तन से मन तक: भागती-दौड़ती जिंदगी को ठहराव देता योग

From Body to Mind: Yoga Brings Stillness to a Hectic Life

दिलीप कुमार पाठक

आज की सुबह कुछ अलग है। उगते सूरज की हल्की लालिमा सिर्फ आसमान को ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के करोड़ों लोगों के चेहरों को भी नई चमक दे रही है। पार्कों में, छतों पर, लिविंग रूम में और समंदर के किनारों पर लाखों लोग अपनी योग मैट बिछाए गहरी सांसें ले रहे हैं। हर साल 21 जून को जब दुनिया ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ मनाती है, तो वह केवल कुछ शारीरिक कसरतों का प्रदर्शन नहीं कर रही होती। असल में, वह अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक सामूहिक उत्सव मना रही होती है। योग किसी मजहब, देश या संस्कृति की बपौती नहीं है। यह इंसान को खुद से जोड़ने का एक बेहद सीधा और सच्चा रास्ता है।

आज की तारीख में हमारी सबसे बड़ी समस्या क्या है? पैसा? सुख-सुविधाएं? नहीं, आज हमारे पास सब कुछ है, बस एक ‘चैन की सांस’ नहीं है। सुबह अलार्म की चीख से शुरू होने वाला दिन, रात को मोबाइल स्क्रीन स्क्रॉल करते हुए थकान के साथ खत्म होता है। हम हर वक्त किसी न किसी अंधी दौड़ में भाग रहे हैं। इस भागदौड़ का सीधा असर शरीर और दिमाग पर पड़ रहा है। ब्लड प्रेशर, एंग्जायटी, डिप्रेशन और पीठ का दर्द आम बात हो चुके हैं। इसी मोड़ पर आकर हमें योग की सबसे ज्यादा जरूरत महसूस होती है। योग हमें दौड़ना छोड़ने के लिए नहीं कहता, वह बस हमें दौड़ के बीच रुककर सही तरीके से सांस लेना सिखाता है। बीमार शरीर और अशांत मन के साथ सफलता की कोई इमारत खड़ी नहीं की जा सकती।जब हम योग मैट पर बैठकर आंखें बंद करते हैं और गहरी सांस भीतर खींचते हैं, तो शरीर के भीतर एक मौन क्रांति शुरू होती है।

योग का प्रभाव केवल मांसपेशियों को लचीला बनाने तक सीमित नहीं है। इसका असली जादू नर्वस सिस्टम पर होता है। प्राणायाम के जरिए जब फेफड़ों में भरपूर ऑक्सीजन पहुंचती है, तो दिमाग की नसें शांत होने लगती हैं। तनाव पैदा करने वाला कोर्टिसोल हार्मोन घटने लगता है और मन में एक ठहराव महसूस होता है। योग का असर सिर्फ एक घंटे के अभ्यास तक नहीं रहता, बल्कि यह पूरे दिन व्यवहार में झलकता है। यह हमें सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में घबराने की बजाय शांत रहकर सही फैसला कैसे लिया जाए। शारीरिक और मानसिक उपयोगिता के मामले में योग एक बेहतरीन टूल है। जिम जाने के लिए भारी-भरकम मशीनें चाहिए, लेकिन योग के लिए सिर्फ आपका शरीर और थोड़ी सी जगह काफी है। कुछ ऐसे बुनियादी आसन हैं जो हर किसी को रोज करने ही चाहिए। जैसे ‘ताड़ासन’, जो हमारी रीढ़ की हड्डी को सीधा और मजबूत रखता है। कंप्यूटर के सामने लगातार बैठने वालों के लिए ‘भुजंगासन’ वरदान है, जो पीठ दर्द को जड़ से खत्म करता है। शरीर के लचीलेपन के लिए ‘पश्चिमोत्तानासन’ और मानसिक शांति व थकान मिटाने के लिए ‘शवासन’ का अभ्यास हर उम्र के व्यक्ति के लिए जरूरी है। इसके साथ ही ‘अनुलोम-विलोम’ प्राणायाम हमारे श्वसन तंत्र को इतना मजबूत कर देता है कि मौसमी बीमारियां आस-पास भी नहीं फटकतीं। यह बिना किसी खर्च के मिलने वाली स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी है, जिसका प्रीमियम सिर्फ इच्छाशक्ति है। योग की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यह केवल शरीर को मोड़ने की कला नहीं, बल्कि खुद को अंदर से जोड़ने का विज्ञान है। जब आप लगातार अभ्यास करते हैं, तो महसूस होने लगता है कि आप अपने गुस्से, लालच और चिंताओं से बहुत बड़े हैं। योग हमें वर्तमान पल में जीना सिखाता है। इस योग दिवस पर हमें किसी कठिन आसन की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने की होड़ से बचना चाहिए। इसके बजाय, यह संकल्प लें कि हम हर दिन कम से कम पंद्रह मिनट अपने लिए निकालेंगे। योग मैट पर बिताए गए वे पंद्रह मिनट चौबीस घंटे की जिंदगी को खूबसूरत बना देंगे। आइए, इस योग दिवस पर शरीर के साथ विचारों को भी थोड़ा लचीला बनाएं और खुलकर जिंदगी का आनंद लें।