गुरुग्रंथ साहिब में भगत जयदेव पर हुआ सेमिनार

A seminar on Bhagat Jaidev was held in Guru Granth Sahib

रविवार दिल्ली नेटवर्क

कोलकाता : पंजाबी साहित्य सभा कोलकाता तथा सिख रिसर्च इंस्टीट्यूट, अमेरिका के संयुक्त तत्वावधान में “गुरु ग्रंथ साहिब में भगत जयदेव” विषय पर खालसा इंग्लिश स्कूल के सभागार में एक सेमिनार का आयोजन किया, जिसमें भगत जयदेव के उन दो पदों का विस्तार से जिक्र किया गया जो गुरु ग्रंथ साहब में दर्ज हैं।

वरिष्ठ साहित्यकार रावेल सिंह पुष्प ने कार्यक्रम संचालन के दौरान कहा कि गुरुग्रंथ साहिब महज सिखों का धर्मग्रंथ नहीं है,ये तो सारी मानवता का ही धर्मग्रंथ है क्योंकि इसमें सिर्फ़ छह गुरुओं की वाणी ही दर्ज हैं बाकी सूफी संतों,भक्त कवियों, भाटों तथा कुछ गुरसिखों की वाणी शामिल है। सिख रिसर्च इंस्टीट्यूट से पधारे सरदार विक्रमजीत सिंह ने इंस्टीट्यूट द्वारा चलाए जा रहे गुरुग्रंथ साहिब प्रोजेक्ट की चर्चा करते हुए गुरुग्रंथ साहिब के कुछ अंगों(पृष्ठों)की विशद व्याख्या प्रस्तुत करते हुए पावर पॉइंट के माध्यम से पर्दे पर प्रस्तुति दी। उन्होंने इंस्टीट्यूट द्वारा जारी की गई वेबसाइट की भी जानकारी दी, जहां से हम गुरुग्रंथ साहिब में प्रयुक्त शब्दों, अर्थों सहित विस्तृत व्याख्या भी प्राप्त कर सकते हैं।

प्रोजेक्ट के निदेशक डॉ जसवंत सिंह ने भगत जयदेव की रचनाओं की विशेष चर्चा की कि किस तरह वे निर्गुण ब्रह्म के उपासक थे और इसी सन्दर्भ में उन्होंने गुरुग्रंथ साहिब में राज गुजरी में शामिल पद “केवल राम नाम मनोरमं” पर प्रकाश डाला। इस मौके पर प्रसिद्ध इतिहासकार सरदार जगमोहन सिंह गिल ने अपने खोजपूर्ण वक्तव्य में भगत जयदेव के भक्ति साहित्य में उनके अमूल्य योगदान को विस्तार से परिभाषित किया।उसके बाद पंजाबी के प्रतिष्ठित रंगकर्मी डॉ साहिब सिंह,भगत जय देव की वाणी के प्रचार प्रचार से जुड़े सरदार जितेंद्र सिंह चाहल,तथा सिख नारी मंच के निदेशक सरदार नरेंद्र सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

आखिर में पंजाबी साहित्य सभा के अध्यक्ष सरदार गुरदीप सिंह संघा ने विभिन्न संस्थाओं से पधारे श्रोताओं को धन्यवाद दिया। गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल भक्त कवियों पर इस तरह की चर्चा ने सभी को एक नए आस्वाद से भर दिया।