राजस्थान विधान सभा के 75वें अमृत वर्ष का लोगो जारी करने के बाद वर्ष पर्यन्त चार बड़े आयोजन कराने की घोषणा

After releasing the logo for the 75th Amrit Year of the Rajasthan Legislative Assembly, four major events were announced throughout the year

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

अपने नित नए नवाचारों के लिए देश दुनिया में पहचाने वाले राजस्थान विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने राजस्थान विधान सभा के 75वें अमृत वर्ष में सोमवार और मंगलवार लगातार दो दिनों में नवीन घोषणाएं की है। सोमवार को देवनानी ने प्रदेश के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे के साथ प्रदेश के मंत्रियों प्रतिपक्ष के नेता और विधायकों की उपस्थिति में राजस्थान विधानसभा का आधिकारिक लोगो (प्रतीक चिह्न) का लोकार्पण किया।राजस्थान विधान सभा के गठन के 75 वर्ष में प्रवेश पर राजस्थान विधानसभा को पहली बार मौजूदा स्पीकर वासुदेव देवनानी की पहल पर अपना लोगो (प्रतीक चिह्न) मिला है। इस लोगो में अशोक स्तंभ-न्याय और सबको साथ चलने की भावना खेजड़ी राज्य वृक्ष, ऊंट राज्य पशु और राज्य पक्षी गोडावण को शामिल करना राजस्थान की पहचान और जन साधारण की भावनाओं के अनुरूप है। गवर्नर और स्पीकर ने राज्य विधानसभा के प्रतीक चिन्ह (लोगो) का लोकार्पण करने के साथ ही विधानसभा भवन के 13 द्वारों के नामकरण का अनावरण कर विधानसभा के अमृत महोत्सव का शानदार उ‌द्घोष भी कर दिया ।

भारत के अधिकांश राज्यों की विधानसभाओं के अपने अलग लोगो (प्रतीक चिह्न) या मोनोग्राम हैं। वर्तमान में लगभग सभी 28 राज्यों की विधानसभाएं किसी न किसी आधिकारिक प्रतीक, मोहर या लोगो का उपयोग करती हैं। हालांकि अधिकांश विधानसभाएं राज्य के राजचिह्न का ही उपयोग करती हैं, कुछ ने ही अपना विशिष्ट विधानसभा लोगो विकसित किया है।जैसा राजस्थान के इतिहास में पहली बार राजस्थान विधानसभा ने अपने 75 वर्ष में नया आधिकारिक लोगो जारी किया है।

राजस्थान विधानसभा देश की ऐसी विधानसभा बन कर उभरी है जिसका अपना प्रतीक चिन्ह (लोगो) बनाया गया है।प्रतीक चिन्ह में अंकित विधानसभा भवन करोड़ी नागरिकों की आशाओं का केंद्र है। शीर्ष पर सुशोभित अशोक स्तंभ भारतीय राजधर्म, सत्य, न्याय और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है। इसमें अंकित गोडावण पक्षी राजस्थान की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक अस्मिता का प्रतिनिधित्व करता है,जबकि खेजड़ी का वृक्ष त्याग, धैर्य और लोकमंगल की परंपरा का संदेश देता है। वहीं ऊँट और गोडावण मरुधरा की सहनशीलता, संघर्ष और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि लोगो में अंकित आदर्श वाक्य “राष्ट्राय धर्मनिष्ठा विधायिका“ राजस्थान विधानसभा द्वारा की जाने वाली जनसेवा और संवैधानिक मर्यादा का आत्म मंत्र है।

स्पीकर देवनानी ने विधानसभा भवन के विभिन्न द्वारों के नामकरण को भी ऐतिहासिक और मूल्यपरक निर्णय बताते हुए कहा कि द्वारों के नाम लोकतंत्र के मूल आदर्शों के प्रतीक हैं। इन ‌द्वारों से प्रवेश करने वाला प्रत्येक व्यक्ति यह अनुभव करेगा कि वह केवल एक भवन में नहीं,बल्कि लोकतांत्रिक संस्कारों के पवित्र केंद्र में प्रवेश कर रहा है। देवनानी ने कहा कि राजस्थान विधान सभा में उत्तरी द्वार (पीतल) जहां से राज्यपाल, मुख्यमंत्री,स्पीकर और नेता प्रतिपक्ष प्रवेश करते है उसे कर्तव्य द्वार, दक्षिणी द्वार जहां से विधायिका की असली शक्ति जनता का प्रवेश होता है उसे शक्ति द्वार, पश्चिमी ‌द्वार जहां से विधायकगण प्रवेश करते है उसे सुशासन ‌द्वार, पूर्वी ‌द्वार जहां से अधिकारीगण प्रवेश करते है उसे संकल्प द्वार और उत्तरी द्वार (मंदिर) जहां से विशिष्ट व्यक्तियों का आगमन होता है उसे शौय द्वार नाम दिया गया है।विधानसभा भवन के बाहरी ‌द्वारों के नामो मे राजस्थान की आंचलिक झलक दिखाई देती है जैसे बृज, शेखावाटी, वागड़, हाड़ौती, मारवाड़, मेवाड़, मेरवाड़ा और ढूंढाड़ । ये नाम राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता, विरासत और लोकपरंपराओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं से जोड़ने का अभिनव प्रयास है। इसी प्रकार विधानसभा भवन के ‌द्वार संख्या एक को बृज द्वार, दो को शेखावाटी द्वार, तीन को वागड़ ‌द्वार, चार को मेवाड ‌द्वार, पांच को मारवाड ‌द्वारा, छः को हाड़ौती द्वार, सात को मेरवाडा द्वार और द्वार संख्या आठ को ढूंढाड ‌द्वार का नाम दिया गया है। बृज भक्ति एवं सांस्कृतिक मधुरता, शेखावाटी कला एवं उ‌द्यमशीलता, वागड प्रकृति संगत आदिवासी चेतना, हाड़ौती साहित्यिक और स्थापत्य परम्परा, मारवाड संघर्षशीलता, मेवाड राष्ट्र गौरव एवं बलिदान, मेरवाडा संत परम्परा और ढूंढाड़ राजनीतिक और सांस्कृतिक ऊर्जा के लिए जाना जाता है। यह सभी मिलकर राजस्थान की आत्मा का निर्माण करते हैं। इन सभी सांस्कृतिक धाराओं को समाहित कर लोकतंत्र की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत कर की गई है।

विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी मंगलवार को विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में राष्ट्रमण्डल संसदीय संघ की राजस्थान शाखा की बैठक की अध्यक्षता करते हुए बताया कि राजस्थान विधान सभा के 75वें वर्ष में होगे चार बडे कार्यक्रम होंगे।
इस बैठक में विधानसभा के अमृत वर्ष में वर्ष पर्यन्त आयोजित किए जाने कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने पर विस्तार से चर्चा हुई। तय किए गए कार्यक्रमों केअनुसार इस वर्ष जुलाई और अक्टूबर तथा अगले वर्ष 2027 के जनवरी और मार्च में चार बड़े कार्यक्रम होंगे। इन कार्यक्रमों में देश की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तथा अन्य बड़े नेताओं को आमंत्रित किया जाएगा।साथ ही राज्यों के विधानमंडलों के अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और सचिवों को भी आमंत्रित किया जाएगा। इसके अलावा देश भर की महिला विधायकों का सम्मेलन,संसदीय और संविधान विशेषज्ञों के विशेष सत्र और छात्र युवा संसद आदि आयोजन भी होंगें। साथ ही राजस्थान विधानसभा की पहली से सोलहवीं विधान सभा तक के पूर्व एवं वर्तमान सदस्यों का एक विशाल सम्मलेन भी होगा।

इस प्रकार विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की पहल पर प्रदेश की जनता को राज्य विधानसभा के अमृत वर्ष में और भी कई नए नवाचार देखने को मिल सकते है जिनमें विधानसभा के म्यूजियम में जयपुर में बैठे ही पूरे प्रदेश का वर्चुअल टूर दिखाने आदि नवाचार भी देखने मिल सकते है।