कहने में कम, करने में आगे: रणबीर सिंह गंगवा

Less to say, more to do: Ranbir Singh Gangwa

(जो गांव से चला, गांव के लिए जिया — जनता का नेता, ज़मीन से जुड़ा व्यक्तित्व, गांव, किसान और गरीब की सच्ची आवाज़)

(रणबीर सिंह गंगवा हरियाणा की राजनीति में एक ऐसे नेता हैं, जिनकी पहचान शोर से नहीं, काम से बनी है। गांव की मिट्टी से उठकर उन्होंने जनसेवा को अपना मूल मंत्र बनाया। जिला परिषद से लेकर कैबिनेट मंत्री तक का उनका सफर निरंतर संघर्ष, संगठनात्मक निष्ठा और जनविश्वास की कहानी है। लोक निर्माण विभाग और सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के मंत्री के रूप में उनका फोकस साफ है—बेहतर सड़कें, स्वच्छ पेयजल और पारदर्शी व्यवस्था। वे मानते हैं कि मजबूत गांव ही मजबूत हरियाणा की नींव हैं। इसी सोच के साथ वे सड़कों के विस्तार, जलापूर्ति और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दे रहे हैं। सादगी, स्वच्छ छवि और जमीनी जुड़ाव उनकी सबसे बड़ी ताकत है। पिछड़े वर्गों, किसानों और गरीबों की आवाज़ बनकर रणबीर गंगवा ने साबित किया है कि राजनीति अगर ईमानदारी और सेवा भाव से की जाए, तो बदलाव ज़मीनी स्तर पर दिखता है।)

डॉ. प्रियंका सौरभ

रणबीर सिंह गंगवा हरियाणा की राजनीति में उन चुनिंदा नेताओं में गिने जाते हैं, जिन्होंने ग्रामीण पृष्ठभूमि से उठकर निरंतर संघर्ष, संगठनात्मक निष्ठा और जनसेवा के बल पर कैबिनेट मंत्री तक का सफर तय किया। वे आज हरियाणा सरकार में लोक निर्माण विभाग (PWD) तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के कैबिनेट मंत्री हैं और नायब सिंह सैनी मंत्रिमंडल में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनका जीवन पिछड़े वर्गों, किसानों और ग्रामीण समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

रणबीर सिंह गंगवा का जन्म 4 मार्च 1964 को हरियाणा के हिसार जिले के गंगवा गांव में कुम्हार (प्रजापति) परिवार में हुआ। उनके पिता राजाराम और माता केसर देवी साधारण ग्रामीण जीवन से जुड़े थे। सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़े गंगवा ने उच्च माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की और प्रारंभ से ही सामाजिक कार्यों में रुचि दिखाई। ग्रामीण परिवेश में रहते हुए उन्होंने किसानों, मजदूरों और पिछड़े वर्गों की समस्याओं को नज़दीक से समझा, जिसने आगे चलकर उनकी राजनीति की दिशा तय की।

उनका पहला औपचारिक चुनाव जिला परिषद का था। वर्ष 2000 में उन्होंने हिसार जिला परिषद का चुनाव लड़ा, जहां उन्हें प्रारंभिक पराजय का सामना करना पड़ा। लेकिन इस हार ने उन्हें और मजबूत बनाया। 2005 में वे दोबारा चुनाव जीतकर जिला परिषद सदस्य बने और बाद में उपाध्यक्ष पद तक पहुंचे। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण सड़कों, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। यही कालखंड उनके राजनीतिक जीवन की मजबूत नींव बना।

2009 में उन्होंने नलवा विधानसभा क्षेत्र से इंडियन नेशनल लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्हें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संपत सिंह से हार का सामना करना पड़ा, किंतु उनका राजनीतिक प्रभाव बना रहा। 2010 में उन्हें इंडियन नेशनल लोकदल की ओर से राज्यसभा भेजा गया। राज्यसभा सदस्य के रूप में उन्होंने हरियाणा के ग्रामीण और पिछड़े वर्गों से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया और अपनी सक्रियता से पहचान बनाई।

2014 में वे नलवा विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। इस चुनाव में उन्होंने संपत सिंह और पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन जैसे दिग्गज नेताओं को पराजित किया। विधायक के रूप में उन्होंने क्षेत्र में विकास कार्यों को गति दी और जनता से निरंतर संवाद बनाए रखा।

2019 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा और नलवा से पुनः जीत दर्ज की। विधानसभा में उन्हें उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) की जिम्मेदारी सौंपी गई, जहां उन्होंने सदन की कार्यवाही को सुचारू और मर्यादित ढंग से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें बरवाला विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया। यह राजनीतिक रूप से एक नई चुनौती थी, लेकिन रणबीर गंगवा ने इसे अवसर में बदल दिया। उन्होंने बरवाला से ऐतिहासिक जीत दर्ज कर पहली बार वहां भाजपा को विजय दिलाई। इसी जीत के बाद उन्हें नायब सैनी मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल किया गया। लगभग 34 वर्षों के राजनीतिक संघर्ष का यह महत्वपूर्ण पड़ाव था।

कैबिनेट मंत्री बनने के बाद रणबीर गंगवा को लोक निर्माण विभाग (PWD) और सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य विभाग को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। हरियाणा में लगभग 30,664 किलोमीटर लंबी सड़कों का नेटवर्क पीडब्ल्यूडी के अंतर्गत आता है। वर्ष 2025–26 के लिए 6,500 किलोमीटर सड़कों की नई कार्पेटिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गुणवत्ता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए सख्त निगरानी प्रणाली लागू की गई है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के तहत उनका फोकस ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति, पाइपलाइन विस्तार और जल संरक्षण योजनाओं पर है। हरियाणा स्वर्ण जयंती महाग्राम योजना के माध्यम से गांवों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। उनका मानना है कि मजबूत गांव ही मजबूत हरियाणा की नींव हैं।

रणबीर गंगवा को पिछड़े वर्गों का सशक्त प्रतिनिधि माना जाता है। प्रजापति समाज में उनकी विशेष पकड़ है और वे ओबीसी समुदाय की आवाज़ उठाने के लिए जाने जाते हैं। उनकी सादगी और सहजता उन्हें आम जनता के बीच लोकप्रिय बनाती है।

उनकी राजनीति की एक बड़ी विशेषता उनकी स्वच्छ छवि है। 34 वर्षों के सार्वजनिक जीवन में उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। उनकी घोषित संपत्ति और देनदारियां चुनावी हलफनामों में पारदर्शी रूप से दर्ज हैं, जो उनकी ईमानदारी और जवाबदेही को दर्शाती हैं।

रणबीर सिंह गंगवा का जीवन यह संदेश देता है कि निरंतर परिश्रम, जमीनी जुड़ाव और जनसेवा के प्रति समर्पण से व्यक्ति ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। जिला परिषद से लेकर कैबिनेट मंत्री तक का उनका सफर संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति की प्रेरक कहानी है। आज वे हरियाणा की राजनीति में एक सक्रिय, जमीनी और विकासोन्मुखी नेता के रूप में स्थापित हो चुके हैं और उनके नेतृत्व में प्रदेश का बुनियादी ढांचा नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

(डॉ. प्रियंका सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), कवयित्री एवं सामाजिक चिंतक हैं।)