निर्मल रानी
प्रभु श्री राम मंदिर,अयोध्या में दान व चढ़ावे के पैसों व बहुमूल्य वस्तुओं की कथित लूट जैसे शर्मनाक कृत्य की चौतरफ़ा निंदा की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने भी चंदा व चढ़ावा चोरी मामले में दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुये केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया है तथा उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) को अब तक हुई जांच की रिपोर्ट दाख़िल करने का निर्देश दिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और घोर निंदनीय बताते हुये कहा है कि दानपात्र से हुई चोरी ने ‘पूरे हिंदू समाज’ और राम भक्तों की श्रद्धा और भावनाओं को गहरी चोट पहुंचाई है जिससे संघ परिवार भी पूरी तरह आहत है। संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि इस ‘महापाप’ में शामिल हर एक दोषी को कठोरतम सज़ा मिलनी चाहिए और चंदे की पवित्रता से कोई समझौता नहीं हो सकता। संघ ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि आस्था का मामला है।
परन्तु सुप्रीम कोर्ट व संघ की चिंताओं से इतर एक वर्ग ऐसा भी है जो इस बेहद अफ़सोसनाक मामले पर भी राजनीति का ऐसा लेप चढ़ाने की कोशिश कर रहा है जिससे विषय की गंभीरता को कम किया जा सके और भक्तों का ध्यान दूसरी तरफ़ भटकया जा सके। उदाहरणार्थ राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे की कथित चोरी के मामले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर सनातन धर्म, राम भक्तों की आस्था और अयोध्या की छवि को वैश्विक स्तर पर बदनाम करने का गंभीर आरोप लगाया है। योगी ने कहा कि विपक्ष एक ‘छोटी सी घटना’ को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने भारत की आस्था, अयोध्या की विरासत और प्रभु राम के नाम पर हमला करने का जैसे “ठेका” ले रखा है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने कभी भगवान राम के अस्तित्व को ही नकार दिया था, वे आज मंदिर के चंदे के नाम पर मचल रहे हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने राम भक्तों पर गोलियां चलवाई थीं, वे आज राम मंदिर की पवित्रता पर सवाल उठा रहे हैं ? मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों की ग़लती की वजह से पूरे ट्रस्ट या अयोध्या को कटघरे में खड़ा करना ग़लत है।
उधर स्वयं को ‘हिंदू रक्षा दल’ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बताने वाला ग़ाज़ियाबाद का एक व्यक्ति जिसने एक सार्वजनिक लंगर के दौरान एक मुस्लिम व्यक्ति हाथों से प्रसाद की थाली यह कहकर छीन ली थी कि ‘यह लंगर मुल्लाओं के लिये नहीं’। इसी व्यक्ति ने अब राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे की चोरी के मामले पर बेहद विवादित और अजीबोग़रीब बयान दिया है। उस ने इस मामले में आरोपियों का एक तरह से बचाव करते हुए कहा कि “मंदिर हमारा है, चंदा हमारा है और अगर हमारे ही लोगों अर्थात हिंदुओं ने पैसा ले भी लिया है, तो विपक्ष या दूसरों को इससे क्या परेशानी है? दूसरों को क्यों मिर्ची लग रही है? इस ने तर्क दिया कि राम मंदिर में चंदा या दान देने वाले लोग भी भगवान राम में अटूट विश्वास रखते हैं और जिन लोगों ने यह पैसा निकाला है, वे भी भगवान राम के ही भक्त हैं। उसने कहा कि भगवान राम के आशीर्वाद से ही दान का कुछ पैसा उन आरोपियों के घरों तक पहुँचा है, इसलिए इस पर किसी को भी सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है, “हिंदुओं का पैसा तो हिंदुओं के पास ही रहा”? उस ने उल्टे विरोधियों से ही सवाल पूछा कि “तुमने राम मंदिर में कितना चंदा दिया है?” उसके अनुसार ‘जिन्होंने मंदिर में एक रुपया भी दान नहीं दिया, उन्हें इस मुद्दे पर बोलने या सवाल उठाने का कोई हक़ नहीं है।’ चंदा लूट व चोरी को जायज़ ठहराने वाली और भी कई बातें इस नफ़रती शख़्स ने कीं।
इसी तरह अयोध्या के ही तपस्वी छावनी के पीठाधीश जगतगुरु परमहंस आचार्य ने इस मामले में आरोपियों की सज़ा को लेकर एक जातिगत और पक्षपातपूर्ण व विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्य आरोपी टिन्नू यादव को तो फांसी की सज़ा होनी चाहिए। जबकि मामले में शामिल अन्य कथित उच्च जाति के अन्य आरोपियों अनुकल्प मिश्रा,अविनाश शुक्ला,लवकुश मिश्रा व करुणेश पांडे का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि “बाक़ी सबको छह-छह महीने की सज़ा देकर छोड़ देना चाहिए”। उनके इस जातिगत दुर्भावना पूर्ण बयान की भारी आलोचना हुई कि वे आस्था की इस बड़ी लूट में शामिल विशेष जाति के आरोपियों को केवल छह महीने की मामूली सज़ा देकर रफ़ा दफ़ा करना चाहते हैं।इसी तरह सोशल मीडिया पर भी भारतीय जनता पार्टी और दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े कुछ कट्टरपंथियों और समर्थकों द्वारा इस विमर्श को बढ़ावा दिया जा रहा है कि “हम(हिन्दू ) आपस में निपट लेंगे” । विपक्ष के अनुसार “भाजपा के गुर्गे” मैदान में उतर आए हैं, जो कह रहे हैं कि “यह भाजपा, आरएसएस और राम भक्तों का निजी मामला है, उन्होंने ही चंदा दिया है, उन्होंने ही लिया है और वे आपस में निपट लेंगे”। इसमें किसी तीसरे या ग़ैर-हिंदू को बोलने की ज़रूरत नहीं है। ऐसे लोगों का तर्क है कि चंदा चोरी पर सबसे ज़्यादा विपक्ष और गैर-हिंदू नेता छाती पीट रहे हैं। कुछ लोग तो यह कुतर्क भी दे रहे हैं कि यदि एक हिंदू भाई के पैसे का सुख दूसरा हिंदू भाई ले रहा है, तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इस नैरेटिव की चौतरफ़ा आलोचना हो रही है और मंदिर चंदा लूट को ‘आपसी मामला’ बताने वाले इन बयानों की केवल विपक्ष ही नहीं बल्कि समाज के हर वर्ग द्वारा तीखी निंदा की जा रही है। आलोचकों और आम श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान के घर में चोरी ‘महापाप’ है। चोर का कोई धर्म या जाति नहीं होती। परन्तु राम मंदिर दान लूट के विषय में उपरोक्त दलीलें सुनकर तो यही लगता है गोया इस शर्मनाक घटना में भी कुतर्कों की इंतेहा कर दी गयी है।





