प्रेम प्रकाश
लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी सरकार के पहले 100 दिन उसके पूरे कार्यकाल का अंतिम मूल्यांकन नहीं होते, लेकिन वे उसकी कार्यशैली, प्राथमिकताओं और विकास-दृष्टि का स्पष्ट संकेत अवश्य देते हैं। यही वह समय होता है जब चुनावी संकल्प नीतिगत निर्णयों का रूप लेते हैं और यह स्पष्ट होने लगता है कि सरकार राज्य को किस दिशा में आगे ले जाना चाहती है। बिहार में सम्राट सरकार के पहले 100 दिन भी इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण रहे हैं। इन शुरुआती दिनों में सरकार ने केवल घोषणाओं तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, डिजिटल गवर्नेंस और आधारभूत संरचना जैसे क्षेत्रों में ऐसे निर्णय लिए, जिनका उद्देश्य विकास की गति तेज करने के साथ प्रशासन को अधिक प्रभावी और उत्तरदायी बनाना है।
बिहार की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत कृषि है। इसलिए सरकार ने शुरुआत इसी क्षेत्र से की। प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के खातों में ₹260.71 करोड़ की कृषि इनपुट सब्सिडी सीधे डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की गई। इसके साथ ही कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर डेयरी और मत्स्य क्षेत्र को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाने की दिशा में पहल की गई। कॉम्फेड, नाफेड और आईओसीएल के साथ हुए समझौते तथा 8,000 से अधिक नए सुधा बिक्री केंद्रों के विस्तार की योजना इस बात का संकेत देती है कि सरकार कृषि को मूल्य संवर्धन और बाजार से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सरकार ने गरीब और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत देने वाले निर्णय लिए। मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष की वार्षिक आय सीमा ₹2.5 लाख से बढ़ाकर ₹4 लाख कर दी गई, जिससे अधिक परिवार गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए सरकारी सहायता प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही बिहार गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम का विस्तार और बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में पहल यह संकेत देती है कि सरकार केवल चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि स्वास्थ्य शिक्षा और संस्थागत क्षमता को भी मजबूत करना चाहती है।
सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार ने 94 लाख से अधिक पेंशनधारियों के लिए समयबद्ध प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) की व्यवस्था सुनिश्चित की। प्रत्येक माह निर्धारित तिथि तक पेंशन राशि लाभार्थियों के खातों में पहुंचाने का निर्णय प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। इससे बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और अन्य पात्र लाभार्थियों के लिए सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था अधिक भरोसेमंद बनने की उम्मीद है।
यदि पहले 100 दिनों के सबसे दूरगामी निर्णयों की बात की जाए तो उद्योग और निवेश का क्षेत्र विशेष रूप से उल्लेखनीय दिखाई देता है। सरकार ने निवेश प्रक्रियाओं को सरल और समयबद्ध बनाने के लिए उद्योगों से संबंधित स्वीकृतियों की अधिकतम अवधि 30 दिन निर्धारित करने तथा निर्धारित समय में निर्णय न होने पर डीम्ड क्लीयरेंस की व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही स्टेट इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एसआईपीबी) को अधिक प्रभावी बनाने और बिहार बिजनेस कनेक्ट–2026 की तैयारियों को गति देने का प्रयास यह दर्शाता है कि सरकार राज्य को निवेश और रोजगार के नए केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहती है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। भागलपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं कंप्यूटर साइंस विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर में आर्किटेक्चर एवं सिविल इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय तथा पटना में यूनिवर्सिटी ऑफ फिजिक्स एंड साइंसेज की स्थापना की घोषणा राज्य की उच्च शिक्षा को नई दिशा देने वाला कदम माना जा सकता है। इसके साथ ही राज्यभर में 544 आधुनिक मॉडल स्कूल विकसित करने का निर्णय यह संकेत देता है कि सरकार स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और सरकारी विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की दिशा में भी गंभीर है।
डिजिटल गवर्नेंस को भी पहले 100 दिनों की प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान मिला है। बीएसडब्ल्यूएएन 3.0, मुख्यमंत्री डिजिटल लाइब्रेरी योजना, बिहार साइबर सिक्योरिटी रिस्पॉन्स सेंटर तथा बिहार एआई समिट–2026 जैसी पहलें यह दर्शाती हैं कि सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीक को केवल सूचना प्रौद्योगिकी का विषय नहीं, बल्कि सुशासन और बेहतर सार्वजनिक सेवा वितरण का माध्यम मान रही है। प्रशासन में तकनीक के बढ़ते उपयोग से पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ने की संभावना है।
आधारभूत संरचना के क्षेत्र में भी सरकार ने सड़क, पुल, ऊर्जा और सार्वजनिक परिवहन से जुड़ी कई परियोजनाओं को गति देने का प्रयास किया है। कच्ची दरगाह-बिदुपुर छह लेन गंगा पुल, मीठापुर-सिपारा एलिवेटेड रोड तथा उत्तरी गंगा पथ जैसी परियोजनाएं राज्य की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। ऊर्जा अवसंरचना के विस्तार और सार्वजनिक परिवहन के आधुनिकीकरण की दिशा में उठाए गए कदम भी इसी व्यापक विकास दृष्टि का हिस्सा हैं।
इन सभी पहलों के बीच एक बात स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आती है कि सरकार ने विकास को केवल निर्माण कार्यों या योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि प्रशासनिक सुधार, तकनीक आधारित शासन, निवेश, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। निश्चित रूप से इन निर्णयों की वास्तविक सफलता उनके प्रभावी क्रियान्वयन और आम लोगों के जीवन में दिखाई देने वाले बदलाव से तय होगी। फिर भी पहले 100 दिनों ने यह संकेत अवश्य दिया है कि सरकार कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को आधुनिक उद्योग, ज्ञान, तकनीक और निवेश से जोड़ते हुए बिहार के विकास का नया खाका तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यदि यही निर्णय क्षमता, नीति की निरंतरता और क्रियान्वयन की गति आगे भी बनी रहती है, तो ये शुरुआती सौ दिन आने वाले वर्षों में बिहार के विकास की मजबूत आधारशिला साबित हो सकते हैं।





