को बीच में रोक अपने साथी भारतीय स्ट्राइकरों के लिए आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।
भारत के चीफ कोच क्रेग फुल्टन का हॉकी मंत्र है रणनीतिक अनुशासन, ढांचे के मुताबिक सधा खेल, दबाव बना जवाबी हमला बोलना। फुल्टन के लिए भारतीय टीम को एक ढांचे के मुताबिक खेलने का मतलब उन्हें बंदिशों में बांध कर खिलाना नहीं, बल्कि यह हमले को शुरू करने का आगाज है। मैदान से बाहर फुल्टन बतौर कोच, एक ऐसे चतुर रणनीतिकार दिखते हैं, जो शतरंज के शातिर की तरह बहुत ही चतुराई से चाल चल कर प्रतिद्वंद्वी टीम को मैदान में मात दे देते हैं। अपना पहला विश्व कप खेलने जा रहे स्ट्राइकर शिलानंद की रफ्तार के भारत के चीफ कोच फुल्टन भी कायल हैं। शिलानंद लाकरा सही मायनों में बड़ी टीमों के खिलाफ भारत और चीफ कोच फुल्टन का गुप्त अस्त्र साबित हो सकते हैं। फुल्टन का दर्शन है कि आपका किला महफूज होगा तो आप मैदान में कहीं से भी प्रतिद्वंद्वी टीम पर हमला बोल सकते हैं। उनकी पहली कोशिश अपने किले को महफूज रख कर ज्यादा जवाबी हमले बोलने की रहती है। भारत फिलहाल प्रतिद्वंद्वी टीम से उसके पाले में गेंद वापस छीनने में इस समय दुनिया की तीन शीर्ष टीमों में से एक है। फुल्टन ने भारतीय टीम को किसी भी तरह की शिथिलता से बचने की ताकीद की है। भारत के कप्तान ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह बेशक विश्व स्तरीय ड्रैग फ्लिकर हैं। जब वह रंग में होते हैं तो उनका दुनिया में पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करने में कोई सानी नहीं है। आज पेनल्टी कॉर्नर को रोकने के लिए रशर्स इतनी तेजी से आगे आते हैं कि ड्रैग फ्लिक पर गोल करना और ज्यादा मुश्किल हो गया है। भारत के कोच फुल्टन ने इसी लिए पेनल्टी कॉर्नर बतौर ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह के साथ जुगराज सिंह, अमित रोहिदास, संजय और राजिंदर सिंह के रूप में बतौर ड्रैग फ्लिकर चार और विकल्प तैयार किए हैं। भारत अब केवल दो फारवर्ड अभिषेक नैन और सुखजीत सिंह,शिलानंद लाकरा व दिलप्रीत सिंह के साथ खेलेगा। दरअसल मनदीप सिंह खुद गोल करने से ज्यादा अब लिंकमैन या आगे स्ट्राइकर को हमले के लिए गेंद बढ़ाने वाले की भूमिका में इस बार हॉकी विश्व कप में दिखेंगे। हार्दिक सिंह,नीलकांत शर्मा, यशदीप सिवाच ,आदित्य लालगे और राजिंदर सिंह आक्रामक मिडफील्डर की भूमिका में दिखेंगे। बाकी मनप्रीत सिंह,विवेक सागर प्रसाद मौका मिलते आगे पूरी तरह आश्वस्त होने पर आगे हमले के लिए जाएंगे अन्यथा इसे छोड़ कर बराबर कप्तान डिफेंडर हरमनप्रीत सिंह,अमित रोहिदास, जुगराज सिंह,सुमित के साथ मिलकर अपने किले की ऐसी मजबूत चौकसी के लिए पीछे आकर भारत की एकमात्र कमजोर कड़ी बताए जा रहे गोलरक्षक एच एस मोहित और सूरज करकेरा की मदद करेंगे।
पूल मैचों पर जोर देना वाकई बहुत जरूरी:फुल्टन
भारतीय हॉकी टीम के चीफ कोच क्रेग फुल्टन ने कहा, ‘ बेशक एफआईएच पुरुष हॉकी विश्व कप का फॉर्मेट बहुत बदल गया है। अब विश्व कप में क्वॉर्टर फाइनल नहीं होगा। ऐसे में पूल मैचों पर जोर देना वाकई बहुत जरूरी है क्योंकि इसमें दो शीर्ष टीमें ही आगे बढ़ेगी। दो टीमों के बीच मैचों का नतीजा बहुत अहम हो गया क्योंकि अगर एक टीम दूसरी टीम को हराती है तो पूल चरण में जीत से मिले तीन अंक अगले दौर में जुड़ जाते हैं। इससे आप अगले ग्रुप से आगे बढ़ सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए बेहतर और मजबूत स्थिति में आ जाते हैं। पूरे पूल चरण में गोल अंतर और रक्षात्मक अनुशासन बनाए रखना अहम है। नया फॉर्मेट बेशक यह अलग है, यह न तो अच्छा है न ही बुरा । अगर हम बढ़िया आगाज करते हैं तो हम इस नए फॉर्मेट को अपने लिए लाभदायक बना सकते हें। हम अपने गोल अंतर को संभाल सकते हैं। नए फॉर्मेट में ग्रुप में शीर्ष पर रहने वाली टीम का फैसला सबसे ज्यादा के जीत के आधार पर होता है और गोल अंतर पर इसके बाद विचार किया जाता है। मैच यदि ड्रॉ रहता है तो फिर फैसला गोल अंतर से होता है। बेशक हम हर टूर्नामेंट जीतना चाहते हैं। एफआईएच रैंकिंग के मुताबिक हमारी भारतीय टीम आठवें स्थान हैं। कुछ विश्लेषक भारत के इस बार विश्व कप जीतने के अवसर महज पांच फीसदी बता रहे हैं। मेरा मानना है कि हमारे लिए यह एकदम ठीक है। हमारा मकसद सही वक्त पर सही प्रदर्शन है। रैंकिंग मैच खत्म होने के बाद ही अहम होती है। भारत के विश्व कप खेलने के एक पखवाड़े बाद जहां 2028 के लॉस एंजेल्स के लिए अहम जापान में होने वाले एशियाई खेलों में शिरकत करने की बात है तो यह वाकई मुश्किल चुनौती है। हॉकी विश्व कप 2026 के लिए चुनी गई भारतीय टीम खासी संतुलित है। हमने अनुभवी खिलाड़ियों के साथ नौजवान खिलाड़ियों की मिली जुली संतुलित टीम चुनी है। टीम चुनते हुए खिलाड़ी के नाम की जगह उसके प्रदर्शन और अनुभव को तवज्जो दी है। दबाव बनाना, जवाबी हमले बोलना हमारी महज तकनीकी पहचान नहीं है, बल्कि यह हमारे खेलने का तरीका है। हम बहुत आगे की नहीं सोच रहे ।हमारी सोच बस यही है कि एक समय केवल एक मैच पर पर ध्यान लगाए और पूरी ताकत झोंक दें। 1975 में आखिरी बार विश्व कप जीतने के बाद से करीब 50 बरस में हमारी मौजूदा हॉकी टीम के पास भारतीय हॉकी के इतिहास में अपना नया अध्याय लिखने का मौका है। हम इसे लेकर वाकई रोमांचित हैं।’
ध्यान गोल के हर मौके को भुनाने पर : हरमनप्रीत सिंह
भारत के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने कहा, ‘ मैं अपनी टीम को बराबर खुल कर खेलने और बहुत दबाव लिए बिना मौके को भुनाने को प्रेरित करता हूं। जब आप बहुत ज्यादा सोचते तो गलती करते हैं। टीम में हम सभी को अपनी जिम्मेदारी मालूम होनी चाहिए। शिविर में संदेश साफ था कि गलती हो जाए तो तुरंत इसे सुधारें। हमें टीम के रूप में मैदान पर एक दूसरे का साथ निभाना है। भारत और पाकिस्तान मैच को लेकर हर कोई रोमांचित है और हमसे इसमें जीत की उम्मीद कर रह है। हमें पाकिस्तान के खिलाफ अपनी भावनाओं पर काबू रख कर चतुराई से खेलना होगा। हम अपने पूल की हर टीम के खिलाफ मैच को लेकर रोमांचित हैं, फिर चाहे वह वेल्स हो, इंग्लैंड या फिर पाकिस्तान। विश्व कप में हमारे लिए अपने पहले मैच की सीटी बजने से प्रतिद्वंद्वी पर दबाव बना हर मौके को भुनाना है। 1980 में आठवीं और आखिरी बार ओलंपिक मे स्वर्ण जीतने के बाद हमने 41 बरस पहले 2021 में टोक्यो ओलंपिक में कांसे के रूप में अपना पहला पदक जीता था। हमें इससे इस विश्व कप में भी पदक की उम्मीद जगी है। हमने 1975 में स्वर्ण पदक के रूप में हॉकी विश्व कप में अपना आखिरी पदक जीता था। हमारे लिए अब 2026 में 51 बरस के इस लंबे इंतजार को खत्म कर फिर पदक जीत इतिहास रचने का मौका है। डी में हमला बोलते के साथ अपने किले की चौकसी के वक्त पूरी तरह चौकस रहना होगा। हमारा ध्यान चाहे डी में गेंद को लेकर घुसना, या फिर गेंद पर निशाना जमाने , अथवा पेनल्टी कॉर्नर या फिर सेट पीस यानी हर लिहाज से गोल के हर मौके को भुनाने पर है। हमारी टीम खासी संतुलित है और जिस तरह से हमारी टीम ने हाल ही में शीर्ष टीमों के खिलाफ बढ़िया प्रदर्शन उससे टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है। अनुभवी खिलाड़ी नौजवान साथी खिलाड़ियों को फोकस रहने पर ध्यान करते हैं।’
भारत की बेल्जियम और नीदरलैंड 2026 में होने वाले पुरुष हॉकी विश्व कप के 20 सदस्यीय टीम है :
गोलरक्षक : मोहित एचएस, सूरज करकेरा।
रक्षापंक्ति : जर्मनप्रीत सिंह, हरमनप्रीत सिंह (कप्तान), अमित रोहिदास, जुगराज सिंह, संजय, सुमित, यशदीप सिवाच।
मध्यपंक्ति : राजिंदर सिंह, आदित्य अर्जुन लालगे, हार्दिक सिंह, मनप्रीत सिंह, नीलकांत शर्मा, विवेक सागर प्रसाद।
अग्रिम पंक्ति : दिलप्रीत सिंह, शिलानंद लाकरा, सुखजीत सिंह, मनदीप सिंह, अभिषेक नैन।
पुरुष हॉकी विश्व कप में भारत के पूल डी के मैच (एम्सर्टडम)
15 अगस्त भारत वि वेल्स (शाम साढ़े चार बजे से)
17 अगस्त: भारत वि इंग्लैंड(शाम साढ़े छह बजे से)
19 अगस्त : भारत वि पाकस्तान (साढ़े छह बजे)
(मैचों का समय भारतीय समयानुसार)





