दीपक कुमार त्यागी
गाज़ियाबाद : दिल्ली की सीमा से सटे हुए गाजियाबाद जनपद के लोनी कस्बे में शनिवार को एक सनसनीखेज खुलासे ने देश व दुनिया में फिर से एक्स मुस्लिम यूट्यूबर सलीम वास्तिक को चर्चाओं में ला दिया है, अभी कुछ माह पहले ही दो सरफिरे धार्मिक उन्मादी युवकों के द्वारा एक्स मुस्लिम यूट्यूबर सलीम वास्तिक का लोनी स्थित घर पर गला रेत दिया गया था, जिसके यूपी पुलिस ने दोनों युवकों को मुठभेड़ में मार गिराया था, उस वक्त यह मामला बेहद चर्चाओं में देश व दुनिया में रहा था।
लेकिन एक्स मुस्लिम यूट्यूबर सलीम वास्तिक की शनिवार को गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने जो खुलासा किया है वह बेहद ही चौंकाने वाला है, जिस घटना ने पुलिस व ख़ुफ़िया एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया भी निशान लगा दिया है। दिल्ली की सीमा से सटे हुए लोनी में गंभीर प्रकृति के अपराध में 25 वर्षों से फरार चल रहे हत्या के आरोपी सजायाफ्ता मुजरिम बेखोफ होकर के अपनी चर्चाओं की दुकान चला कर माहौल खराब कर रहा था और पुलिस व देश की ख़ुफ़िया एजेंसियों को कानों-कान खबर तक भी नहीं लगी थी। जबकि एक्स मुस्लिम यूट्यूबर सलीम वास्तिक अपने चर्चित विवादित यूट्यूब वीडियो के दम पर देश व दुनिया में बेहद चर्चित है। लेकिन अब अच्छी बात यह रही कि 13 वर्षीय बच्चे की हत्या के मामले में 25 सालों से फरार चल रहे सजायाफ्ता मुजरिम को आखिरकार दिल्ली पुलिस ने अब सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।
सूत्रों के अनुसार गाजियाबाद के लोनी इलाके में रहने वाले एक्स मुस्लिम यूट्यूबर सलीम वास्तिक को लेकर बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिस शख्स पर अभी कुछ समय पहले ही जानलेवा हमला हुआ था और उसके दोनों हमलावरों को यूपी पुलिस ने मुठभेड़ में ढ़ेर किया था, वही एक्स मुस्लिम सलीम वास्तिक उर्फ सलीम खान एक हिन्दू बच्चे का हत्यारा निकला, जिस अपराधी को अब दिल्ली पुलिस ने बीती रात शनिवार को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के सूत्रों के अनुसार दिल्ली के गोकुलपुरी थाने से 20 जनवरी 1995 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली निवासी एक कारोबारी के 13 वर्षीय नाबालिग बेटे संदीप बंसल का फिरौती वसुलने के लिए अपहरण किया गया था।
इस घटना को सलीम खान उर्फ सलीम वास्तिक ने उस वक्त अपने सहयोगी अनिल के साथ मिलकर के अंजाम दिया था और कारोबारी से 13 वर्षीय बेटे संदीप बंसल की सुरक्षित रिहाई के बदले में 30,000 रुपये की फिरौती की मांग की गयी थी, लेकिन इन अपराधियों ने पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए बच्चे की हत्या कर दी थी।
जिस मामले में सलीम खान उर्फ सलीम वास्तिक को वर्ष 1997 में न्यायालय के द्वारा दोषी ठहराया गया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। वर्ष 2000 में सलीम खान उर्फ सलीम वास्तिक को दिल्ली के उच्च न्यायालय ने अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया था, लेकिन बाद में वर्ष 2011 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उनकी अपील को खारिज करते हुए आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था।
लेकिन चालबाज सलीम खान उर्फ सलीम वास्तिक ने पुलिस, कानून व अन्य एजेंसियों को आंख में धूल झोंकते हुए उन्हें धोखा देते हुए और अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए खुद को मृत घोषित करवा लिया था। वही जेल के सलाखों से बचने के लिए सलीम खान ने अपनी पहचान सलीम वास्तिक उर्फ सलीम अहमद के रूप में बदल ली थी। जिसके बाद सलीम खान उर्फ सलीम वास्तिक पिछले 26 वर्षों से लगातार हरियाणा और उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में अपने अपराधों को छिपाते हुए रह रहा था और गिरफ्तारी से बचता रहा। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद के लोनी में स्थाई रूप से रहने लग गया था, जहां पर उस पर दो मजहबी उन्माद में अंधे युवकों ने जानलेवा हमला किया, जिसकी जांच की कड़ियों को मिलाते हुए सलीम खान उर्फ सलीम वास्तिक दिल्ली के एक कारोबारी के 13 वर्षीय बेटे संदीप बंसल की हत्या का सजायाफ्ता मुजरिम निकला। जिसके पश्चात दिल्ली पुलिस ने पिछले 25 वर्षों से फरार चल रहे इस अपराधी सलीम खान उर्फ सलीम वास्तिक को लोनी से शनिवार को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेजकर मृत संदीप बंसल को न्याय देने का कार्य कर दिया।





