श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन उदयपुर के सुप्रसिद्ध जगदीश मंदिर में उपदेशात्मक प्रवचन

A didactic discourse at Udaipur's renowned Jagdish Temple on the final day of the Shrimad Bhagwat Katha

पण्डित जितेन्द्र मोहन भट्ट ने लोगों से भागवत संदेशों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेने का आह्वान किया

रविवार दिल्ली नेटवर्क

उदयपुर : ऐतिहासिक नगर उदयपुर के सुप्रसिद्ध जगदीश मंदिर में पुरुषोत्तम मास के अन्तिम दिन व्यास पीठ से श्रीमद्भागवत कथा का वाचन करते हुए पण्डित जितेन्द्र मोहन भट्ट ने लोगों से भागवत संदेशों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेने का आह्वान किया ।उन्होंने कहा कि सोमवती अमावस्या के कारण अधिक मास का अन्तिम दिन और भी अधिक फलदायी बन गया है।

कथा के समापन पर कथावाचक पंडित भट्ट ने श्रद्धालुओं से सत्य, करुणा, सेवा, सदाचार और धर्ममय जीवन अपनाने का आह्वान भी किया। अपने प्रवचन में उन्होंने राजा परीक्षित और शुकदेव जी के संवाद का उल्लेख करते हुए बताया कि मृत्यु का भय केवल ईश्वर की शरण और आत्मज्ञान से ही दूर हों सकता है।

पण्डित भट्ट ने एक बार पुनः कहा कि कलियुग में भगवान का नाम-स्मरण, भक्ति सत्संग और सेवा ही मानव जीवन के कल्याण का सर्वोत्तम मार्ग हैं । कथा के अंत में भजन,आरती और पूर्णाहुति के साथ उपस्थित भक्तों में प्रसाद का वितरण हुआ। इसके पश्चात भव्य जुलूस निकाला गया ।