महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में निवेश के लिए चिली ने भारतीय निवेशकों को दिया आमंत्रण

Chile invites Indian investors to invest in the critical minerals sector

रत्नज्योति दत्ता

नई दिल्ली: लैटिन अमेरिकी देश चिली ने भारतीय निवेशकों को अपने महत्वपूर्ण (क्रिटिकल) खनिज क्षेत्र में उपलब्ध व्यापक निवेश अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया है। यह जानकारी भारत में चिली के राजदूत जुआन एंगुलो ने दी।

वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों (रेयर अर्थ एलिमेंट्स) के क्षेत्र में चिली की रणनीतिक स्थिति है। कई ऐसे खनिज हैं जिनके वैश्विक उत्पादन और भंडार में उसकी उल्लेखनीय हिस्सेदारी है।

“चिली भारत की ऊर्जा सुरक्षा का एक विश्वसनीय और रणनीतिक साझेदार बनना चाहता है। हम भारत की ऊर्जा व्यवस्था में बदलाव तथा उसकी अर्थव्यवस्था के डीकार्बोनाइजेशन की दिशा में योगदान देना चाहते हैं,” कहा जुआन एंगुलो, भारत में चिली के राजदूत, ने 13 जुलाई को फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (एफसीसी) में आयोजित एक मीडिया संवाद के दौरान।

भारत स्थित चिली दूतावास के अनुसार, चिली दुनिया के कुल तांबा (कॉपर) उत्पादन का 22 प्रतिशत हिस्सा रखता है, जबकि उसके पास वैश्विक तांबा भंडार का 21 प्रतिशत है।

लिथियम के मामले में चिली का वैश्विक उत्पादन में 21 प्रतिशत योगदान है और उसके पास दुनिया के कुल लिथियम भंडार का 30 प्रतिशत हिस्सा है। इसके अलावा, देश में मोलिब्डेनम, कोबाल्ट, रेनियम और आयोडीन जैसे खनिजों के भी प्रचुर भंडार हैं।

“स्वच्छ ऊर्जा, तकनीकी प्रगति और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विस्तार के कारण पिछले एक दशक में इन खनिजों का वैश्विक महत्व लगातार बढ़ा है,” एंगुलो ने कहा।

भारत और चिली के बीच 77 वर्षों से चले आ रहे राजनयिक संबंधों का उल्लेख करते हुए एंगुलो ने कहा कि चिली चाहता है कि भारतीय निवेशक देश के खनन क्षेत्र में एक सदी से अधिक के अनुभव का लाभ उठाते हुए उसके महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में निवेश करें।

उन्होंने कहा कि भारत और चिली के बीच लागू दोहरा कराधान परिहार समझौते का लाभ भी भारतीय निवेशकों को मिल सकता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां चिली को विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) केंद्र के रूप में विकसित कर वहां के व्यापक वैश्विक व्यापार नेटवर्क का लाभ उठाते हुए नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक अपनी पहुंच बना सकती हैं।

पश्चिम एशिया में जारी संकट का उल्लेख करते हुए राजदूत ने कहा कि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ी है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। इसका असर चिली सहित अन्य लैटिन अमेरिकी देशों पर भी पड़ रहा है, उन्होंने कहा।