अशोक भाटिया
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन द्वारा 17 अगस्त 2026 को घोषित की गई 65 सदस्यीय नई राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची केवल एक नियमित प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि यह देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी द्वारा भविष्य के चुनावी समर के लिए बिछाई गई एक रणनीतिक बिसात है। जनवरी 2026 में 45 वर्ष की आयु में पार्टी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्षों में से एक के रूप में कमान संभालने वाले नितिन नबीन ने सात महीनों के गहन मंथन के बाद अपनी इस नई कोर टीम को सार्वजनिक किया है। यह नई सूची स्पष्ट रूप से संकेत देती है कि पार्टी संगठन का यह महा-रीसेट आगामी राज्य विधानसभा चुनावों (विशेषकर 2027 की शुरुआत में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव) और लंबी अवधि में 2029 के लोकसभा चुनाव के रोडमैप को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इस व्यापक सांगठनिक पुनर्गठन के केंद्र में अनुभव, युवा ऊर्जा, क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व यानी सोशल इंजीनियरिंग के बीच एक बारीक संतुलन बनाने का प्रयास साफ दिखाई देता है।
नितिन नबीन की इस नई टीम का सबसे पहला और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें एक तरफ जहां युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई है, वहीं दूसरी तरफ सांगठनिक अनुभव की निरंतरता को भी अक्षुण्ण रखा गया है। भाजपा की संगठनात्मक परंपरा में यह देखा गया है कि जब भी कोई नया अध्यक्ष आता है, वह अपनी टीम में कुछ मौलिक बदलाव जरूर करता है, लेकिन इस सूची में यह बदलाव बेहद सधे हुए तरीके से किया गया है। इस निरंतरता का सबसे बड़ा प्रतीक बी. एल. संतोष को राष्ट्रीय संगठन महामंत्री के पद पर बरकरार रखना है, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और पार्टी के बीच समन्वय का मुख्य सेतु होते हैं। संतोष का इस पद पर बने रहना यह दर्शाता है कि पार्टी वैचारिक और सांगठनिक स्तर पर किसी बड़े झटके के बजाय एक सहज संक्रमण चाहती है। उनके साथ ही शिवप्रकाश और सौदान सिंह को राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री के रूप में बनाए रखना भी इसी निरंतरता की रणनीति का हिस्सा है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय महासचिवों की सूची में विनोद तावड़े और सुनील बंसल जैसे कद्दावर संगठनात्मक चेहरों को बनाए रखा गया है। सुनील बंसल, जिन्होंने उत्तर प्रदेश में भाजपा के सांगठनिक ढांचे को खड़ा करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी, और विनोद तावड़े, जो लगातार विभिन्न राज्यों में चुनावी प्रबंधन देख रहे हैं, दोनों का बरकरार रहना यह साबित करता है कि भाजपा अपने चुनावी और सांगठनिक ‘वार रूम’ के मुख्य रणनीतिकारों को बदलने का जोखिम नहीं उठाना चाहती।
इस नई सूची में सबसे अधिक चर्चा पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और वरिष्ठ नेता राम माधव की सांगठनिक मुख्यधारा में वापसी को लेकर हो रही है, जो भाजपा की उस रणनीति को रेखांकित करता है जिसके तहत उन नेताओं को संगठन में बड़ी भूमिका दी जाती है जो राष्ट्रीय स्तर पर आक्रामक वैचारिक और राजनीतिक विमर्श तय करने की क्षमता रखते हैं। स्मृति ईरानी को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया है और उन्हें सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश का प्रभार सौंपा गया है, जहां 2027 की शुरुआत में बेहद महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। पिछले कुछ आन्तरिक आकलनों के बाद पार्टी उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ को ढीला नहीं होने देना चाहती और स्मृति ईरानी की आक्रामक छवि को देखते हुए उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी दी गई है ताकि वे संगठन में नई ऊर्जा का संचार कर सकें। दूसरी ओर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले राम माधव को इस बार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जिन्हें वैचारिक और रणनीतिक मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है, विशेषकर जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्व के राज्यों में उनके काम का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद मजबूत रहा है। उनकी वापसी यह संकेत देती है कि भाजपा अपने पुराने और परखे हुए रणनीतिकारों को फिर से केंद्रीय भूमिका में ला रही है ताकि वैचारिक मोर्चे और गठबंधन की राजनीति को अधिक मजबूती दी जा सके। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पार्टी का नया राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जो पार्टी के दीर्घकालिक वित्तीय नियोजन और सांगठनिक स्थिरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।
नितिन नबीन की 65 सदस्यीय इस नई टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, 8 राष्ट्रीय महासचिव और 16 राष्ट्रीय सचिव शामिल हैं, जिनमें भौगोलिक और प्रांतीय वितरण का विशेष ध्यान रखा गया है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर बरकरार रखा गया है, जबकि राजस्थान से ही आने वाले सतीश पूनिया को राष्ट्रीय महासचिव और राजेश मंगल को राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष बनाया गया है, जो यह दर्शाता है कि पार्टी आंतरिक गुटबाजी को समाप्त कर सभी धड़ों को एक साथ लेकर चलने का संदेश दे रही है। बिहार से सिद्धार्थ शंभू को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है, जबकि ऋतुराज सिन्हा को विभिन्न पार्टी इकाइयों का सह-समन्वयक नियुक्त किया गया है, क्योंकि बिहार में हाल के वर्षों में बदलते राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए सांगठनिक पकड़ मजबूत करना नितिन नबीन के लिए एक व्यक्तिगत और राजनीतिक प्राथमिकता भी है, जो स्वयं बिहार से पांच बार के विधायक हैं। इसी प्रकार, पश्चिम बंगाल से डॉ. मधुचंद्र कार को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और मनोज तिग्गा को राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। पंजाब से पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जो यह स्पष्ट करता है कि भाजपा पंजाब में सिख और गैर-सिख दोनों समुदायों के बीच एक गंभीर स्वीकार्यता बनाने का प्रयास कर रही है, जबकि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को भी उपाध्यक्ष मंडल में शामिल कर पहाड़ी राज्यों को प्रतिनिधित्व दिया गया है।
भाजपा की चुनावी सफलता का एक बड़ा आधार उसका सामाजिक समीकरण यानी सोशल इंजीनियरिंग और उसके विभिन्न मोर्चे रहे हैं, जो समाज के अलग-अलग वर्गों तक सीधे पैठ बनाते हैं, और इस बार नितिन नबीन ने सभी प्रमुख सातों मोर्चों के अध्यक्षों की घोषणा करते हुए सामाजिक प्रतिनिधित्व के नियमों का कड़ाई से पालन किया है। युवा मोर्चा की कमान डॉ. हेमंत जोशी को सौंपी गई है, जबकि महिला मोर्चा की अध्यक्षता श्रीमती रूप कुमारी चौधरी को दी गई है जो महिला मतदाताओं को पार्टी से जोड़े रखने का मुख्य दायित्व संभालेंगी। पिछड़े वर्ग के बड़े सामाजिक आधार को पार्टी के साथ बनाए रखने के लिए ओबीसी मोर्चा का अध्यक्ष श्री अमरपाल मौर्य को बनाया गया है, और ग्रामीण तथा कृषि अर्थव्यवस्था से जुड़े मतदाताओं के बीच संवाद स्थापित करने के लिए किसान मोर्चा की जिम्मेदारी श्री बंसीलाल गुर्जर को दी गई है। दलित और आदिवासी समुदायों के बीच सांगठनिक विस्तार को गति देने के लिए अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष के रूप में श्री शिवेश कुमार राम और अनुसूचित जनजाति मोर्चा के अध्यक्ष के रूप में डॉ. मन्नालाल रावत की नियुक्ति की गई है, जबकि अल्पसंख्यक समुदाय के बीच संवाद कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए अल्पसंख्यक मोर्चा का अध्यक्ष श्री कुंवर बासित अली को बनाया गया है। खासकर ओबीसी और एससी चेहरों को आगे करके पार्टी ने विपक्षी दलों के सामाजिक न्याय के नैरेटिव का मुकाबला करने के लिए अपनी सांगठनिक ढाल तैयार की है। इसके अलावा, पूरी कार्यकारिणी में करीब 12 महिलाओं को सीधे तौर पर पदाधिकारी सूची में स्थान दिया गया है, जिनमें रेखा वर्मा, डॉ. भारती प्रविण पवार और वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोषी जैसी नेत्रियों को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसी अहम कुर्सियां सौंपी गई हैं, जो इस बात का संकेत है कि पार्टी सांगठनिक स्तर पर भी महिला प्रतिनिधित्व को गहरा कर रही है।
आज के दौर में कोई भी चुनाव केवल जमीन पर नहीं, बल्कि डिजिटल और सोशल मीडिया के स्क्रीन पर भी लड़ा और जीता जाता है, और इस हकीकत को समझते हुए भाजपा ने अपने संचार तंत्र में भी दो महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं। छत्तीसगढ़ के दीपक म्हस्के को नया राष्ट्रीय सोशल मीडिया संयोजक बनाया गया है, जो यह संकेत देता है कि पार्टी अपने डिजिटल नैरेटिव को एक नया रूप देना चाहती है जो नए दौर के युवाओं की भाषा के अनुकूल हो। वहीं, मुख्यधारा के मीडिया और समाचार चैनलों के साथ बेहतर समन्वय के लिए अनुभवी सांसद अनिल बलूनी को मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है, जिनका पुराना अनुभव मीडिया प्रबंधन को और अधिक पेशेवर बनाएगा। इसके साथ ही, एक बेहद दिलचस्प नियुक्ति दिल्ली से डॉ. संदीप पाठक की राष्ट्रीय सचिव के रूप में हुई है, जो पूर्व में आम आदमी पार्टी की सांगठनिक जड़ों से जुड़े रहे हैं, और उनका भाजपा के राष्ट्रीय ढांचे में सचिव बनना यह दिखाता है कि पार्टी दूसरी पार्टियों के सांगठनिक रणनीतिकारों की क्षमताओं का उपयोग अपने विस्तार के लिए करने से हिचक नहीं रही है।
संक्षेप में कहा जाए तो, भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन की यह नई राष्ट्रीय टीम स्पष्ट रूप से मिशन मोड में काम करने के लिए बनाई गई है और इस सूची के आने के बाद यह कयास पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं कि पार्टी केवल तात्कालिक सांगठनिक आवश्यकताओं से निपट रही है। इसके विपरीत, यह साफ है कि भाजपा ने अपनी सांगठनिक संरचना को इस तरह से कसा है कि वह अगले दो से तीन साल तक होने वाले सभी विधानसभा चुनावों और अंततः 2029 की बड़ी लड़ाई के लिए एक अभेद्य किला तैयार कर सके। स्मृति ईरानी की उत्तर प्रदेश में तैनाती, राम माधव की राष्ट्रीय पटल पर वापसी, सातों मोर्चों का नया नेतृत्व, और सोशल मीडिया विंग का पुनर्गठन—ये सभी कड़ियाँ मिलकर एक बड़े राजनीतिक कैनवास का निर्माण करती हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नई सांगठनिक मशीनरी जमीन पर उतरकर विपक्षी गुटों के नैरेटिव को कितनी कुशलता से काउंटर करती है, लेकिन एक बात तय है कि भाजपा ने अपनी तरफ से चुनावी बिसात बिछा दी है और अपने सेनापतियों को उनकी युद्धभूमि सौंप दी है।





