अजय कुमार
रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने आज 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन रामपुर डीएम और रिटर्निंग ऑफिसर के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी के मामले में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को दो साल की सजा सुनाई है। यह वही मामला है जिसमें अदालत ने उन्हें उस समय दिए गए भाषण को आपत्तिजनक मानते हुए दोषी ठहराया था। लेकिन उनके खिलाफ कानूनी लड़ाई सिर्फ इसी मामले तक सीमित नहीं रही है; 2019 के बाद से उन पर सौ से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए, और अलग-अलग अदालतों ने समय-समय पर उन मामलों में दोषसिद्धि, जमानत, या बरी किए जाने जैसे फैसले दिए हैं। आजम खान के मुकदमों का इतिहास लगातार लंबा होता गया है। उपलब्ध ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस रिकॉर्ड में उनके खिलाफ 111 आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं, जिनमें कुछ मामलों में अंतिम रिपोर्ट दाखिल हो चुकी है, कुछ वापस लिए जा चुके हैं, कुछ अदालत से डिस्चार्ज हुए हैं, और बड़ी संख्या अब भी विचाराधीन है। 2019 लोकसभा चुनाव से पहले शुरू हुआ यह सिलसिला बाद के वर्षों में जमीन कब्जा, धोखाधड़ी, भड़काऊ भाषण, संपत्ति विवाद और अन्य आरोपों तक फैल गया।
जहां तक दोषसिद्धि की बात है, विभिन्न रिपोर्टों में यह संख्या अलग-अलग समय पर बदलती रही है, क्योंकि कुछ फैसलों के खिलाफ अपीलें लंबित हैं और कुछ में बाद में जमानत या राहत मिल चुकी है। 2025 की एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी पुलिस रिकॉर्ड में उन्हें छह मामलों में दोषी ठहराया गया था, और उन्होंने सभी में अपीलें दायर की थीं; उसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अदालतें छह मामलों में उन्हें बरी कर चुकी थीं। दूसरी रिपोर्टों में 2025 के अंत तक यह भी बताया गया कि कई मामलों में अतिरिक्त बरी होने के बाद अदालतों के फैसलों की कुल तस्वीर 12 या 13 मामलों तक पहुंच गई थी, जिनमें दोषसिद्धि और बरी होने की संख्या अलग-अलग स्रोतों में थोड़ा भिन्न दिखाई देती है। सबसे विश्वसनीय और हालिया संकलित तस्वीर के अनुसार, 2025 के अंत तक उनके खिलाफ जिन मामलों में अदालतों ने अंतिम फैसला दिया, उनमें छह मामलों में सजा और छह मामलों में बरी होना दर्ज है। इसके अलावा 2026 के अप्रैल में दोहरे पैन कार्ड मामले में रामपुर की अदालत ने उनकी सजा बरकरार रखी, जिससे यह मामला भी उनके खिलाफ चल रही दोषसिद्धियों की सूची में और मजबूत हो गया। कुछ अन्य मामलों में बाद में उन्हें राहत मिली, जैसे 2019 के एक अन्य विवादित टिप्पणी मामले में 2025 में बरी किया जाना।
उनके खिलाफ अभी भी बहुत सारे मामले लंबित हैं। 2025 की रिपोर्टों के मुताबिक, 111 मामलों में से कई अब भी ट्रायल के स्तर पर हैं, और लगभग 40 मामले एक समय पर सब-जुडिस बताए गए थे। कुछ मुकदमों में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट दी, कुछ मामले अदालत ने डिस्चार्ज किए, और कुछ को पूर्व सरकार ने वापस लिया था। इसका मतलब यह है कि आजम खान के मुकदमों का पूरा ढांचा अभी खत्म नहीं हुआ है; कई मामलों में अंतिम फैसला आना बाकी है, जबकि कुछ पुराने मामलों में उच्च अदालतों में अपीलें भी लंबित हैं।रामपुर के ताज़ा फैसले का राजनीतिक महत्व भी कम नहीं है। आजम खान समाजवादी पार्टी के सबसे प्रभावशाली मुस्लिम चेहरों में गिने जाते रहे हैं, इसलिए उनके खिलाफ हर सजा और हर बरी होना यूपी की राजनीति में चर्चा का विषय बनता रहा है। 2019 लोकसभा चुनाव वाले जिस मामले में दो साल की सजा हुई, वह इसलिए खास था क्योंकि उसमें प्रशासनिक अधिकारी पर की गई टिप्पणी को चुनावी माहौल में गंभीर माना गया था। यही वजह है कि यह फैसला सिर्फ एक कानूनी आदेश नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक और कानूनी सफर का भी अहम पड़ाव माना गया। मिली जानकारी अनुसार आजम खान के खिलाफ अदालतों में अब तक कम से कम छह मामलों में सजा और छह मामलों में बरी होने की पुष्टि मिलती है। कुछ नए फैसलों और अपीलों की वजह से यह संख्या आगे बदल भी सकती है। कुल मामलों की संख्या 100 से 111 के बीच विभिन्न रिपोर्टों में बताई गई है, लेकिन सबसे अधिक उद्धृत आधिकारिक पुलिस-आधारित संख्या 111 है। इसलिए यह कहना सही होगा कि उनके खिलाफ मुकदमों की श्रृंखला अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है, और आने वाले समय में कुछ और फैसले इस तस्वीर को बदल सकते हैं।





