‘भारत विस्तारवाद नहीं, विकासवाद में विश्वास करता है’ : मोदी का संदेश और उसके व्यापक मायने
गोपेन्द्र नाथ भट्ट
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 6 जुलाई से 11 जुलाई 2026 तक तीन देशों इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की 6 दिवसीय विदेश यात्रा पर हैं। यह दौरा भारत के रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अपनी यात्रा के पहले पड़ाव में विश्व की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने देश का सर्वोच्च सिविल अवार्ड देकर सम्मानित किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा केवल एक द्विपक्षीय राजनयिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की बदलती वैश्विक भूमिका, ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी रणनीतिक सोच का सशक्त प्रदर्शन है। इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी का यह स्पष्ट संदेश कि “भारत विस्तारवाद में नहीं, विकासवाद में विश्वास करता है” आज की बदलती वैश्विक परिस्थितियों में विशेष महत्व रखता है। इसे केवल एक राजनीतिक वक्तव्य नहीं, बल्कि भारत की विदेश नीति के मूल दर्शन के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक मार्गों और क्षेत्रीय संतुलन को लेकर अनेक चुनौतियां सामने हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों की तरह इंडोनेशिया भी इस क्षेत्र में स्थिरता, स्वतंत्र नौवहन और नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थक है। ऐसे में भारत का यह संदेश कि उसकी प्राथमिकता विकास, साझेदारी और साझा समृद्धि है, दोनों देशों के बीच विश्वास को और मजबूत करता है।
भारत और इंडोनेशिया का संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत पर आधारित है। रामायण, महाभारत, बाली और जावा की सांस्कृतिक परंपराएं तथा प्राचीन समुद्री व्यापार दोनों देशों को ऐतिहासिक रूप से जोड़ते रहे हैं। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो द्वारा यूनेस्को विश्व धरोहर प्रांबानन मंदिर परिसर में भारत समर्थित संरक्षण परियोजना का शुभारंभ इस साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बना। इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष रणनीतिक और आर्थिक सहयोग का विस्तार रहा। दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, स्वास्थ्य, डिजिटल प्रौद्योगिकी तथा बंदरगाह विकास सहित अनेक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। दोनों नेताओं ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने का संकल्प दोहराया। विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग और मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित साबांग बंदरगाह के विकास को नई दिशा देने पर जोर दिया गया।
भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग का विस्तार भी इस यात्रा की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा। दोनों देशों ने रक्षा उपकरण, मिसाइल प्रणाली, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति बनाई। यह सहयोग केवल द्विपक्षीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इंडोनेशियाई संसद में प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार, समावेशी विकास और वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्व व्यवस्था अधिक न्यायसंगत, समावेशी और संतुलित होनी चाहिए। यह दृष्टिकोण भारत की उस विदेश नीति को दर्शाता है जिसमें विकासशील देशों के हितों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में उचित स्थान दिलाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अब केवल आर्थिक सहयोग का साझेदार नहीं, बल्कि विश्वसनीय रणनीतिक सहयोगी के रूप में भी उभर रहा है। इंडोनेशिया द्वारा भारत के साथ व्यापक सहयोग का विस्तार और प्रधानमंत्री मोदी को दिया गया विशेष सम्मान इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के संबंध अब नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं।
निस्संदेह, प्रधानमंत्री मोदी का “विकासवाद” का संदेश भारत की विदेश नीति की उस सोच को रेखांकित करता है जिसमें शक्ति का प्रदर्शन विस्तार के लिए नहीं, बल्कि साझेदारी, विकास और वैश्विक कल्याण के लिए किया जाता है। भारत और इंडोनेशिया यदि अपनी ऐतिहासिक निकटता को आधुनिक आर्थिक, सामरिक और तकनीकी सहयोग में बदलने में सफल होते हैं, तो यह साझेदारी केवल दोनों देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता, समृद्धि और संतुलित विकास के लिए भी नई दिशा प्रदान करेगी। यही इस यात्रा का सबसे बड़ा संदेश और सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया यात्रा यात्रा पर रहेंगे जिसमें वे ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ से व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग आदि विषयों पर वार्ता करेंगे तथा उनका ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय के लोगों से भी संवाद का कार्यक्रम है। यात्रा के अन्तिम पड़ाव में प्रधानमंत्री मोदी 10 से 11 जुलाई तक यूज़ीलैंड के दौरे पर रहेंगे। उनकी यह यात्रा यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के निमंत्रण पर लगभग 40 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक न्यूज़ीलैंड यात्रा रहेगी।





