बहु-चरणीय नीट-यूजी से छात्रों को मिलेगा बड़ा लाभ

Multi-stage NEET-UG will be a big advantage for students

डॉ विजय गर्ग

देश में मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने का सपना देखने वाले लाखों विद्यार्थियों के लिए नीट-यूजी सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षा बन चुकी है। हर वर्ष करोड़ों छात्र-छात्राएं डॉक्टर बनने की उम्मीद के साथ इस परीक्षा में भाग लेते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा प्रबंधन, पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ियों और अत्यधिक मानसिक दबाव जैसी समस्याओं ने इस परीक्षा प्रणाली पर कई सवाल खड़े किए हैं। इसी कारण अब यह विचार तेजी से चर्चा में है कि नीट-यूजी को कई सत्रों और चरणों में आयोजित किया जाए।

वर्तमान में नीट-यूजी एक ही दिन और एक ही सत्र में आयोजित की जाती है। इतने बड़े स्तर पर परीक्षा आयोजित करना प्रशासन के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन जाता है। यदि किसी परीक्षा केंद्र पर कोई तकनीकी समस्या, सुरक्षा चूक या अव्यवस्था हो जाए तो हजारों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। हाल के वर्षों में पेपर लीक और पुनः परीक्षा जैसी घटनाओं ने विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता को और बढ़ा दिया है।

कई सत्रों में परीक्षा आयोजित करने का सबसे बड़ा लाभ विद्यार्थियों के मानसिक दबाव में कमी के रूप में देखा जा रहा है। अभी छात्रों के पास केवल एक अवसर होता है, जिसमें उनकी वर्षों की मेहनत का फैसला हो जाता है। यदि किसी कारणवश परीक्षा के दिन छात्र अस्वस्थ हो जाए, तनाव में रहे या यात्रा संबंधी कठिनाई का सामना करे, तो उसका प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। लेकिन यदि परीक्षा दो या अधिक चरणों में आयोजित हो और विद्यार्थियों को बेहतर स्कोर चुनने का अवसर मिले, तो वे अधिक आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दे सकेंगे।

इस व्यवस्था से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी लाभ मिलेगा। कई छात्रों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। भीड़, परिवहन की समस्या और मौसम जैसी कठिनाइयां उनकी परेशानी बढ़ा देती हैं। कई चरणों में परीक्षा होने से परीक्षा केंद्रों का बेहतर वितरण संभव होगा और छात्रों को अपने नजदीकी शहरों में केंद्र मिल सकेंगे।

सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी भी परीक्षा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना सकती हैं। परीक्षा को चरणों में बांटने से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और निगरानी आसान हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली भविष्य में अधिक सुरक्षित और पारदर्शी साबित हो सकती है। इसी दिशा में सुधारों की चर्चा भी तेज हो रही है।

हालांकि, कई सत्रों में नीट-यूजी आयोजित करना आसान नहीं होगा। सबसे बड़ी चुनौती सभी सत्रों के प्रश्नपत्रों के स्तर को समान बनाए रखना है। यदि किसी सत्र का प्रश्नपत्र आसान और दूसरे का कठिन हुआ तो विद्यार्थियों के बीच असमानता पैदा हो सकती है। इसलिए सामान्यीकरण की वैज्ञानिक और पारदर्शी प्रक्रिया आवश्यक होगी। इसके अतिरिक्त डिजिटल ढांचे को मजबूत बनाना भी जरूरी होगा, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते समय के साथ परीक्षा प्रणाली में सुधार आवश्यक है। परीक्षा का उद्देश्य केवल छात्रों का चयन करना नहीं, बल्कि उन्हें निष्पक्ष और समान अवसर प्रदान करना भी होना चाहिए। कई सत्रों वाली नीट-यूजी प्रणाली विद्यार्थियों को तनाव से राहत देने के साथ-साथ परीक्षा प्रक्रिया को अधिक भरोसेमंद बना सकती है।

अंततः, यदि नीट-यूजी को कई सत्रों और चरणों में सावधानीपूर्वक लागू किया जाता है, तो यह भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा सुधार साबित हो सकता है। इससे परीक्षा प्रणाली अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और छात्र-केंद्रित बनेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि विद्यार्थियों का भविष्य केवल एक दिन की परीक्षा पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि उनकी वास्तविक योग्यता और निरंतर तैयारी को उचित महत्व मिलेगा।