युवाओं को रोजगार, अच्छे कार्य और उद्यमिता के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करने के रणनीतिक महत्व को स्वीकार करने के उद्देश्य से 15 जुलाई को एक खास विषय के साथ ‘विश्व युवा कौशल दिवस’ मनाया जाता है। इस वर्ष यह दिवस ‘साझा भविष्य के लिए कौशल’ थीम के साथ मनाया जा रहा है। यह विषय इस संदेश को सशक्त करता है कि आने वाला कल केवल डिग्री नहीं बल्कि कौशल, नवाचार और मानवीय मूल्यों से निर्मित होगा।
योगेश कुमार गोयल
तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण तथा स्थानीय व वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के लिए प्रासंगिक अन्य कौशलों के विकास के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 15 जुलाई को ‘विश्व युवा कौशल दिवस’ मनाया जाता है। चूंकि यह दिन विश्वभर के युवाओं को रोजगार, काम और एंटरप्रेन्योर बनने के लिए जरूरी स्किल्स से लैस बनाने के लिए समर्पित है, इसीलिए यह दिवस मनाए जाने का काफी महत्व है। दरअसल पूरी दुनिया आज कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, जिनमें से कई चुनौतियां खासकर युवा वर्ग को बहुत प्रभावित करती हैं। यह दिवस युवाओं और ‘तकनीकी, व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण’ (टीवीईटी) संस्थानों, फर्मों, नियोक्ताओं, श्रमिक संगठनों, नीति निर्माताओं तथा विकास भागीदारों के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। यह दिन लैंगिक असमानता को समाप्त करने तथा कमजोर लोगों तक संसाधनों की पहुंच सुनिश्चित करने को बढ़ावा देने के लिए भी खास माना जाता है।
विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक पूरी दुनिया में 200 मिलियन से भी ज्यादा युवा या तो बेरोजगार हैं या उनके पास नौकरी तो है लेकिन वे गरीबी में जी रहे हैं। केवल 1997 और 2017 के बीच ही युवा आबादी में 139 मिलियन की वृद्धि हुई, वहीं युवा श्रम बल में 58.7 मिलियन की कमी आई। कोरोना काल के बाद तो युवा श्रम बल को लेकर स्थिति काफी बदतर हुई। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में पांच में से दो युवा श्रमिक प्रतिदिन 3.1 अमेरिकी डॉलर से भी कम पर जीवनयापन करते हैं और वैश्विक स्तर पर 4 में से 3 युवा कर्मचारी अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में कार्यरत हैं, जो सभ्य काम नहीं है। वैश्विक स्तर पर अधिकांश युवा अभी भी स्थिर या संतोषजनक नौकरी पाने के लिए औसतन 13.8 महीने तक प्रतीक्षा करते हैं, जो शिक्षा से नौकरी में एक कठिन संक्रमण को दर्शाता है। चूंकि पूरी दुनिया में युवा बेरोजगारों बहुत बड़ी फौज है, इसलिए उनके लिए आने वाली चुनौतियों का सफलतापूर्वक प्रबंधन करने के कौशल से लैस होना और भविष्य में होने वाली बाधाओं को झेलने के लिए लचीलापन होना आवश्यक है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती युवा बेरोजगारी आज की अर्थव्यवस्थाओं और समाजों के सामने विकसित और विकासशील देशों के लिए सबसे बड़ी समस्या है। इसीलिए विश्व युवा कौशल दिवस का मुख्य उद्देश्य बेरोजगारी और अल्प-रोजगार की चुनौतियों के संदर्भ में आज के युवाओं के लिए बेहतर सामाजिक-आर्थिक स्थिति प्राप्त करना है।
युवाओं को रोजगार, अच्छे कार्य और उद्यमिता के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करने के रणनीतिक महत्व को स्वीकार करने और साथ ही वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने तथा सतत विकास को आगे बढ़ाने के लिए ही संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 15 जुलाई 2014 को विश्व युवा कौशल दिवस मनाने की घोषणा की थी, तभी से यह दिवस 15 जुलाई को एक खास विषय के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष इस दिवस के लिए ‘साझा भविष्य के लिए कौशल’ विषय निर्धारित किया गया है, जो इस विचार को रेखांकित करता है कि भविष्य केवल तकनीकी दक्षता से नहीं बल्कि ऐसे संतुलित कौशलों से निर्मित होगा, जिनमें डिजिटल साक्षरता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित तकनीक, सामाजिक-भावनात्मक समझ, सहयोग, नवाचार और जिम्मेदार नागरिकता का समावेश हो।
भारत में 2015 में इसी दिन यानी 15 जुलाई को ही कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना’ (पीएमकेवीवाई) की शुरूआत की गई थी। इसके तहत युवाओं को मुफ्त में लघु अवधि का औद्योगिक कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे रोजगार प्राप्त कर सकें। 14 से 35 वर्ष के युवा इस मिशन के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। प्रशिक्षण के लिए तीन महीने, छह महीने या एक वर्ष के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होता है। कोर्स पूरा करने के पश्चात प्रमाणपत्र दिया जाता है, जो देशभर में मान्य है और इस कौशल प्रमाणपत्र के आधार पर आसानी से रोजगार प्राप्त किया जा सकता है। चूंकि युवा वर्ग समाज में अधिक न्यायसंगत, समान और प्रगतिशील अवसरों तथा समाधानों की मांग कर रहा है, इसलिए युवाओं के समक्ष आने वाली शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और लैंगिक समानता तक पहुंच जैसी बहुमुखी चुनौतियों का समाधान करने की आवश्यकता पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है और इसके लिए युवाओं को कौशल प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें अपने कार्य वातावरण में अधिक रोजगार योग्य तथा अधिक उत्पादक बनाने के लिए गंभीर पहल किए जाने की भी जरूरत है।
भारत में केंद्र सरकार की ऐसी ही महत्वपूर्ण पहल है ‘कौशल भारत’, जिसके जरिये सफल होने के लिए युवाओं को आवश्यक कौशल से लैस करने के प्रयास किए जाते हैं। ‘स्किलिंग इंडिया’ के तहत ‘कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय’ भारतीयों में ऐसे कौशल विकसित करने की पहल और योजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिससे वे राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान बढ़ा सकें। दरअसल युवा राष्ट्र निर्माण और छवि निर्माण दोनों में ही सबसे बड़े हितधारक हैं, इसलिए उनके उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए युवाओं को कौशल प्रदान करने तथा देश और दुनिया को एक बड़ा कुशल कार्यबल प्रदान करने पर सरकार का फोकस है। युवाओं के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं में ‘नेशनल अप्रेन्टसशिप प्रोमोशन स्कीम’, युवाओं को स्टार्टअप शुरू करने, नवविचार को प्रोमोट करने, देश में स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘स्टार्टअप इंडिया’, बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को नया कारोबार शुरू करने के लिए लोन उपलब्ध करवाने हेतु ‘पीएम रोजगार योजना’ इत्यादि विभिन्न योजनाएं भी शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक हिंसक संघर्ष शिक्षा और स्थिरता को बाधित करते हैं, ऑनलाइन वातावरण में नकारात्मकता को बढ़ावा देने वाला ध्रुवीकृत वातावरण और लगातार आर्थिक असमानता अवसरों को सीमित करती है। ये मुद्दे न केवल व्यक्तिगत भविष्य बल्कि समाज की समग्र स्थिरता को भी खतरे में डालते हैं। शांति की संस्कृति को बढ़ावा देने, जिम्मेदार वैश्विक नागरिकों का पोषण करने और सभी के लिए अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी और टिकाऊ भविष्य बनाने के लिए सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए युवाओं को आवश्यक कौशल से लैस करना महत्वपूर्ण है। विश्व युवा कौशल दिवस युवाओं की क्षमता को पहचानने, उन्हें चुनौतियों का सामना करने तथा शांतिपूर्ण, समृद्ध और टिकाऊ भविष्य में योगदान देने के लिए कौशल और अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धता पर जोर देता है। दरअसल तीव्र गति से विकसित होती प्रौद्योगिकी और नौकरी बाजार की निरंतर विकसित होती प्रकृति को देखते हुए युवाओं को अनुकूलनीय और बहुमुखी कौशल सैट के साथ सशक्त बनाना बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुतारेस का कहना है कि न केवल आज बल्कि हर दिन शिक्षा को बदलने के लिए काम करते हुए यह सुनिश्चित करने के भी प्रयास होने चाहिएं कि युवाओं के पास वह सब कुछ हो, जो उनके लिए अधिक शांतिपूर्ण, टिकाऊ भविष्य को आकार देने और उनके कौशल को विकसित करने के लिए आवश्यक है। अब चूंकि विभिन्न उद्योगों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस तकनीकों का तेजी से उपयोग कार्य के परिदृश्य को बदल रहा है, इसलिए भविष्य की नौकरियों के लिए युवाओं को तैयार करने हेतु उन्हें आवश्यक एआई कौशल से लैस करना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।





