अशोक भाटिया
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की 27 फरवरी से 2 मार्च 2026 तक की भारत यात्रा ने दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों को पूरी तरह से नया मोड़ दे दिया था | यह आठ वर्षों में किसी कनाडाई प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा थी, जिसका मुख्य उद्देश्य व्यापार, निवेश, ऊर्जा और शिक्षा के क्षेत्र में कड़वाहट को भुलाकर रणनीतिक साझेदारी को फिर से मजबूत करना था | भारत में निवेश बढ़ाने के लिए कार्नी मुंबई में बड़े उद्योगपतियों और निवेशकों से भी मिले । इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लीन एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में संभावनाओं पर चर्चा हुई । दरअसल कनाडा पहले से भारत में निवेश कर रहा है और अब इस हिस्सेदारी को और बढ़ाना चाहता है।
कार्नी की यात्रा से पहले कनाडा के कुछ अधिकारियों के बयान चर्चा में रहे थे । पहले कनाडा ने आरोप लगाया था कि भारत उसकी जमीन पर हस्तक्षेप कर रहा है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल दे रहा है। लेकिन बाद में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अगर ऐसा गंभीर खतरा होता, तो प्रधानमंत्री भारत की यात्रा नहीं करते। इससे संकेत मिलता है कि ओटावा अब रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे है।
कनाडा के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार 21 अरब डॉलर से ज्यादा है। भारतीय आंकड़ों के अनुसार कुल द्विपक्षीय व्यापार करीब 1।2 लाख करोड़ रुपये के आसपास है।भारत से कनाडा को मुख्य रूप से दवाइयां, टेलीफोन उपकरण, ऑटो पार्ट्स, ज्वेलरी, कपड़े, इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स और समुद्री उत्पाद निर्यात होते हैं। वहीं कनाडा से भारत को कोयला, वुड पल्प, आयरन, दालें, लकड़ी, कागज और खनन से जुड़े उत्पाद मिलते हैं।
भारत में 600 से अधिक कनाडाई कंपनियां काम कर रही हैं। कनाडा के बड़े पेंशन फंड रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में लगभग 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश कर चुके हैं। अब दोनों देश इस निवेश को और बढ़ाने पर जोर देते रहे थे ।
इस दौरे का सबसे अहम मुद्दा ऊर्जा माना जा रहा था । दोनों देशों के बीच यूरेनियम सप्लाई समझौते पर बातचीत हुई । लगभग 10 साल के लिए 2।8 अरब कनाडाई डॉलर का यूरेनियम सौदा होने की संभावना जताई गई , जिससे भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को ईंधन मिल सके।इसके अलावा भारी कच्चे तेल, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) और अन्य ऊर्जा उत्पादों में सहयोग बढ़ाने की योजना है। कनाडा प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, जबकि भारत को अपनी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए भरोसेमंद और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की जरूरत है। 2024 में कनाडा के कुल ऊर्जा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी केवल 761.5 मिलियन डॉलर थी, जबकि भारत से आयात 206 मिलियन डॉलर रहा। अब इस हिस्सेदारी को बढ़ाने का लक्ष्य है।
दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पहले ही उच्च स्तरीय बातचीत कर चुके थे । कूटनीतिक और कानून-प्रवर्तन संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति पर सहमति बनी है, ताकि सुरक्षा सहयोग मजबूत हो सके।AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, शोध और शिक्षा के क्षेत्र में भी साझेदारी बढ़ाने की योजना है। इससे केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि सामाजिक और वैज्ञानिक सहयोग भी बढ़ने की आशा व्यक्त की गई थी ।
CEPA(व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता) यानी वस्त्र, सेवाएं, निवेश, कृषि और डिजिटल व्यापार जैसे क्षेत्रों को कवर करेगा। पिछले साल जी-7 शिखर सम्मेलन में कार्नी और मोदी के बीच मुलाकात में इसे फिर से शुरू करने पर सहमति बनी थी। लक्ष्य है कि अगले लगभग 12 महीनों में इस समझौते को अंतिम रूप दिया जाए और 2030 तक व्यापार को 50-70 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए।
गौरतलब है कि 2023 में खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में हत्या के बाद दोनों देशों के रिश्ते काफी खराब हो गए थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारतीय एजेंटों पर आरोप लगाए, जिसे भारत ने पूरी तरह खारिज कर दिया।2024 में कनाडा ने छह भारतीय अधिकारियों को निष्कासित किया। भारत ने भी जवाबी कदम उठाए और वीजा सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दीं। व्यापार मिशन रद्द हुए और CEPA वार्ता ठप पड़ गई।मार्च 2025 में मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद रिश्तों को सुधारने की कोशिश शुरू हुई। भारत के कनाडा में उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने कहा है कि यह दौरा संबंधों को रीसेट करने का मौका है।
2021 की जनगणना के अनुसार, कनाडा में 83।6 लाख लोग विदेश में जन्मे हैं, जो कुल आबादी का करीब 23% है। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, कनाडा में लगभग 16 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं। पाकिस्तानी मूल के करीब 3 लाख लोग भी वहां बसे हैं।2025 के पहले दस महीनों में कनाडा ने 2,831 भारतीय नागरिकों को देश से बाहर निकाला। पिछले साल कुल 18,785 लोगों को निकाला गया, जिनमें भारतीय दूसरे नंबर पर थे। अभी 29,542 लोगों पर कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है, जिनमें 6,515 भारतीय शामिल हैं। सरकार के अनुसार, कई मामलों में आपराधिक गतिविधियां या शरण नियमों का उल्लंघन कारण रहे।
1947 में भारत की आजादी के बाद दोनों देशों के औपचारिक संबंध शुरू हुए। 1974 के परमाणु परीक्षण के बाद तनाव बढ़ा और परमाणु सहयोग रुका। 1985 में एअर इंडिया फ्लाइट 182 विस्फोट से भी रिश्तों पर असर पड़ा। 2010 में मनमोहन सिंह के दौरे के दौरान परमाणु सहयोग समझौता हुआ। 2015 में प्रधानमंत्री मोदी के कनाडा दौरे में कई समझौते हुए। 2023 के बाद फिर तनाव आया, जिसे अब कम करने की कोशिश हो रही है।
मार्क कार्नी का यह दौरा सिर्फ औपचारिक यात्रा नहीं थी , बल्कि दोनों देशों के लिए एक नया मौका रहा । व्यापार, ऊर्जा और तकनीक में सहयोग बढ़ाने की संभावना बनी । साथ ही पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर भरोसा बहाल करने की भी जरूरत बनी ।
अब बात को आगे बढ़ाने के लिए हाल ही में केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कनाडा के पीएम मार्क कार्नी से मुलाकात की। दोनों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को लेकर बातचीत हुई। गोयल 25 से 27 मई तक कनाडा दौरे पर है । उनके साथ एक बड़ा बिजनेस डेलीगेशन भी कनाडा पहुंचा है। इस यात्रा का मकसद भारत और कनाडा के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना है। भारत और कनाडा अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से मुलाकात की और उन्हें प्रधानमंत्री मोदी की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उनकी हालिया भारत यात्रा को याद करते हुए कहा कि इस दौरे ने भारत-कनाडा साझेदारी को नई गति और नया विश्वास प्रदान किया है। पीयूष गोयल के अनुसार उनकी बातचीत भविष्य की संभावनाओं पर केंद्रित रही। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा हुई। साथ ही भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को जल्द अंतिम रूप दिए जाने को लेकर उम्मीद जताई गई है, जिससे दोनों देशों के लिए विकास और तरक्की के नए मौके खुलेंगे।’
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा, हम भारत के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। यह कनाडा के श्रमिकों और व्यवसायों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगा और एक विशाल नए बाज़ार के द्वार खोलेगा। हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। मैंने मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की और ऊर्जा, कृषि-खाद्य प्रौद्योगिकी और शिक्षा के क्षेत्रों में हमारे दोनों देशों के लिए मौजूद अवसरों पर चर्चा की।’
नयी दिल्ली का कहना है कि यह कनाडा जाने वाला भारत का अब तक का सबसे बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल है। गोयल ने सोमवार को कहा, ‘‘यह एक ऐसी साझेदारी है जिसे बहुत तेजी से नए सिरे से स्थापित किया जा रहा है।’’ उन्होंने कहा कि फरवरी के अंत में कार्नी की यात्रा ने ‘‘कनाडा और भारत के एक-दूसरे को देखने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया।’’ यह आठ वर्षों में कनाडा के किसी प्रधानमंत्री की पहली भारत यात्रा थी। उन्होंने कहा, ‘‘इसने इस संबंध में व्यापक बदलाव का मार्ग प्रशस्त किया है और नए एजेंडे एवं नए लक्ष्य तय किए हैं।’’
कनाडा और भारत के बीच 2010 से व्यापार वार्ता जारी है। कनाडा के अधिकारियों द्वारा यह आरोप लगाए जाने के बाद 2023 में वार्ता रोक दी गई थी कि जून 2023 में वैंकूवर के पास हुई निज्जर की हत्या में भारत शामिल था। नयी दिल्ली ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था और कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार पर खालिस्तान समर्थक अलगाववादी गतिविधियों में शामिल सिख चरमपंथियों को शरण देने का आरोप लगाया था। गोयल ने सिद्धू से मुलाकात से पहले कहा कि दोनों देश इस साल मुक्त व्यापार समझौते पर पहुंचने के इच्छुक हैं। भारत यात्रा के दौरान कार्नी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की थी और दोनों पक्षों ने कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे।
इनमें परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए भारत को लगभग 2।2 करोड़ पाउंड यूरेनियम की आपूर्ति संबंधी 2।6 अरब कनाडाई डॉलर (1।9 अरब अमेरिकी डॉलर) का समझौता भी शामिल था। कनाडा का एक प्रतिनिधिमंडल इस महीने की शुरुआत में व्यापार वार्ता के लिए नयी दिल्ली गया था और एक अन्य भारतीय प्रतिनिधिमंडल चर्चा जारी रखने के लिए इस साल के अंत में कनाडा आने की योजना बना रहा है। गोयल ने कहा कि दोनों देश 2030 तक अपने व्यापार को तीन गुना बढ़ाकर 50 अरब अमेरिकी डॉलर करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
ओटावा में गोयल ने कार्नी और कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद से मुलाकात की। उनका प्रमुख कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, स्टार्टअप और पेंशन कोषों के प्रतिनिधियों से भी मिलने का कार्यक्रम है। ‘एशिया पैसिफिक फाउंडेशन ऑफ कनाडा’ में अनुसंधान एवं रणनीति की उपाध्यक्ष वीना नादजीबुल्ला ने कहा कि दोनों देश अपने संबंधों में विविधता लाना चाहते हैं और अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं। भारत ने हाल में यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। नादजीबुल्ला ने कहा, ‘‘भारत अब पूंजी, प्रौद्योगिकी और नवोन्मेष संबंधी अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए यूरोप के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसी अन्य पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं की ओर रुख कर रहा है।





