सुप्रीम कोर्ट का राजस्थानी भाषा पर दिया फैसला ऐतिहासिक

The Supreme Court's decision on Rajasthani language is historic

दिल्ली में प्रवासी राजस्थानियों में हर्ष और उत्साह की लहर

जी एन भट्ट

नई दिल्ली/जयपुर : राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में अप्रवासी राजस्थानी संस्थाओं ने राजस्थानी भाषा को लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फ़ैसले को ऐतिहासिक बताते हुए उसका स्वागत किया है और कहा है कि यह अभूतपूर्व फैसले ने करोड़ों राजस्थानियों की भावनाओं और उनके दिलों को जीत लिया है।

राजस्थान रत्नाकर के चेयरमैन राजेन्द्र गुप्ता ने कहा है कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा राजस्थान सरकार को सरकारी और निजी विद्यालयों में राजस्थानी भाषा की एक विषय के रूप में पढ़ाई शुरू कराने तथा इसे चरणबद्ध रूप में स्कूलों और उच्च शिक्षा में लागू करने की नीति बनाने के निर्देश देकर राजस्थान भाषा को मान्यता प्रदान करने की वर्षों पुरानी मांग को प्रशस्त किया है। संस्था के प्रधान सुमित गुटा ने कहा कि यह निर्णय संविधान की भावना के अनुरूप बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए राज्यों की जिम्मेदारी तय करने वाला तथा भारत सरकार की नई शिक्षा नीति के अनुरूप है।

राजस्थान फाउंडेशन के दिल्ली चेप्टर के अध्यक्ष सीए रामावतार किला ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि राजस्थानी भाषा की मिठास अब शिक्षा के मंदिरों में भी फैलगी यह खुशी का विषय है ।

राजस्थान संस्था संघ के अध्यक्ष नवरतन अग्रवाल बीकानेरवाला और उपाध्यक्ष के के नरेड़ा ने पदम मेहता और प्रो.कल्याण सिंह शेखावत के प्रति भी अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहा कि इनकी पहल से राजस्थानी भाषा को अपना अधिकार मिलने जा रहा है। साथ ही राजस्थानीभाषा का मान-सम्मान और अधिक बढ़ेगा।

राजस्थानी अकादमी के अध्यक्ष डॉ गौरव गुप्ता और सचिव सुमन माहेश्वरी ने सुप्रीम कोर्ट की झंड पीठ के दोनों माननीय न्यायाधीशों और सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर करने वाले दोनों याचिका कर्ताओं दैनिक जलते दीप और राजस्थानी मासिक पत्रिका माणक के प्रधान संपादक पदम मेहता और राजस्थानी भाषा विशेषज्ञ प्रो.कल्याण सिंह शेखावत के साथ ही इस केस की पैरवी करने वाले वकील मनीष सिंघवी के प्रति भी आभार जताया है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक फैसले ने देश दुनिया में 10 करोड़ से भी अधिक लोगों द्वारा बोली जाने वाली राजस्थानी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने का मार्ग आसान कर दिया है।

राजस्थान कल्याण परिषद नोएडा के मनमोहन रामावत ने कहा कि भारत सरकार की नई शिक्षा नीति के अनुरूप राजस्थानी जैसी समृद्ध भाषा को शिक्षा व्यवस्था में बहुत पहले ही स्थान मिल जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू,उप राष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित देश के सभी नेता मातृ भाषा में शिक्षा के पक्षधर है। ऐसे में राजस्थानी भाषा को भी अपना हक मिलना चाहिए।

श्री रामकृष्ण सेवा संस्थान के चेयरमैन ओ पी बागला ने उच्चतम न्यायालय के इस फैसले से देश-विदेश में बसे करोड़ों राजस्थानियों में असीम खुशी का संचार हुआ है तथा यह फैसला मायड़ भाषा प्रेमियों के सपनों को सच करने जैसा है। साथ ही इसे राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने की दिशा में एक और कदम भी माना जा सकता है।

राजस्थानी सेवा समिति के प्रकाश बिहानी और संतोष बिहान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले ने राजस्थानी भाषा को कानूनी समर्थन देकर संवैधानिक मान्यता का मार्ग खोल दिया है। इस फैसले से मायड़ भाषा के प्रेमियों के दिलों में अपार खुशी का संचार हुआ है।

राजस्थान मित्र परिषद के डॉ एस एन चांडक , वीरेन्द्र मेहता और कनिष्क यादव ने कहा है कि इस फैसले से देश-विदेश में बसे प्रवासी राजस्थानियी की नई पीढ़ी में एक नई प्रेरणा का संचार होगा।

राजस्थान अणुव्रत के सुखराज सेठिया , टी के जैन, डॉ कुसुम लूनिया,डॉ धनपत लूनिया,शांतिलाल पटावरी ने कहा कि वर्षों बाद राजस्थानी भाषा को उसकी विरासत, कला-संस्कृति, संगीत और साहित्य की राष्ट्रीय पटल पर स्वीकार्यता बढ़ी है तथा भाषा को उसका सही मान-सम्मान मिला है। उन्होंने कहा कि जो लोग अभी तक अपने बच्चों को राजस्थानी भाषा पढ़ाने वाले स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाने से संकोच करते थे, वे अब गर्व के साथ अपने बच्चों को राजस्थानी पढ़ाने भेजेंगे। साथ ही राजस्थानी छात्र उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में राजस्थानी विषय लेकर गैर-राजस्थानी छात्रों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे।