अशोक भाटिया
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सोमवार को एक बार फिर वृद्धि की गयी। पेट्रोल की कीमत 2.61 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल के दाम 2.71 रुपये प्रति लीटर बढ़ाये गये हैं। सरकारी तेल कंपनियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर डाले जाने के बीच पिछले दो सप्ताह से भी कम समय में यह चौथी बार है जब कीमतों में बढ़ोतरी की गई है।
ईंधन कीमतों में 15 मई से फिर संशोधन शुरू हुआ था। तब से अब तक पेट्रोल और डीजल के दाम कुल मिलाकर करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर बढ़ चुके हैं। उद्योग सूत्रों ने बताया कि दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 2.61 रुपये प्रति लीटर बढ़ाकर 102.12 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जो पहले 99.51 रुपये प्रति लीटर थी।
डीजल के दाम 2.71 रुपये बढ़ाकर 95.20 रुपये प्रति लीटर कर दिए गए हैं, जो पहले 92.49 रुपये प्रति लीटर थे। यह वृद्धि वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपये में कमजोरी के बीच की गई है। वैश्विक कच्चे तेल की कीमत बढ़ने और रुपये के कमजोर होने से तेल विपणन कंपनियों की आयात लागत पर दबाव बढ़ा है।
देश में महंगाई का जिन्न एक बार फिर बाहर निकल आया है, जिससे आम आदमी की कमर टूटना तय माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। लगातार कमजोर होते रुपये और ईंधन की बढ़ती कीमतों की वजह से थोक महंगाई अब अपने 42 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। रसोई गैस से लेकर बिजली और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुए इस अप्रत्याशित उछाल ने आने वाले दिनों में बड़े आर्थिक झटकों के संकेत दे दिए हैं।
वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में ईंधन और बिजली की महंगाई दर उछलकर 24.71 फीसदी पर पहुंच गई है। यह पिछले साढ़े तीन साल का सबसे ऊंचा स्तर है। कच्चे पेट्रोलियम की बात करें तो इसकी महंगाई दर 88.06 फीसदी तक जा पहुंची है, जो साढ़े चार साल में सबसे ज्यादा है। सबसे चौंकाने वाला उछाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दिखा है। पेट्रोल की महंगाई दर मार्च के 2.50 फीसदी से बढ़कर सीधे 32.40 फीसदी पर पहुंच गई है, जबकि डीजल की दर भी 3.26 फीसदी से बढ़कर 25.19 फीसदी हो गई है। रसोई गैस (एलपीजी) भी मार्च के मुकाबले काफी महंगी हुई है।
कच्चे तेल की कीमतों में वैशि्वक स्तर पर 50 फीसदी तक की वृद्धि होने के बावजूद सरकार ने फिलहाल पेट्रोल और घरेलू रसोई गैस के दाम स्थिर रखे थे पर अब सरकार भी मजबूर है । सरकार की कोशिश थी कि जनता को इस बोझ से बचाया जाए, लेकिन पेट्रोलियम कंपनियों को हो रहे भारी घाटे को देखते हुए यह राहत ज्यादा दिन तक चलना मुमकिन नहीं लग रहा है। कंपनियों के बढ़ते नुकसान की भरपाई के लिए सरकार जल्द ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और इजाफा कर सकती है। इसके अलावा अल-नीनो के प्रभाव और अनाज की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच महंगाई को काबू करना अब मोदी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि यह बढ़ोतरी बहुत ही कम समय के भीतर हुई है। एक हफ्ते के अंदर तेल कंपनियों द्वारा दामों को तीसरी बार बढ़ाया गया है। डीजल की कीमतों में इस तरह लगातार हो रही बढ़ोतरी से देश में माल ढुलाई महंगी होने का पूरा डर बना हुआ है। जब डीजल महंगा होता है, तो सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का खर्च बढ़ जाता है, जिससे फल, सब्जियां और रोजाना की दूसरी जरूरी चीजों के दाम भी बाजार में बढ़ने लगते हैं। इस कारण आने वाले दिनों में आम जनता को महंगाई की दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है।
जैसे-जैसे ईंधन महंगा होता जाता है, बसों, टैक्सियों और ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ जाता है, जिससे बदले में दूसरी जरूरी चीजों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।जानकारों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल और भी महंगे हो सकते हैं, जिससे महंगाई बढ़ने की चिंताएं बढ़ सकती हैं।
इससे पहले पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की वजह बताते हुए कहा कि पश्चिम एशिया संकट को ढाई महीने से ज्यादा हो चुके हैं और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति अब भी सामान्य नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, नेचुरल गैस और एलपीजी की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसका असर भारत के क्रूड ऑयल, एलपीजी और नेचुरल गैस आयात पर भी पड़ा है।हालांकि सरकार ने लोगों को राहत देते हुए कहा है कि देश में ईंधन सप्लाई की कोई कमी नहीं है। सुजाता शर्मा के मुताबिक सभी रिफाइनरियां सामान्य रूप से काम कर रही हैं और पर्याप्त मात्रा में क्रूड ऑयल का स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और नेचुरल गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसी भी पेट्रोल पंप या गैस एजेंसी पर सप्लाई संकट जैसी स्थिति नहीं है।
गौरतलब है कि भारतीय सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले चार सालों में रिटेल कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की थी। वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ने से इन कंपनियों को रोजाना करीब 1000 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा था, जिसकी भरपाई करने के लिए अब रेट धीरे-धीरे बढ़ाए जा रहे हैं। बीते दिन 3 रुपये की बढ़ोतरी के बाद नुकसान थोड़ा कम होकर 750 करोड़ रुपये प्रतिदिन पर आ गया। अब देखना है कि आज की गई बढ़ोतरी के बाद इस नुकसान को पाटने में कितनी मदद मिलती है। बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में क्रूड ऑयल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं, जो अब 100-110 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुका है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का 85 परसेंट से अधिक तेल बाहर से आयात करता है इसलिए वैश्विक स्तर पर कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है।
व्यापारियों के मुताबिक डीजल महंगा होने से माल ढुलाई प्रभावित होगी। इसका असर सब्जी, दूध, किराना और निर्माण सामग्री जैसी आवश्यक वस्तुओं पर पहुंचेगा। यह स्थिति महंगाई को और बढ़ा सकती है। उद्यमियों का कहना है कि पहले से बढ़ी उत्पादन लागत के बीच ईंधन महंगा होने से दोहरी मार पड़ रही है। इसका असर बाजार और ग्राहकों पर पड़ेगा।
पेट्रोल महंगा होने से बाइक, स्कूटर और कार चलाने वालों का खर्च बढ़ जाएगा। अगर ईंधन की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो ऑटो, टैक्सी और कैब किराए में बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर रोज ऑफिस आने-जाने वाले लोगों के बजट पर पड़ेगा।भारत में फल, सब्जियां, दूध और जरूरी सामान का बड़ा हिस्सा ट्रकों के जरिए एक जगह से दूसरी जगह पहुंचता है। ऐसे में डीजल महंगा होने का असर सीधे ट्रांसपोर्ट लागत पर पड़ता है। जब माल ढुलाई महंगी होती है, तो कंपनियां और व्यापारी अतिरिक्त खर्च ग्राहकों से वसूलने लगते हैं। इसका असर धीरे-धीरे खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर दिखाई देता है। यानी आने वाले समय में सब्जियां, फल, दूध और पैकेज्ड फूड महंगे हो सकते हैं। हाल ही में अमूल और मदर डेयरी ने भी दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए हैं। कंपनियों ने इसके पीछे बढ़ती लॉजिस्टिक्स और ईंधन लागत को बड़ी वजह बताया है।ईंधन महंगा होने से ऑनलाइन फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स कंपनियों का खर्च भी बढ़ जाता है। ऐसे में स्विगी, जोमैटो और दूसरी डिलीवरी कंपनियां डिलीवरी चार्ज बढ़ा सकती हैं, डिस्काउंट कम कर सकती हैं या न्यूनतम ऑर्डर वैल्यू बढ़ा सकती हैं। इसका असर उन लोगों पर पड़ेगा जो रोजमर्रा की खरीदारी और खाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं।
डीजल महंगा होने का असर गांवों और किसानों पर ज्यादा पड़ सकता है। किसान ट्रैक्टर, सिंचाई पंप और फसल ढुलाई के लिए डीजल पर काफी निर्भर रहते हैं। ऐसे में खेती की लागत बढ़ सकती है और इसका असर आगे चलकर खाद्यान्न और सब्जियों की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
उधर आने वाले दिनों में दिल्ली की आम जनता को ऑफिस, घर, दुकान, रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। दिल्ली में ऑटो और टैक्सी चालक हड़ताल करने की प्लानिंग बना रहे हैं। कमर्शियल गाड़ियां चलाने वाले ड्राइवरों की यूनियन सीएनजी की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर ऑटो और टैक्सी के किराये में बढ़ोतरी की मांग को लेकर 3 दिनों की हड़ताल पर जाने की योजना बना रहे हैं। ये हड़ताल 21 मई से लेकर 23 मई तक हो सकती है। ऐसे में, कहीं आने-जाने के लिए ऑटो और टैक्सी पर निर्भर रहने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।’ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस’ ने सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को चिट्ठी लिखकर अपनी मांगें रखीं। चालक शक्ति यूनियन के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर ने कहा, ”सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों की वजह से ऑटो-टैक्सी ड्राइवर अपने परिवारों का भरण-पोषण करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इस पूरे साल के लिए महंगाई का औसत अनुमान 4.6 फीसदी लगाया था, लेकिन थोक महंगाई के 8.3 फीसदी पर पहुंचने से आरबीआई का गणित बिगड़ गया है। जब कंपनियों की लागत (थोक भाव) बढ़ती है, तो वे इसका बोझ आम ग्राहकों पर डालती हैं। जानकारों का मानना है कि यदि महंगाई इसी तरह बढ़ती रही, तो आरबीआई को ब्याज दरों (रेपो रेट) में बढ़ोतरी करनी पड़ेगी। वर्तमान में रेपो रेट 5.25 फीसदी है। यदि इसमें बढ़ोतरी होती है, तो आपके होम लोन और पर्सनल लोन की किस्तें (EMI) महंगी हो जाएंगी, जिससे मध्यम वर्ग पर दोहरी मार पड़ेगी।





