आईपीएस शंकर चौधरी: रक्षक बना भक्षक

IPS Shankar Choudhary: Protector turned predator

इंद्र वशिष्ठ

विवादित आईपीएस अफसर एवं दिल्ली के द्वारका जिले के पूर्व डीसीपी शंकर चौधरी के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। शंकर चौधरी पर विदेशी नागरिक को गैर कानूनी तरीके से बंधक बनाकर 35 लाख रुपये वसूलने का सनसनीखेज आरोप है।

एफआईआर दो साल बाद दर्ज-
29 नवंबर 2023 को दक्षिण पश्चिम जिले के पालम थाना इलाके से नाइजीरिया की एक महिला ने दिल्ली पुलिस कंट्रोल रूम पर फोन कर मिजोरम पुलिस में तैनात आईपीएस शंकर चौधरी के इस अपराध की जानकारी दी थी। जिस पर दिल्ली पुलिस ने दो साल बाद अब 5 फरवरी 2026 को एफआईआर दर्ज की है।

35 लाख हड़प लिए- महिला ने पीसीआर को फोन कर आरोप लगाया कि मिजोरम पुलिस उसके भाई हैरीसन को घर से उठा ले गई। पुलिस घर से 35 लाख रुपए भी ले गई। पुलिस अब बीस लाख रुपये और मांग रही है। महिला ने अवैध हिरासत और जबरन वसूली के इस मामले में शामिल आईपीएस शंकर चौधरी का नाम पुलिस को बताया था।

दिल्ली पुलिसकर्मी भी शामिल-
उस समय मिजोरम पुलिस में एसपी (नारकोटिक्स) के पद पर तैनात शंकर चौधरी अपनी छुट्टियां खत्म होने के बाद भी बिना अनुमति के दिल्ली में मौजूद थे। आईपीएस शंकर चौधरी ने दिल्ली पुलिस में मौजूद अपने कुछ खास पुलिसकर्मियों के साथ गैर कानूनी तरीके से हैरीसन के घर 26 नवंबर 2023 को छापा मारा। हैरीसन को अवैध रूप से वसंत विहार स्थित मिजोरम हाऊस में बंधक बनाकर रखा गया। हैरीसन को उसकी बहन द्वारा पीसीआर पर फोन करने के बाद छोड़ दिया गया।

एफआईआर दर्ज- 22 जुलाई 2025 को गृह मंत्रालय के निर्देश पर दिल्ली पुलिस के दक्षिण रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त संजय कुमार जैन ने इस मामले की जांच की। संयुक्त पुलिस आयुक्त संजय जैन की शिकायत पर 5 फरवरी 2026 को इस मामले में दिल्ली पुलिस की विजिलेंस यूनिट ने आईपीएस शंकर चौधरी के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज किया है। आईपीएस शंकर चौधरी के ख़िलाफ़ जानबूझ कर नुकसान पहुंचाने के इरादे से किसी को गैरकानूनी तरीके से रोकने, बंधक बनाने और जब्त संपत्ति का गबन करने के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 166/341/342/409 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। उनके साथ इस गैर कानूनी मामले में शामिल दिल्ली पुलिस के हवलदार शालूज, हवलदार विकास और हवलदार प्रशांत के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

हैरिसन को 26 से 29 नवंबर तक मिजोरम हाउस में रखा गया, लेकिन इस दौरान न तो कोई गिरफ्तारी मेमो बनाया गया, न अदालत में पेश किया गया और न ही कोई कानूनी आदेश मौजूद था। जांच में यह भी सामने आया कि शंकर चौधरी ने 21 से 29 नवंबर के बीच बिना किसी कानूनी अनुमति के डाबरी-बिंदापुर इलाके में खुद छापेमारी का नेतृत्व किया। दिल्ली पुलिस के 13 अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए हैं, जिन्होंने पुष्टि की कि ये कार्रवाई शंकर चौधरी के निर्देश पर हुई।

शंकर चौधरी की करतूतें —-
दिल्ली पुलिस के द्वारका जिले के डीसीपी पद से शंकर चौधरी को 4 जून 2022 को हटाया गया था। डीसीपी पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने एक महिला के सिर पर गिलास मार दिया। महिला के सिर में तीन टांके लगे थे। लेकिन पुलिस ने डीसीपी शंकर चौधरी के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं की ।

डीसीपी ने मारा- शुक्रवार तीन जून 2022 की रात करीब तीन बजे महिला के पति ने पुलिस कंट्रोल रुम को फोन कर इस मामले की शिकायत की। महिला के पति ने पीसीआर को बताया कि ‘द्वारका जिले के डीसीपी शंकर चौधरी ने शराब पीकर मेरी पत्नी के सिर पर गिलास मार दिया है डीसीपी किसी ओर से झगड़ा कर रहे थे, गिलास मेरी पत्नी के लग गया’। पीसीआर ने यह सूचना दक्षिण जिला के ग्रेटर कैलाश थाने के रोजनामचे (जनरल डायरी) में दर्ज कराई है। लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की गई। घटना कैलाश कालोनी के ‘अनकल्चरड’ कैफे एंड बार में हुई। रियल एस्टेट बिजनेसमैन द्वारा आयोजित जन्मदिन की पार्टी में यह सब हुआ। डीसीपी शंकर चौधरी ने हंगामा किया और गिलास फेंके।

पहले भी हटाया- शंकर चौधरी जब लाजपत नगर में एसीपी थे तब भी उन्हें आरोपों के कारण ही हटाया गया था। आरोप इतने गंभीर थे कि शंकर चौधरी को हटाने का आदेश वायरलेस पर दिया गया था।

पुलिस प्रवक्ता का बयान –
महिला को गिलास मारने के मामले में पुलिस प्रवक्ता ने बयान दिया था कि ग्रेटर कैलाश में 4 जून की तड़के एक पीसीआर कॉल प्राप्त हुई थी जिसमें यह उल्लेख किया गया था कि दिल्ली पुलिस के डीसीपी रैंक के एक अधिकारी ने एक निजी क्लब में जन्मदिन की पार्टी में एक महिला के साथ मारपीट की है। इसके बाद पीड़िता का एक वीडियो क्लिप प्राप्त हुआ जिसमें उसने कहा कि वह अपने परिवार के साथ परिवार के एक सदस्य की जन्मदिन की पार्टी मना रही थी। संबंधित अधिकारी भी अपने परिवार के साथ मौजूद थे। समारोह के दौरान एक गिलास महिला पर गिरा और वह घायल हो गई। इस पर महिला का पति भड़क गया, क्योंकि उस समय पार्टी में एक व्यक्ति गिलास से खेल रहा था। गलतफहमी के चलते डीसीपी का नाम चर्चा में आ गया। पारिवारिक मामला होने के कारण मामला सुलझ गया है।

पुलिस की भूमिका पर सवालिया निशान-
पुलिस प्रवक्ता का यह बयान बड़ा ही हास्यास्पद है। पुलिस प्रवक्ता का यह बयान वारदात की सूचना मिलने के ग्यारह घंटे बाद यानी शनिवार दोपहर एक बजे के बाद आया था। अगर पुलिस प्रवक्ता के बयान को सही मान लिया जाए, तो सवाल उठता है कि पुलिस द्वारा महिला के पति के खिलाफ झूठी जानकारी देने के आरोप में धारा 182 के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की गई। महिला के पति के खिलाफ ऐसा न करने से इस बात को बल मिलता है कि डीसीपी को बचाने के लिए मामला रफा दफा किया गया है।

पुलिस ने कुछ नहीं किया-
पुलिस को तुरंत घटनास्थल पर पहुंच कर पार्टी में मौजद सभी लोगों और बॉर के स्टाफ आदि के बयान दर्ज करने चाहिए थे। बॉर में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच की या फुटेज जब्त करनी चाहिए थी । सबसे अहम बात पुलिस को तुरंत आरोपी डीसीपी शंकर चौधरी की मेडिकल जांच करानी चाहिए थी। जिससे यह पता चलता कि डीसीपी नशे में था या नहीं। वह गिलास जब्त करना था , जिससे महिला घायल हुई। उस गिलास पर उंगलियों के निशान की जांच से ही साफ हो सकता था कि डीसीपी ने मारा या किसी अन्य से वाकई गिलास गिरा।

हवाबाज डीसीपी- वैसे आईपीएस शंकर चौधरी की कार्यशैली, हाव भाव आईपीएस के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं लगते है। उनकी हरकतों में बचपना/ छिछोरापन/ हवाबाजी झलकती है इसका अंदाजा एक मामले से ही लगाया जा सकता है साल 2021 में द्वारका जिले में एक व्यक्ति ने पारिवारिक झगड़े में अपनी ताई की हत्या कर दी थी।

प्रचार बहादुर अफसर – करवा चौथ के दिन आरोपी की पत्नी ने खुद पीसीआर को फोन किया और बताया कि उसका पति घर में मौजूद है और वह आत्म समर्पण करना चाहता है। अब ऐसे में होना तो यह चाहिए था कि एसएचओ जाकर उसे वहां से गिरफ्तार कर लाता। लेकिन तत्कालीन डीसीपी शंकर चौधरी खुद उस घर में गए और आत्म समर्पण करने वाले आरोपी को खुद गर्दन से पकड़ कर, ऐसे घर से बाहर लाए, जैसे उन्होंने किसी खूंखार अपराधी को बड़ी मुश्किल से पकड़ा है। डीसीपी ने ऐसा करके यह दिखाना चाहा जैसे कि उन्होंने कोई बहुत बहादुरी का काम किया है। इसे आईपीएस की सिर्फ़ प्रचार की भूख ही कहा जा सकता है।

(इंद्र वशिष्ठ दिल्ली में 1989 से पत्रकारिता कर रहे हैं। दैनिक भास्कर में विशेष संवाददाता और सांध्य टाइम्स (टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप) में वरिष्ठ संवाददाता रहे हैं।)