समाज सुधार का समय: नशामुक्त युवा, मर्यादित संस्कृति और अपराधमुक्त हरियाणा

A Time for Social Reform: Drug-free Youth, Cultured Society, and Crime-free Haryana

डॉ. प्रियंका सौरभ

किसी भी राज्य की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा शक्ति होती है। यदि युवाओं के हाथों में शिक्षा, रोजगार, संस्कार और अवसर हों तो वही युवा राज्य और राष्ट्र को नई ऊँचाइयों तक ले जाते हैं। लेकिन यदि उन्हीं युवाओं के हाथों में नशा, अपराध और भटकाव आ जाए तो वही शक्ति समाज के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। आज हरियाणा सहित देश के अनेक हिस्सों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति, गैंगस्टर संस्कृति का प्रभाव, सोशल मीडिया पर अपराध का महिमामंडन और मंचीय कार्यक्रमों में बढ़ती अश्लीलता ऐसे विषय हैं जिन पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। इन समस्याओं का समाधान केवल कानून के भरोसे नहीं हो सकता, बल्कि समाज, परिवार, कलाकार, शिक्षण संस्थान और प्रशासन सभी को मिलकर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

सबसे पहली और सबसे बड़ी लड़ाई नशे के विरुद्ध होनी चाहिए। यदि नशा समाप्त हो जाए तो अपराधों का एक बड़ा कारण स्वतः समाप्त हो जाएगा। नशा केवल व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है। एक युवा जब नशे की गिरफ्त में आता है तो उसकी पढ़ाई छूटती है, स्वास्थ्य बिगड़ता है, परिवार आर्थिक संकट में घिर जाता है और धीरे-धीरे वह अपराध की दुनिया की ओर बढ़ने लगता है। अनेक बार चोरी, लूट, हिंसा और हत्या जैसे अपराधों के पीछे नशे की लत प्रमुख कारण बन जाती है। इसलिए नशामुक्त समाज केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और सामाजिक विकास का भी विषय है।

हर माता-पिता का सपना होता है कि उनका बेटा या बेटी पढ़-लिखकर सम्मानजनक जीवन जिए। कोई भी मां यह नहीं चाहती कि उसका बेटा नशे का शिकार होकर उसकी आंखों के सामने बर्बाद हो जाए। इसलिए सरकार, प्रशासन और समाज का पहला लक्ष्य यही होना चाहिए कि युवा पीढ़ी को नशे से बचाया जाए। यदि युवा सुरक्षित रहेगा तो परिवार सुरक्षित रहेगा और यदि परिवार सुरक्षित रहेगा तो समाज और राष्ट्र भी मजबूत बनेगा। ऐसी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए कि किसी घर की मां अपने बेटे की लाश देखकर न रोए और किसी पिता को अपने बेटे के भविष्य के लिए निराश न होना पड़े।

नशे के विरुद्ध केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में नियमित जागरूकता अभियान चलाने होंगे। विद्यार्थियों को खेल, पुस्तकालय, सांस्कृतिक गतिविधियों और कौशल विकास से जोड़ना होगा। युवाओं को यह विश्वास दिलाना होगा कि जीवन की असली सफलता नशे में नहीं, बल्कि मेहनत, शिक्षा और अनुशासन में है। गांवों और शहरों में नशामुक्ति केंद्रों को अधिक प्रभावी बनाना होगा ताकि जो लोग नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं, उन्हें सम्मानपूर्वक मुख्यधारा में वापस लाया जा सके।

इसके साथ ही गैंगस्टर संस्कृति भी आज एक गंभीर सामाजिक चुनौती बन चुकी है। कुछ अपराधी संगठन भोले-भाले और नाबालिग बच्चों को अपने जाल में फंसाकर उनका उपयोग अपराधों में करते हैं। कम उम्र के बच्चों को आसान पैसे, महंगी गाड़ियां, हथियारों का आकर्षण और सोशल मीडिया पर प्रसिद्धि का लालच देकर अपराध की राह पर धकेल दिया जाता है। कई बार इन बच्चों को यह भी समझ नहीं होता कि वे किस दलदल में उतर रहे हैं। जब तक उन्हें वास्तविकता का एहसास होता है, तब तक उनका भविष्य, उनका परिवार और उनका जीवन संकट में पड़ चुका होता है।

सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि अपराध करने वाले बड़े लोग स्वयं पीछे रहते हैं और मासूम बच्चों को आगे कर देते हैं। अपराध का दंड अंततः उन्हीं बच्चों और उनके परिवारों को भुगतना पड़ता है। एक नाबालिग के अपराध में शामिल होने से उसका पूरा परिवार सामाजिक अपमान, आर्थिक कठिनाइयों और मानसिक पीड़ा से गुजरता है। इसलिए ऐसे अपराधी गिरोहों पर कठोर कार्रवाई समय की मांग है।

पुलिस प्रशासन लगातार अपराध नियंत्रण के लिए प्रयास करता है, लेकिन समाज का सहयोग भी उतना ही आवश्यक है। यदि किसी क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दें, यदि कोई व्यक्ति बच्चों को अपराध के लिए बहला-फुसलाकर अपने साथ जोड़ रहा हो या अवैध हथियारों और नशे का कारोबार कर रहा हो, तो उसकी सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है। अपराधियों के विरुद्ध समाज की सामूहिक जागरूकता ही सबसे प्रभावी हथियार बन सकती है।

सोशल मीडिया ने भी इस समस्या को कहीं न कहीं बढ़ाया है। आज कुछ लोग गैंगस्टरों को नायक की तरह प्रस्तुत करते हैं। उनके गानों, वीडियो और पोस्टों में अपराध को शक्ति और सम्मान का प्रतीक दिखाया जाता है। यह प्रवृत्ति युवाओं के मन पर गलत प्रभाव डालती है। आवश्यकता इस बात की है कि समाज ऐसे मिथकों को तोड़े और युवाओं को वास्तविक नायकों से परिचित कराए—वे लोग जिन्होंने शिक्षा, विज्ञान, खेल, सेना, कृषि, उद्योग और सामाजिक सेवा के माध्यम से देश का नाम रोशन किया है।

इसी प्रकार सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मंचीय आयोजनों की दिशा पर भी गंभीर चिंतन आवश्यक है। हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध रही है। यहां की रागनी, लोकगीत, सांग, लोकनृत्य और पारंपरिक कलाएं भारतीय संस्कृति की पहचान हैं। इन लोक परंपराओं में मनोरंजन के साथ-साथ नैतिक शिक्षा, सामाजिक संदेश और सांस्कृतिक गरिमा भी होती थी। लेकिन समय के साथ कुछ मंचीय कार्यक्रमों में अश्लीलता, फूहड़ता और अनावश्यक प्रदर्शन बढ़ने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

यह उचित नहीं कि परिवार के साथ देखने योग्य कार्यक्रमों में ऐसे दृश्य प्रस्तुत किए जाएं जिनसे बच्चों और किशोरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े। कलाकार समाज के प्रेरणास्रोत होते हैं। उनके शब्द, उनका पहनावा, उनकी प्रस्तुति और उनका व्यवहार लाखों लोगों तक पहुंचता है। इसलिए कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है जितनी उनकी लोकप्रियता।

हरियाणा के कलाकारों से अपेक्षा की जानी चाहिए कि वे मंच पर मर्यादा का पालन करें। मनोरंजन का अर्थ अश्लीलता नहीं होता। कला तभी महान बनती है जब वह समाज को जोड़ने, प्रेरित करने और सकारात्मक दिशा देने का कार्य करे। लोकसंस्कृति की आत्मा उसकी सादगी, संवेदनशीलता और सामाजिक चेतना में है। यदि मंच केवल उत्तेजना का माध्यम बन जाए तो वह अपनी मूल पहचान खो देता है।

जहां कहीं भी सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित हों, वहां आयोजकों की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों का पालन हो, अश्लील प्रस्तुतियों से बचा जाए, ध्वनि प्रदूषण नियंत्रित रहे और कार्यक्रम सामाजिक मर्यादा के अनुरूप हों। इससे संस्कृति भी सुरक्षित रहेगी और समाज में सकारात्मक वातावरण भी बनेगा।

हालांकि यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि किसी भी कला या सांस्कृतिक गतिविधि का मूल्यांकन संतुलित दृष्टि से होना चाहिए। सभी कलाकार या सभी मंचीय कार्यक्रम एक जैसे नहीं होते। अनेक कलाकार आज भी उत्कृष्ट लोकसंस्कृति, सामाजिक संदेश और पारिवारिक मनोरंजन को बढ़ावा दे रहे हैं। इसलिए आवश्यकता किसी पूरे वर्ग को दोषी ठहराने की नहीं, बल्कि उन प्रवृत्तियों को हतोत्साहित करने की है जो सामाजिक मर्यादाओं के विरुद्ध जाती हैं।

यदि समाज में नशा कम होगा, अपराध पर प्रभावी नियंत्रण होगा और सांस्कृतिक कार्यक्रम सकारात्मक दिशा देंगे तो युवा पीढ़ी को बेहतर वातावरण मिलेगा। इसके लिए सरकार को रोजगार के अवसर बढ़ाने होंगे, खेल सुविधाओं का विस्तार करना होगा, ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालय और खेल मैदान विकसित करने होंगे तथा युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से जोड़ना होगा। खाली समय और निराशा कई बार युवाओं को गलत रास्ते की ओर ले जाती है। सकारात्मक विकल्प उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है जितना कानून का पालन कराना।

परिवारों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। माता-पिता को बच्चों के मित्र बनना होगा। उनके व्यवहार, मित्र मंडली और डिजिटल गतिविधियों पर संवेदनशील निगरानी रखनी होगी। बच्चों के साथ संवाद बनाए रखना, उन्हें नैतिक मूल्यों की शिक्षा देना और समय-समय पर उनकी समस्याओं को समझना अपराध और नशे से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

शिक्षकों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। विद्यालय केवल परीक्षा पास कराने का माध्यम नहीं हैं। वे चरित्र निर्माण के केंद्र हैं। यदि शिक्षक विद्यार्थियों में अनुशासन, संवेदनशीलता, देशभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व का भाव विकसित करें तो आने वाली पीढ़ी अधिक जागरूक और जिम्मेदार बन सकती है।

मीडिया और मनोरंजन जगत को भी आत्ममंथन करना होगा। समाज वही अधिक देखता और अपनाता है जिसे बार-बार प्रस्तुत किया जाता है। यदि सकारात्मक उदाहरणों को अधिक स्थान मिलेगा, तो युवा भी उसी दिशा में प्रेरित होंगे। यदि अपराधियों का महिमामंडन कम होगा और मेहनतकश, ईमानदार तथा सफल व्यक्तियों की कहानियां अधिक सामने आएंगी, तो समाज का वातावरण भी बदलेगा।

हरियाणा ने देश को सैनिक, खिलाड़ी, वैज्ञानिक, किसान, खिलाड़ी, प्रशासनिक अधिकारी और अनेक प्रतिभाशाली नागरिक दिए हैं। यह प्रदेश अपनी मेहनत, साहस और सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाता है। इसलिए आवश्यक है कि उसकी नई पीढ़ी भी उसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाए। इसके लिए नशे, अपराध और सामाजिक विकृतियों के विरुद्ध व्यापक जनजागरण अभियान चलाना समय की आवश्यकता है।

समाज तभी आगे बढ़ता है जब वह समस्याओं को पहचानकर उनके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास करे। यदि हम सचमुच चाहते हैं कि हर घर में खुशहाली हो, किसी मां की आंख अपने बेटे के लिए न रोए, कोई मासूम अपराध की दुनिया में न धकेला जाए और हमारी संस्कृति अपनी गरिमा के साथ आगे बढ़े, तो हमें आज ही संकल्प लेना होगा। नशे के विरुद्ध निर्णायक संघर्ष, गैंगस्टर नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई, बच्चों की सुरक्षा, सांस्कृतिक मर्यादा का सम्मान और सकारात्मक सामाजिक वातावरण—यही वह मार्ग है जो हरियाणा ही नहीं, पूरे देश के उज्ज्वल भविष्य का आधार बन सकता है।