गोपेन्द्र नाथ भट्ट
पश्चिमी राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में स्थित एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी में सोमवार को लगी भीषण आग ने न केवल एक बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट को झटका दिया है,बल्कि सुरक्षा प्रबंधन और आपदा तैयारी को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। इस घटना के चलते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का प्रस्तावित दौरा भी रद्द करना पड़ा,जिससे पूरे आयोजन की दिशा अचानक बदल गई। बताते है कि अब रिफाइनरी को ठीक होने में चार महीनों से अधिक समय लग जाएगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बताया कि दुर्घटना के आदेश दे दिए गए है। इसके निर्माण और संचालन से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच के बाद ही दुर्घटना के कारणों का पता चलेगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मंगलवार को पचपदरा का दौरा भी करेंगे। उनके साथ प्रदेश के मुख्यसचिव एस श्रीनिवास भी रहेंगे।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पचपदरा रिफाइनरी परिसर की यूनिट्स में तकनीकी खराबी आने के कारण आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और धुएं के घने गुबार दूर-दूर तक दिखाई देने लगे। बताते है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिस यूनिट में उद्घाटन करने वाले थे उसी यूनिट में आग लगी। दमकल विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। दुर्घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं हैं।
इस घटना ने सबसे बड़ा असर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्तावित उद्घाटन कार्यक्रम पर डाला। सुरक्षा कारणों और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री का दौरा रद्द कर दिया गया। केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी आधिकारिक रूप से इसकी सूचना दी। यह निर्णय भले ही एहतियात के तौर पर लिया गया हो, लेकिन इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि स्थिति सामान्य नहीं थी और जोखिम का स्तर उच्च था। किसी भी बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम से पहले इस प्रकार की घटना होना चिंताजनक है और इसकी गहन जांच आवश्यक है। हालांकि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने कहा है कि दुर्घटना की जांच के आदेश कर दिए है।
पचपदरा रिफाइनरी देश की एक महत्वपूर्ण ऊर्जा परियोजना मानी जाती है, जिसमें लगभग 80 हजार करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। इसका उद्देश्य न केवल पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन करना है, बल्कि पश्चिमी राजस्थान में औद्योगिक विकास को गति देना भी है। ऐसे में इस प्रकार की दुर्घटना का होना दुर्भाग्यपूर्ण है। साथ ही परियोजना के सुरक्षा मानकों के लिए चिंताजनक है। औद्योगिक क्षेत्रों में आग जैसी घटनाएं नई नहीं हैं, लेकिन हर घटना हमें सुरक्षा प्रबंधन की कमजोरियों की याद दिलाती है। रिफाइनरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली, नियमित ऑडिट, कर्मचारियों का प्रशिक्षण और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र बेहद मजबूत होना चाहिए। यदि इन व्यवस्थाओं में कहीं भी कमी रह जाती है, तो उसका परिणाम इसी प्रकार की गंभीर घटनाओं के रूप में सामने आता है। इस घटना के बाद राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों ने जांच के आदेश दे दिए हैं। दोषियों की पहचान और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। साथ ही,यह भी जरूरी है कि सुरक्षा मानकों को और अधिक कड़ा किया जाए और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रोटोकॉल को पूरी सख्ती से लागू किया जाए।
सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी इस घटना का प्रभाव पड़ा है। स्थानीय लोगों में भय और असुरक्षा की भावना पैदा हुई है, वहीं परियोजना से जुड़े श्रमिकों और उनके परिवारों में चिंता बढ़ी है। यह जरूरी है कि प्रशासन पारदर्शिता के साथ स्थिति को स्पष्ट करे और प्रभावित लोगों को उचित सहायता प्रदान करे। भरोसा बहाल करना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी इस आग का असर कम नहीं है। धुएं और रासायनिक उत्सर्जन से आसपास के क्षेत्र की वायु गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए पर्यावरणीय आकलन कराना और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाना भी अनिवार्य है। दीर्घकालीन प्रभावों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक अध्ययन किया जाना चाहिए।
राजनीतिक दृष्टि से यह घटना सरकार के लिए एक चुनौती बनकर उभरी है। एक ओर जहां यह परियोजना विकास का प्रतीक मानी जा रही थी, वहीं इस दुर्घटना ने उसकी तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष द्वारा भी इस मुद्दे को उठाया जाना स्वाभाविक है, लेकिन इस समय आवश्यकता आरोप-प्रत्यारोप से अधिक समाधान और सुधार की है।
अतःपचपदरा रिफाइनरी में लगी आग एक चेतावनी है कि विकास के साथ सुरक्षा को कभी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दौरा रद्द होना इस बात का संकेत है कि स्थिति गंभीर थी और एहतियात जरूरी था। अब समय है कि इस घटना से सबक लेते हुए सुरक्षा मानकों को मजबूत किया जाए, जवाबदेही तय की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। विकास की राह पर आगे बढ़ते हुए सुरक्षा और विश्वसनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता देना ही सच्चे अर्थों में प्रगति का संकेत होगा।





