रविवार दिल्ली नेटवर्क
गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, द्वारका, दिल्ली के यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट्स में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन (14-15 मई) का पहला दिन संपन्न हुआ, जिसका विषय था “भारतीय ज्ञान प्रणालियाँ: निरंतरता, विच्छेद और संश्लेषण”। यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट्स की प्रभारी प्रोफेसर क्वीनी प्रधान ने बताया कि इस सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न विषयों के विद्वानों, शोधकर्ताओं और छात्रों को एक साथ लाकर भारतीय ज्ञान प्रणालियों (आईकेएस) के विकसित होते क्षेत्र पर गहन चर्चा करना है।
उद्घाटन सत्र में प्रतिष्ठित विद्वानों और प्रख्यात बुद्धिजीवियों ने भाग लिया, जिनमें मुख्य अतिथि श्री सच्चिदानंद जोशी, सदस्य सचिव, आईएनजीसीए शामिल थे, जिन्होंने उद्घाटन भाषण दिया। डॉ. जोशी ने कला की सर्वव्यापकता और दैनिक जीवन की लय में ज्ञान प्रणाली को उजागर करने पर बल दिया। प्रख्यात विज्ञान इतिहासकार प्रोफेसर दीपक कुमार ने मुख्य भाषण दिया और स्वदेशी ज्ञान के सभी रूपों का सम्मान करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके अतिरिक्त, इस अवसर पर विश्वविद्यालय के उदार कला संकाय के वार्षिक समाचार पत्र ‘नवकृति’ का भी विमोचन किया गया।
उद्घाटन सत्र के बाद प्रोफेसर मधुलिका बनर्जी ने ज्ञान प्रणाली की पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था पर विशेष संबोधन दिया। सम्मेलन में भारत और विदेश के विद्वानों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया, जिन्होंने भारतीय ज्ञान प्रणालियों से संबंधित विभिन्न विषयों और उप-विषयों पर आयोजित तकनीकी सत्रों में शोध पत्र प्रस्तुत किए।





