भारत सरकार द्वारा पुस्तकालयों की खरीद हेतु दो पुस्तकें अनुमोदित
डॉ. सत्यवान सौरभ
नारनौल : वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामनिवास ‘मानव’ को लघुकथाकार के रूप में विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त हुई है। भारत सरकार द्वारा सभी केंद्रीय मंत्रालयों, उपक्रमों, संस्थानों और विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों के विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्रों के पुस्तकालयों की खरीद हेतु वर्ष-2024 में प्रकाशित साहित्य, संस्कृति, व्याकरण, ज्ञान, विज्ञान, धर्म, दर्शन, इतिहास, राजनीति, पर्यावरण आदि विविध विषयों की अनुमोदित 464 हिंदी-पुस्तकों की सूची में डॉ. ‘मानव’ की भी दो लघुकथा-कृतियों– “जड़कटा पेड़’ तथा अन्य लघुकथाएँ’ और ‘वैश्विक हिंदी-लघुकथाएँ’ को शामिल किया गया है। प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित ” जड़कटा पेड़ तथा अन्य लघुकथाएँ’ संग्रह में डॉ. ‘मानव’ की निन्यानवे प्रतिनिधि लघुकथाएँ शामिल हैं, वहीं अनिल प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित ‘वैश्विक हिंदी-लघुकथाएँ’ संकलन में पाँच महाद्वीपों और सोलह देशों के चौवालीस प्रमुख लघुकथाकारों की चार-चार सर्वश्रेष्ठ लघुकथाएँ संकलित हैं। उल्लेखनीय है कि डॉ. ‘मानव’ विश्व के इकलौते ऐसे हिंदी-लघुकथाकार हैं, जिनकी दो लघुकथा-कृतियों को इस सूची में स्थान मिला है।
ज्ञातव्य है कि एक दर्जन से अधिक विधाओं में सृजनरत तथा विभिन्न विधाओं की चौंसठ पुस्तकों के लेखक-संपादक डॉ. ‘मानव’ के चार मौलिक लघुकथा-संग्रहों के साथ पंजाबी (दो), भोजपुरी, मराठी, नेपाली और अंग्रेजी में अनूदित छह संग्रह भी प्रकाशित हो चुके हैं। अनेक पुरस्कार-सम्मान प्राप्त डॉ. ‘मानव’ की लघुकथाओं पर आठ बार एमफिल् और दो बार पीएचडी संपन्न हो चुकी है तथा विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में भी इनकी पाँच लघुकथाएँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त इनकी दो लघुकथाओं– ‘फिल्म’ और ‘इतिहास गवाह है’ पर गुजराती भाषा में टेलिफिल्में भी बन चुकी हैं।





