राजस्थान में राज्यसभा चुनाव में भाजपा की दो और कांग्रेस की एक सीट पर विजय तय फिर भी क्या कोई सरप्राइज होगा?

In the Rajya Sabha elections in Rajasthan, BJP is sure to win two seats and Congress one seat, but will there be any surprises?

एन जी भट्ट

भारत निर्वाचन आयोग ने राजस्थान सहित देश के 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए जो कार्यक्रम घोषित किया गया है,उसके अनुसार यदि आवश्यक हुआ तो 18 जून को मतदान कराया जाएगा। राजस्थान की राज्यसभा में आगामी जून में खाली हो रही तीन सीटों पर भी इसी कार्यक्रम के तहत चुनाव होंगे।

राजस्थान से जिन सांसदों का राज्यसभा में कार्यकाल पूरा हो रहा है उनमें केन्द्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र गहलोत और कांग्रेस के नीरज डांगी शामिल हैं। वर्तमान में राज्यसभा में राजस्थान के कोटे की दस सीटों में से भाजपा और कांग्रेस के पांच-पांच सांसद हैं। जिनमें भाजपा के रवनीत सिंह बिट्टू और राजेंद्र गहलोत का कार्यकाल पूरा हो रहा है। भाजपा के शेष तीन राज्यसभा सांसदों में राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, दिग्गज भाजपा नेता घनश्याम तिवाड़ी और आदिवासी नेता चुन्नी लाल गरासिया शामिल है। वहीं कांग्रेस से राज्यसभा सांसद नीरज डांगी की सीट खाली हो रही है। नीरज डांगी कांग्रेस के वर्तमान पांच कांग्रेसी सांसदों में राजस्थान मूल के एक मात्र सांसद है। शेष चारों सांसद जिसमें कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गाँधी सहित पार्टी के अन्य दिग्गज नेता मुकुल वासनिक, प्रमोद तिवारी और रणदीप सिंह सुरजेवाला हैं सभी राजस्थान से बाहर के नेता है।

राजस्थान में तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है। इसमें राजस्थान विधानसभा की 200 सीटो में वर्तमान संख्या बल को देखते हुए भाजपा की दो और कांग्रेस की एक सीट पर जीत तय माना जा रहा है। यदि दोनों दल अतिरिक्त उम्मीदवार नहीं उतारते हैं, तो इन सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन सुनिश्चित है। हालाँकि भाजपा और कांग्रेस की ओर से राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों के लिए अभी आधिकारिक उम्मीदवार घोषित नहीं हुए हैं, लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों में कई नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा में तेजी से चल रहे हैं।

जहां तक भाजपा के संभावित उम्मीदवारों का सवाल है तो केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद रवनीत सिंह बिट्टू को रिपीट किया जा सकता है। वे पंजाब के प्रसिद्ध राजनीतिक परिवार से आते हैं तथा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बेअंत सिंह के पोते हैं। राजस्थान के पड़ौसी प्रदेश पंजाब में अगले वर्षों में विधानसभा के चुनाव भी होने है, ऐसे में उन्हें टिकट देकर भाजपा हाई कमान एक राजनीतिक संकेत देना चाहता है। हालाँकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें गुजरात कोटे से उम्मीदवार बनाये जाने की भी चर्चा है। फिर भी भाजपा में जिन नामों की सबसे अधिक चर्चा चल रही है, उनमें रवनीत सिंह बिट्टू के साथ ही वर्तमान राज्यसभा सांसद आरएसएस के नजदीकी राजेंद्र गहलोत का नाम भी है। बताते है पार्टी उन्हें दोबारा मौका दे सकती है। इसके अलावा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया,पूर्व मंत्री राजेन्द्र राठौड़ और लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला,केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ,भूपेन्द्र यादव,अर्जुन राम मेघवाल और अश्विनी वैश्वव आदि के करीबी माने जाने वाले कुछ संगठनात्मक नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। कुछ राजनीतिक रिपोर्टों में भाजपा के भीतर किसी महिला चेहरे और सामाजिक संतुलन साधने वाले उम्मीदवार पर भी विचार होने की बात कही जा रही है। हाल ही पश्चिमी बंगाल के चुनाव में प्रदेश के नेताओं का बड़ा महत्वपूर्ण योगदान रहा था जिसका उल्लेख स्वयं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने किया था। ऐसे में कुशल पार्टी संगठनकर्ता सुनील बंसल के नाम पर भी गंभीरता से विचार हो सकता है। वैसे सभी जानते है कि पार्टी में उम्मीदवारों के नाम का अन्तिम फैसला पार्टी का शिर्षक नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी,उनके चाणक्य केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन आदि की मुहर लगने के बाद ही होगा। फिर भी भाजपा का अंदाज कुछ नए अनजाने नामों को आगे कर सभी को अचंभित करना भी रहता आया है।

भाजपा की रणनीति तीन स्तरों पर दिखाई दे रही है। पहला, संगठन और सरकार के बीच समन्वय बनाए रखना। दूसरा, सामाजिक संतुलन साधना। तीसरा, केंद्रीय नेतृत्व की प्राथमिकताओं के अनुरूप उम्मीदवार का चयन करना। इस लिहाज से राजस्थान भाजपा की कौर समिति ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को उम्मीदवार चयन की जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया है तो वे इस बात का ध्यान रखेंगे कि राज्यसभा भेजे जाने वाले चेहरों से आगामी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में भी पार्टी को राजनीतिक लाभ मिले। खबर है कि पार्टी के केन्द्रीय संगठन मंत्री बी एल सन्तोष ने प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को चर्चा के लिए नई दिल्ली बुलाया है। इसके साथ ही भाजपा में यह भी चर्चा है कि पार्टी किसी ऐसे नेता को राज्यसभा भेज सकती है जिसे भविष्य में राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका देनी हो। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और केंद्रीय नेतृत्व उम्मीदवार चयन में सामाजिक समीकरण, संगठनात्मक निष्ठा और भविष्य की राजनीतिक उपयोगिता को ध्यान में रख रहे हैं। जाट, ब्राह्मण, राजपूत और ओबीसी तथा महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी मंथन बताया जा रहा है।राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह चुनाव मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व की पहली बड़ी संसदीय परीक्षा भी माना जा रहा है। यदि भाजपा बिना किसी विवाद के अपनी दोनों सीटें निकाल लेती है और संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखती है, तो यह नेतृत्व की मजबूती का संकेत होगा।

कांग्रेस की स्थिति अपेक्षाकृत कठिन अवश्य है, लेकिन पूरी तरह कमजोर नहीं कही जा सकती। उसके पास एक सीट जीतने लायक संख्या बल मौजूद है। कांग्रेस का मुख्य लक्ष्य अपनी एक सीट सुरक्षित रखना और पार्टी की एकजुटता प्रदर्शित करना होगा। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का अनुभव और संगठन पर पकड़ यहां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वहीं सचिन पायलट खेमे की राजनीतिक सक्रियता भी उम्मीदवार चयन को प्रभावित कर सकती है।

कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा प्रश्न उम्मीदवार का है। पार्टी ऐसा चेहरा चाह सकती है जो केवल विधानसभा गणित तक सीमित न हो, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभाव रखता हो। यही कारण है कि कांग्रेस में फिर से किसी वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता या कानूनी-राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले चेहरे को राजस्थान से भेजे जाने की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। कांग्रेस यदि अपनी सीट सुरक्षित रखती है और आंतरिक गुटबाजी से बची रहती है, तो वह इसे विपक्ष की जीवंतता के रूप में प्रस्तुत करेगी।कांग्रेस की ओर देखें तो सबसे अधिक चर्चा पवन खेड़ा के नाम की है। पार्टी का एक वर्ग चाहता है कि राजस्थान से फिर किसी राष्ट्रीय प्रवक्ता या दिल्ली राजनीति से जुड़े चेहरे को राज्यसभा भेजा जाए। इसके अलावा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ सी. पी. जोशी का नाम भी मजबूत दावेदारों में माना जा रहा है। इसी तरह अलवर के भंवर जितेंद्र सिंह और जयपुर के रफीक मंडेलिया के नाम भी चर्चाओं में बताए जा रहे हैं। वर्तमान सांसद नीरज डांगी को रिपीट करने की संभावना पर भी चर्चा है, हालांकि कांग्रेस के भीतर इसको लेकर अलग-अलग राय बताई जा रही है।कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उसके पास केवल एक सीट निकालने लायक संख्या बल है, इसलिए टिकट को लेकर आंतरिक प्रतिस्पर्धा काफी तीखी मानी जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट खेमे के बीच संतुलन भी उम्मीदवार चयन में महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है।

फिलहाल दोनों दलों भाजपा और कांग्रेस की ओर से किसी उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है,लेकिन राजनीतिक संकेत बताते हैं कि भाजपा अनुभव और सामाजिक संतुलन पर जोर देगी, जबकि कांग्रेस ऐसा चेहरा उतारना चाहेगी जो संगठन और राष्ट्रीय राजनीति दोनों में संदेश देने वाला हो। हालांकि राजनीति केवल अंकगणित से नहीं चलती। राज्यसभा चुनाव हमेशा रणनीति, संदेश और संगठनात्मक शक्ति का भी परीक्षण होते हैं। भाजपा इस चुनाव को केवल दो सीटों तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी के भीतर यह चर्चा है कि तीसरी सीट पर भी मुकाबले की स्थिति बनाई जाए ताकि कांग्रेस पर मनोवैज्ञानिक दबाव बने। कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी संकेत है कि भाजपा “सरप्राइज उम्मीदवार” या महिला चेहरे पर दांव लगा सकती है। इन चुनावों का एक महत्वपूर्ण पहलू क्रॉस वोटिंग की संभावना भी होती है, लेकिन राजस्थान में फिलहाल ऐसी स्थिति बहुत मजबूत दिखाई नहीं देती। भाजपा के पास बहुमत स्थिर है और कांग्रेस भी अपनी एक सीट बचाने को लेकर सतर्क रहेगी। यदि दोनों दल केवल उतने ही उम्मीदवार उतारते हैं जितनी सीटें उनके संख्या बल से निकलती हैं, तो चुनाव निर्विरोध हो जायेंगे। वैसे भी नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 11 जून 2026 तक स्थिति काँच की तरह साफ हो जाने वाली है।