आचार्य रत्नसुंदरसूरीश्वरजी महाराज का 500वां ग्रंथ मानव जीवन को देगा नई दिशा

Acharya Ratnasundarasuriswarji Maharaj's 500th book will give a new direction to human life

विश्व में विश्व शांति की आवश्यकता : लोकसभा अध्यक्ष

प्रमोद शर्मा

दिल्ली/मुंबई : मुंबई में आयोजित ऊर्जा महोत्सव में परम पूज्य आचार्य श्री रत्नसुंदरसूरीश्वरजी महाराज की 500वीं पुस्तक के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा कि आज जब विश्व शांति की सर्वाधिक आवश्यकता है, ऐसे समय में जैन दर्शन के अहिंसा, शांति और मानवीय मूल्यों पर आधारित विचार अत्यंत प्रासंगिक हो जाते हैं। अहिंसा केवल एक धार्मिक सिद्धांत नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण और वैश्विक शांति का मार्ग है। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आज के समय में, जब व्यक्ति अपने दैनिक दायित्वों और जिम्मेदारियों में व्यस्त रहता है, ऐसे में 500 ग्रंथों का लेखन पूर्ण करना आचार्य श्री रत्नसुंदरसूरीश्वरजी महाराज की अद्भुत साधना, अनुशासन और साहित्य के प्रति अपूर्व समर्पण का सशक्त प्रमाण है। यह साहित्य समाज को आत्मचिंतन, संयम, सद्भाव और नैतिक जीवन मूल्यों की दिशा में प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि मात्र 19 वर्ष की अल्पायु में सांसारिक जीवन का त्याग कर आध्यात्मिक मार्ग अपनाना और आज तक निरंतर तप, त्याग और साधना के माध्यम से मानव जीवन को दिशा देना आचार्य श्री के विराट व्यक्तित्व को दर्शाता है। उनकी लेखनी का प्रत्येक शब्द तपस्या, अनुभूति और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है, जो व्यक्ति को जीवन के उद्देश्य से लेकर मोक्ष के पथ तक मार्गदर्शन प्रदान करता है। श्री बिरला ने कहा कि भगवान महावीर के अहिंसा और विश्व शांति के विचार आज भी उतने ही यथार्थ और आवश्यक हैं, जितने उनके समय में थे। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में सभी देशों और समाजों को भगवान महावीर के मार्ग पर चलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन से प्रेरणा लेकर, चाहे व्यक्ति किसी भी धर्म का हो, यदि वह अपने जीवन और आचरण में नैतिकता, संयम और करुणा को अपनाए, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। लोकसभा अध्यक्ष ने आयोजन समिति से आग्रह किया कि आचार्य श्री की 500वीं पुस्तक सहित उनके समस्त ग्रंथ अधिक से अधिक आमजन तक पहुंचें, ताकि समाज को उनके विचारों से मार्गदर्शन और प्रेरणा मिल सके। उन्होंने कहा कि यह पांच दिवसीय महोत्सव केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी आध्यात्मिक ऊर्जा और संदेश देश-दुनिया तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि नवीन संसद भवन में तीर्थंकर भगवान की प्रतिमा, गैलरी में ‘सम्मेद शिखर’ और भगवान महावीर की तस्वीर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से लगाई गई है, ताकि लोकतंत्र के मंदिर में आने वाले प्रत्येक जनप्रतिनिधि को करुणा, अहिंसा और नैतिक मूल्यों की सतत प्रेरणा मिलती रहे। अंत में लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि परम पूज्य आचार्य श्री के दर्शन से उन्हें नई ऊर्जा, सामर्थ्य और आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त हुई है तथा यह अवसर उनके लिए सौभाग्य का विषय है।