आधुनिक माल ढुलाई, नवाचार और हरित विकास का नया रोडमैपफ्लाई ऐश,कंटेनर, उर्वरक खाद्यान्न और पेट्रोलियम परिवहन से लेकर वैगन डिज़ाइन,निर्माण प्रणाली तथा कौशल विकास तक-रेलवे के सुधार10 से17भारतीय रेल को अधिक दक्ष,प्रतिस्पर्धी, पर्यावरण-अनुकूल और भविष्य उन्मुख लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में परिवर्तित करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल हैं।
विनोद कुमार सिंह ”तकियावाला’
भारतीय रेल केवल देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था नहीं,बल्कि भारत की आर्थिक प्रगति की सबसे मजबूत आधारशिला भी है।उद्योगों तक कच्चा माल पहुँचाने,किसानों की उपज को देश के विभिन्न भागों तक पहुँचाने,ऊर्जा क्षेत्र की आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला को गतिशील बनाए रखने में भारतीय रेल की भूमिका केंद्रीय है।यही कारण है कि विकसित भारत की परिकल्पना में रेलवे का आधुनिकीकरण केवल नई ट्रेनों, अत्याधुनिक स्टेशनों और हाई- स्पीड रेल परियोजनाओं तक सीमित नहीं रह सकता।वास्तविक परिवर्तन तब होगा जब माल ढुलाई,लॉजिस्टिक्स,निर्माण प्रणाली,तकनीकी नवाचार और मानव संसाधन विकास जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक और दूरदर्शी सुधार लागू किए जाएँ।इसी सोच को साकार करने की दिशा में भारतीय रेल द्वारा घोषित सुधार क्रमांक 10 से 17 एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं। ये सुधार केवल नियमों में परिवर्तन नहीं, बल्कि रेलवे की कार्यसंस्कृति, औद्योगिक भागीदारी और माल परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने वाले नीतिगत निर्णय हैं।इनका उद्देश्य माल ढुलाई को अधिक सरल,कम लागत वाला,पर्यावरण- अनुकूल,तकनीक आधारित और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है।व्यापक दृष्टि से देखें तो ये सुधार भारतीय रेल को एक पारंपरिक परिवहन संस्था से आधुनिक,बहुआयामी और वैश्विक स्तर की लॉजिस्टिक्स प्रणाली में रूपांतरित करने की आधारशिला रखते हैं।इन सुधारों में सबसे महत्वपूर्ण पहल फ्लाई ऐश परिवहन से संबंधित है।देश के ताप विद्युत संयंत्र प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में फ्लाई ऐश का उत्पादन करते हैं,जिसका उपयोग सीमेंट उद्योग और आधारभूत संरचना निर्माण में व्यापक रूप से होता है।अब तक इसका अधिकांश परिवहन खुले वैगनों के माध्यम से किया जाता था,जिससे उड़ने वाली राख पर्यावरण प्रदूषण का कारण बनती थी।नई व्यवस्था के अंतर्गत फ्लाई ऐश को कंटेनरों के माध्यम से परिवहन करने पर बल दिया गया है।इससे प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी,सुरक्षित भंडारण संभव होगा तथा सीमेंट उद्योग ।आवश्यकता के अनुसार कंटेनरों का उपयोग कर सकेगा।यह परिवर्तन केवल परिवहन प्रणाली का सुधार नहीं,बल्कि हरित विकास और स्वच्छ औद्योगिक व्यवस्था की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।इसी क्रम में कंटेनर परिवहन क्षेत्र में किए गए सुधार भारतीय लॉजिस्टिक्स उद्योग को नई ऊर्जा प्रदान करेंगे।पहले कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों के लिए अलग-अलग श्रेणियों की लाइसेंस व्यवस्था,भारी पंजीकरण शुल्क और जटिल नवीनीकरण प्रणाली निवेशकों के लिए चुनौती बनी हुई थी।नई नीति के अंतर्गत पूरे देश के लिए एकीकृत कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर लाइसेंस लागू किया गया है। पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया गया है तथा सफल संचालन के बाद लाइसेंस विस्तार शुल्क समाप्त कर दिया गया है।इससे निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा,प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कंटेनर आधारित माल परिवहन अधिक लचीला तथा व्यवसाय-अनुकूल बन सकेगा उर्वरक परिवहन सुधार कृषि क्षेत्र की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत में उर्वरकों की आपूर्ति का अधिकांश भार भारतीय रेल वहन करती है।नई नीति के अंतर्गत मालभाड़ा संरचना को सरल बनाकर प्रति टन प्रति किलोमीटर आधारित व्यवस्था लागू की गई है। साथ ही उर्वरकों को कंटेनरों में परिवहन की अनुमति देकर वितरण प्रणाली को अधिक लचीला बनाया गया है।इससे रैक की अनावश्यक प्रतीक्षा कम होगी,उर्वरकों का चरणबद्ध वितरण संभव होगा और किसानों तक समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। इससे न केवल परिवहन लागत में कमी आएगी,बल्कि कृषि आपूर्ति श्रृंखला भी अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनेगी।रेलवे ने इन सुधारों के माध्यम से केवल माल परिवहन व्यवस्था पर ही ध्यान नहीं दिया है, बल्कि मानव संसाधन विकास को भी समान प्राथमिकता दी है।रेलवे परियोजनाएँ अत्यधिक तकनीकी, जटिल और सुरक्षा-संवेदनशील होती हैं।ऐसे में गुणवत्तापूर्ण निर्माण और सुरक्षित संचालन के लिए प्रशिक्षित एवं दक्ष मानव संसाधन अनिवार्य है।इसी उद्देश्य से कारीगरों के कौशल परीक्षण और प्रमाणन की नई नीति लागू की गई है।QR कोड आधारित स्किल कार्ड, एकीकृत मूल्यांकन प्रणाली तथा राष्ट्रीय स्तर पर कौशल उन्नयन की व्यवस्था यह सुनिश्चित करेगी कि विशेष तकनीकी कार्य केवल प्रशिक्षित और प्रमाणित कारीगर ही करें।इससे रेलवे परियोजनाओं की गुणवत्ता, .सुरक्षा और समयबद्धता में उल्लेखनीय सुधार होगा,वहीं देश में कुशल कार्यबल के विकास को भी नई गति मिलेगी।निर्माण प्रणाली में किए गए सुधार भी भारतीय रेल की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव लाने वाले हैं। ठेकेदारों की पात्रता, अनुबंध प्रबंधन,बीमा व्यवस्था तथा भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया गया है।विशेष रूप से ‘रेल भूमि (Rail Bhoomi)’ डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म भूमि अधिग्रहण की पारंपरिक कागजी प्रक्रिया को ऑनलाइन प्रणाली में परिवर्तित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।इसके माध्यम से भूमि अधिग्रहण,मुआवज़ा वितरण, लंबित प्रकरणों तथा परियोजनाओं की प्रगति की वास्तविक समय में निगरानी संभव होगी।वर्षों से भूमि संबंधी विवादों के कारण विलंबित होने वाली अनेक परियोजनाओं को इससे नई गति मिलने की उम्मीद है।इन सुधारों का एक और महत्वपूर्ण पक्ष वैगन डिज़ाइन नीति में परिवर्तन है।अब तक माल वैगनों की डिज़ाइन प्रक्रिया मुख्यतः रेलवे के अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन(आरडीएसओ) तक सीमित थी।इससे नवीन तकनीकों और उद्योग-विशिष्ट वैगनों के विकास की गति अपेक्षाकृत धीमी रहती थी। नई नीति के अंतर्गत अब उद्योग और निर्माता स्वयं आधुनिक वैगन डिज़ाइन प्रस्तुत कर सकेंगे। परीक्षण,सुरक्षा प्रमाणन और सफल फील्ड ट्रायल के बाद ऐसे वैगनों को रेलवे नेटवर्क में शामिल किया जाएगा।इससे विशेष प्रकार के माल के लिए उपयुक्त वैगनों का विकास होगा, .नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा और भारतीय वैगन निर्माण उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप आगे बढ़ सकेगा।इसी प्रकार पेट्रोलियम,तेल एवं स्नेहक (POL) उत्पादों के परिवहन में किया गया सुधार ऊर्जा क्षेत्र के लिए दूरगामी महत्व रखता है।अब तक टैंक वैगनों का स्वामित्व मुख्यतः भारतीय रेल के पास था,जिससे तेल कंपनियों के पास परिचालन संबंधी विकल्प सीमित थे।नई व्यवस्था के अंतर्गत तेल कंपनियाँ स्वयं टैंक वैगन खरीद सकेंगी अथवा उन्हें लीज़ पर लेकर संचालित कर सकेंगी।साथ ही विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप नए डिज़ाइन के टैंक वैगनों को भी अनुमति दी गई है।इससे ऊर्जा क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला अधिक लचीली,सुरक्षित और आधुनिक बनेगी तथा उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप परिवहन क्षमता विकसित हो सकेगी।खाद्यान्न,आटा और दालों के परिवहन में किया गया सुधार सीधे देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।अब इन वस्तुओं का परिवहन भी कंटेनरों के माध्यम से किया जा सकेगा।इससे खाद्यान्न की गुणवत्ता सुरक्षित रहेगी,नमी और प्रदूषण से बचाव होगा तथा आवश्यकता के अनुसार विभिन्न स्थानों पर भंडारण और वितरण अधिक सुविधाजनक हो सकेगा। साथ ही जटिल मालभाड़ा प्रणाली को सरल बनाकर प्रति टन प्रति किलोमीटर आधारित व्यवस्था लागू करने से पारदर्शिता और परिचालन दक्षता दोनों में वृद्धि होगी।इन सुधारों को यदि प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो इनका महत्व और अधिक स्पष्ट हो जाता है।भारत लंबे समय से अपेक्षाकृत अधिक लॉजिस्टिक्स लागत की चुनौती का सामना करता रहा है।सड़क,रेल,बंदरगाह और औद्योगिक गलियारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना विकसित भारत की आर्थिक रणनीति का प्रमुख उद्देश्य है।कंटेनरीकरण, मालभाड़ा संरचना का सरलीकरण, भूमि अधिग्रहण का डिजिटलीकरण तथा निजी निवेश को प्रोत्साहन जैसे कदम भारतीय रेल को मल्टी- मॉडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का अधिक प्रभावी आधार बनाएँगे। इससे उद्योगों तक कच्चे माल की आपूर्ति तथा तैयार उत्पादों की समयबद्ध ढुलाई में उल्लेखनीय सुधार होगा।वैश्विक प्रतिस्पर्धा के वर्तमान दौर में किसी भी देश की आर्थिक शक्ति केवल उत्पादन क्षमता से नहीं,बल्कि उस उत्पादन को कम लागत और कम समय में बाजार तक पहुँचाने की दक्षता से भी निर्धारित होती है।भारतीय रेल के ये सुधार इसी दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।आधुनिक वैगन डिज़ाइन,कंटेनर आधारित परिवहन,डिजिटल निर्माण प्रबंधन, कुशल मानव संसाधन तथा उद्योगों के अनुरूप नीतिगत लचीलापन भारतीय लॉजिस्टिक्स प्रणाली को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा। इससे न केवल माल ढुलाई क्षमता में वृद्धि होगी,बल्कि भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका को और अधिक सुदृढ़ कर सकेगा।यदि इन सभी सुधारों का समग्र मूल्यांकन किया जाए तो स्पष्ट होता है कि भारतीय रेल अब केवल एक परिवहन सेवा प्रदाता नहीं रहना चाहती,बल्कि स्वयं को एक आधुनिक,तकनीक-संचालित और विश्वस्तरीय लॉजिस्टिक्स प्लेटफ़ॉर्म के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।कंटेनरीकरण, डिजिटलीकरण,निजी क्षेत्र की भागीदारी,तकनीकी नवाचार, कौशल विकास और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व—ये सभी पहल भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं । निस्संदेह,रेलवे सुधार 10 से 17 भारतीय रेल के परिवर्तनकारी सफर की महत्वपूर्ण कड़ी हैं।ये केवल नीतिगत परिवर्तन नहीं, बल्कि विकसित भारत की आधारभूत संरचना को नई दिशा देने वाले दूरदर्शी निर्णय हैं। .यदि इन सुधारों का क्रियान्वयन निर्धारित उद्देश्य और समयबद्धता के साथ हुआ,तो भारतीय रेल केवल देश की सबसे बड़ी परिवहन व्यवस्था ही नहीं रहेगी, .बल्कि एशिया की सबसे आधुनिक,नवाचार-प्रधान, पर्यावरण-अनुकूल और विश्वसनीय लॉजिस्टिक्स प्रणाली के रूप में भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगी।विकसित भारत-2047 की यात्रा में यह परिवर्तन भारतीय रेल की सबसे बड़ी और सबसे स्थायी उपलब्धियों में गिना जाएगा।





