लोक निर्माण विभाग ने वर्ष 2025-26 में मानसून काल से पूर्व 3134 किमी लंबी सड़कों को गड्ढा मुक्त किया

The Public Works Department made 3134 km of roads pothole-free before the monsoon season in the year 2025-26

रविवार दिल्ली नेटवर्क

देहरादून : पर्यटन मंत्री श्री सतपाल महाराज ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह जानकारी दी कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के दूसरे कार्यकाल के बीते चार साल में प्रदेश में 819 पंचायत भवनों का पुनर्निर्माण किया गया है। प्रदेश में पंचायत भवनों की संख्या 5867 है। इसमें से 1134 पंचायत भवन लंबे समय से जीर्ण-शीर्ण अवस्था में थे। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने पंचायतीराज विभाग को अभियान चलाकर इन भवनों का पुनर्निर्माण करने के निर्देश दिए थे। शेष भवनों में भी रेनोवेशन कार्य किया जा रहा है।

प्रदेश में लोक निर्माण विभाग नवंबर के प्रथम सप्ताह तक सात हजार से अधिक किमी सड़कों को गड्ढा मुक्त कर चुका है। सदन में विभाग की ओर से प्रस्तुत जानकारी के अनुसार प्रदेश की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने को मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के क्रम में विभाग ने वर्ष 2025-26 में मानसून काल से पूर्व 3134 किमी लंबी सड़कों को गड्ढा मुक्त किया। जबकि मानसून के बाद 10 नवंबर 2025 तक 4149.17 किमी लंबी सड़कों को गड्ढा मुक्त किया गया। इस दौरान अकेले हरिद्वार जनपद में 313 किमी से अधिक लंबी सड़कों को गड्ढा मुक्त किया गया।

प्रदेश में विभिन्न तीर्थ स्थलों को रोपवे से जोड़ने की प्रक्रिया गतिमान है। उन्होंने बताया कि विभाग ने कद्दूखाल से सुरकंडा देवी मंदिर के लिए पीपीपी मोड में रोपवे का संचालन शुरु कर दिया है। इसके अलावा जनपद चम्पावत में ठुलीगाड़ से पूर्णागिरी रोपवे भी पीपीपी मोड में निर्माणाधीन है। साथ ही जनपद उत्तरकाशी में जानकी चट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक के लिए भी रोपवे पीपीपी मोड में विकसित किया जा रहा है। साथ ही साथ गौरीकुंड से श्री केदारनाथ धाम, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के लिए भी रोपवे निर्माण की प्रक्रिया गतिमान है।

चीड़ के जंगलों में आग लगने के मूल कारण को खत्म करने के लिए ग्रामीणों से वर्ष 2025 में 5532 टन पिरूल खरीदा गया
प्रदेश में वनाग्नि को रोकने के लिए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जिन गंभीर प्रयासों को शुरू किया गया है, उनसे सार्थक परिणामों की उम्मीदें बढ़ रही हैं। सरकार ने वन विभाग के माध्यम से एक वर्ष के भीतर ग्रामीणों से पांच करोड़ 42 लाख रूपये का पिरूल खरीदा है।

बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल में वन मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने जानकारी साझा करते हुए कहा कि चीड़ के जंगलों में आग लगने के मूल कारण को खत्म करने के लिए ग्रामीणों से वर्ष 2025 में 5532 टन पिरूल खरीदा गया है। इस लक्ष्य को अब बढ़ाकर 8555 टन कर दिया गया है। सरकार की ये ही मंशा है कि पिरुल एकत्रित कर आग की आशंका को न्यूनतम स्तर पर पहुंचा दिया जाए।

वनाग्नि को रोकने के लिए उत्तराखण्ड सरकार के प्रयासों में जनजागरूकता पर भी फोकस किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर 1239 जागरूकता कैंप लगाए गए हैं। सबसे अहम काम सरकार ने यह किया है कि ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में फाॅरेस्ट फायर मैनेजमेंट कमेटी गठित की है, जो विभाग के साथ मिलकर जंगल बचाने में जुट रही हैं। इसके लिए संबंधित ग्राम पंचायत को ₹30 हजार प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।

वनाग्नि के दौरान फायर वाचर्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी सुरक्षा के लिए सरकार ने पहली बार बीमे का सुरक्षा कवच उपलब्ध कराया है। फायर वाचर्स का ₹10 लाख का सामूहिक बीमा किया गया है। 5,600 फायर वाचर्स ने पिछले वर्ष वनाग्नि रोकने में अपना योगदान दिया था।

उपनल कर्मियों को समान कार्य के लिए समान वेतन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया
उत्तराखण्ड सरकार ने वर्ष 2026–27 के बजट में पूर्व उपनल कर्मियों को समान कार्य के लिए समान वेतन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बजट में इस मद के लिए 289 करोड़ 98 लाख 29 हजार रुपये की राशि का प्रावधान किया है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों और श्रमिकों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि पूर्व उपनल कर्मियों ने विभिन्न विभागों में लंबे समय तक महत्वपूर्ण सेवाएं दी हैं और उनके हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने समान कार्य के लिए समान वेतन की व्यवस्था को लागू करने हेतु बजट में पर्याप्त धनराशि सुनिश्चित की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय सरकार की समावेशी और संवेदनशील शासन व्यवस्था का प्रतीक है।सरकार लगातार कर्मचारियों के कल्याण, प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और प्रदेश में पारदर्शी व उत्तरदायी शासन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस निर्णय से पूर्व उपनल कर्मियों को राहत मिलेगी और वे अधिक उत्साह के साथ राज्य के विकास में योगदान दे सकेंगे।

प्रदेश सरकार ने “देवभूमि परिवार विधेयक- 2026” को सदन पटल पर रखा

कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक पारदर्शी तरीके से सहायता पहुँचाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने “देवभूमि परिवार विधेयक- 2026” को सदन पटल पर रख दिया है। इस विधेयक के कानून बन जाने पर प्रदेश में एकीकृत और सत्यापित परिवार-आधारित डेटाबेस “देवभूमि परिवार” की स्थापना हो सकेगी। विधेयक का उद्देश्य विभिन्न विभागों में बिखरे लाभार्थी डेटा को एक मंच पर लाकर योजनाओं के संचालन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समन्वित बनाना है। देवभूमि परिवार आईडी में मुखिया के तौर पर परिवार की 18 वर्ष से अधिक आयु की वरिष्ठतम महिला सदस्य का नाम दर्ज होगा।

वर्तमान में राज्य के अलग-अलग विभाग अपनी-अपनी योजनाओं के लिए अलग लाभार्थी डेटाबेस का उपयोग करते हैं। इसके कारण कई बार लाभार्थी आंकड़ों का दोहराव, पुनः सत्यापन की जटिल प्रक्रियाएँ और विभागों के बीच समन्वय की कमी जैसी समस्याएँ सामने आती हैं। इससे न केवल प्रशासनिक संसाधनों पर अतिरिक्त भार पड़ता है, बल्कि योजनाओं के आकलन और प्रभावी क्रियान्वयन में भी बाधाएँ उत्पन्न होती हैं।

अब इस विधेयक के माध्यम से राज्य में एक एकीकृत परिवार-स्तरीय डेटा भंडार स्थापित किया जाएगा, जो विभिन्न विभागों और एजेंसियों के लिए लाभार्थी संबंधी सूचनाओं का एक विश्वसनीय स्रोत के रूप में कार्य करेगा। इससे योजनाओं का बेहतर लक्ष्योन्मुखी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी सहायता अधिक प्रभावी ढंग से पहुँच सकेगी। इसके साथ ही, इस डेटा प्रणाली के प्रभावी प्रबंधन, संरक्षण और संरचनात्मक सुधारों के लिए एक उपयुक्त संस्थागत तंत्र का भी गठन किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत विभागों के बीच सुरक्षित और विनियमित डेटा आदान-प्रदान की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी, जिससे योजनाओं के बेहतर लक्षित वितरण और समन्वय को मजबूती मिलेगी।

यह पूरी व्यवस्था डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 (DPDP Act 2023) के प्रावधानों के अनुरूप संचालित की जाएगी, ताकि नागरिकों के डेटा का उपयोग सहमति, पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि देवभूमि परिवार विधेयक- 2026 सुशासन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और उत्तराखंड के नागरिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुँच सकेगा।

वन्य जीवों से होने वाले कई तरह के नुकसान पर उत्तराखण्ड सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लेकर लोगों को राहत प्रदान की है
वन्य जीवों से होने वाले कई तरह के नुकसान पर अभी तक मुआवजे की व्यवस्था नहीं थी, लेकिन मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लेकर लोगों को राहत प्रदान की है। राहत देने के लिए सरकार के प्रयास अभी थमे नहीं हैं। अब सरकार भालुओं से किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को भी मुआवजे के दायरे में लाने की कोशिश में जुटी है। भालुओं से मकान-भवनों को होने वाले नुकसान पर सरकार पहले ही मुुआवजे की व्यवस्था कर चुकी है।

सरकार ने अपने चार साल के कार्यकाल में वन्य जीवों से लोगों के नुकसान पर मुआवजे को लेकर गंभीरता दिखाई है। वन्य जीवों के हमले से मौत पर मिलने वाले मुआवजे को छह लाख रूपये करना बेहद अहम फैसला रहा है। पहले ऐसे मामलों में चार लाख रूपये मुआवजा दिया जा रहा था। इसी तरह ततैया, मधुमक्खी के हमले में भी मुआवजे की सरकार ने व्यवस्था की है।

बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल में वन मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने बताया कि भालुओं के व्यवहार में आए परिवर्तन और इससे हो रहे नुकसान पर भी सरकार की निगाह है। इसीलिए, भारतीय वन्य जीव संस्थान को इस विषय पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार जरूरी कदम उठाएगी। वन मंत्री ने जानकारी दी कि भालुओं से फसल के नुकसान पर मुआवजा देने के संबंध में भी सरकार गंभीरता से विचार कर रही है।