साणंद का सेमीकंडक्टर केंद्र, आत्मनिर्भर भारत की नई पहचान?

Sanand's semiconductor hub: A new identity for Aatmanirbhar Bharat?

सौरभ वार्ष्णेय

गुजरात के साणंद में सीजी सेमी की आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (ओएसएटी) सुविधा का संचालन केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि भारत के तकनीकी भविष्य की दिशा तय करने वाला ऐतिहासिक कदम है। आज जब दुनिया की अर्थव्यवस्था सेमीकंडक्टर चिप्स पर निर्भर होती जा रही है, ऐसे समय में भारत का इस क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता और आर्थिक सुरक्षा, दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। चार जुलाई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के साणंद में सीजी सेमी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (ओएसएटी) सुविधा का उद्घाटन कर देश को समर्पित किया।

ओएसएटी सुविधा का कार्य चिप निर्माण के बाद उनकी असेंबली, पैकेजिंग और परीक्षण करना होता है। यह सेमीकंडक्टर उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। अब तक भारत इस क्षेत्र में लगभग पूरी तरह विदेशी कंपनियों और आयातित चिप्स पर निर्भर रहा है, जिससे वैश्विक संकट या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में देश के इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार और रक्षा क्षेत्र प्रभावित होते रहे हैं। साणंद में स्थापित यह इकाई इस निर्भरता को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

करीब 7,600 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित यह परियोजना भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में एक नई पहचान दिलाने की क्षमता रखती है। यह संयंत्र ऑटोमोबाइल, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, 5जी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और ऊर्जा क्षेत्र के लिए चिप्स की पैकेजिंग और परीक्षण करेगा। इससे देश के इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलेगी तथा मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया अभियानों को नई गति प्राप्त होगी।

इस परियोजना का एक बड़ा लाभ रोजगार सृजन के रूप में सामने आएगा। उच्च तकनीक आधारित उद्योगों के विकास से इंजीनियरों, तकनीशियनों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे। इससे देश के युवाओं को अत्याधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षण और अनुभव प्राप्त होगा, जो भारत को केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि प्रौद्योगिकी उत्पादक राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में सहायक बनेगा। आने वाले वर्षों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार सृजित होने की संभावना है।

साणंद पहले ही ऑटोमोबाइल और विनिर्माण उद्योग का प्रमुख केंद्र रहा है। अब सेमीकंडक्टर उद्योग के आगमन से यह क्षेत्र भारत की ‘सिलिकॉन वैली’ के रूप में विकसित हो सकता है। यहां अन्य वैश्विक कंपनियों की उपस्थिति, निवेश और अनुसंधान गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे गुजरात ही नहीं बल्कि पूरे देश की औद्योगिक क्षमता में वृद्धि होगी।

वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर उद्योग रणनीतिक महत्व रखता है। कोविड महामारी और अंतरराष्ट्रीय तनावों के दौरान दुनिया ने चिप्स की कमी के दुष्प्रभावों को देखा है। ऐसे में भारत का अपना सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना आर्थिक ही नहीं, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी आवश्यक है। साणंद का ओएसएटी केंद्र इस दिशा में भारत के आत्मविश्वास और दूरदर्शी नीति का प्रतीक है।निस्संदेह, गुजरात के साणंद में स्थापित सीजी सेमी ओएसएटी सुविधा भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता, रोजगार, निर्यात वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी। यह केवल एक उद्योग की शुरुआत नहीं, बल्कि विकसित भारत के उस स्वप्न की नींव है जिसमें देश विश्व की उन्नत तकनीकी शक्तियों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा दिखाई देगा।