रविवार दिल्ली नेटवर्क
अलीगढ़ : अलीगढ़ के खैर क्षेत्र में पूर्व विधायक प्रमोद गौड़ की हत्या की साजिश रचने और जान से मारने की धमकी देने के सनसनीखेज मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। एडीजे-11 की अदालत ने सात आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उन्हें अलग-अलग अवधियों की सजा सुनाई, जबकि तीन आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
मामला 27 अगस्त 2022 का है, जब प्रमोद गौड़ ने खैर नगर पालिका के तत्कालीन चेयरमैन संजीव कुमार अग्रवाल उर्फ बिंटू और उसके साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
आरोप था कि सिंचाई विभाग की जमीन और नाले पर अतिक्रमण की शिकायत से बौखलाए आरोपियों ने पूरी योजना बनाकर हत्या की साजिश रची।
जांच में सामने आया कि इस साजिश को अंजाम देने के लिए बुलंदशहर के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर राजकुमार जाट को 60 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी — यानी लोकतंत्र के एक जनप्रतिनिधि की जान की कीमत तय कर दी गई थी!
अदालत का सख्त फैसला – अपराधियों पर गिरी गाज
अदालत ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर कठोर निर्णय सुनाते हुए: संजीव अग्रवाल और विकास को 8-8 महीने की सजा + जुर्माना, रिंकू, आदेश और तरुण को 5-5 साल की सजा, राजकुमार जाट और सागर को 2-2 साल की सजा, वहीं, सजा के दौरान फरार रहे रिंकू और आदेश के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया गया है।
तीन आरोपी बरी
अदालत ने करन, राहुल और संजय को पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण बरी कर दिया, जबकि एक आरोपी पहले से ही दूसरे मामले में जेल में सजा काट रहा है।
शिकायत बनी जानलेवा साजिश की वजह
प्रमोद गौड़ के मुताबिक, उन्होंने सरकारी जमीन और नाले पर हो रहे अवैध अतिक्रमण की शिकायत शासन स्तर पर की थी। प्रशासन की कार्रवाई से नाराज होकर आरोपियों ने इस खतरनाक साजिश को जन्म दिया।
क्या अब भी अतिक्रमण और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों की जान सुरक्षित है?
यह फैसला जहां एक ओर न्याय की जीत है, वहीं दूसरी ओर यह भी दिखाता है कि सत्ता, जमीन और लालच के खेल में इंसानी जान की कीमत कितनी सस्ती समझी जा रही है।





