वेनेजुएला में भूकम्प में हजारों के हताहत होने की आशंका भारत सहित विश्व समुदाय ने मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाएं

With fears of thousands of casualties following an earthquake in Venezuela, the global community—including India—has stepped forward to offer assistance

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

वेनेजुएला में 24 जून को आए भीषण भूकम्प ने पूरे विश्व को झकझोर दिया है। दक्षिण अमेरिकी देश के इतिहास की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में शामिल इस त्रासदी में हजारों लोगों के हताहत होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। राजधानी कराकास और उसके आसपास के क्षेत्रों में एक मिनट से भी कम अंतराल में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकम्पों ने व्यापक तबाही मचाई है।

प्रारम्भिक सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 164 लोगों की मृत्यु और 971 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है, लेकिन राहत एवं बचाव एजेंसियों का मानना है कि मृतकों की संख्या कई हजार तक पहुँच सकती है। भूकम्प का केंद्र कराकास से लगभग 160 किलोमीटर पश्चिम में स्थित मोरोन क्षेत्र के निकट बताया गया है। दोनों झटकों के कारण राजधानी सहित ला गुआइरा और आसपास के अनेक शहरों में दर्जनों बहुमंजिला इमारतें धराशायी हो गईं। हजारों लोग मलबे में दब गए और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने अपनी प्रारम्भिक रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि जनहानि का आंकड़ा दस हजार से अधिक तक पहुँच सकता है।

इस प्राकृतिक आपदा ने वेनेजुएला के बुनियादी ढाँचे को भी गंभीर क्षति पहुँचाई है। कई क्षेत्रों में बिजली, पानी और संचार सेवाएँ ठप हो गई हैं। सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं तथा अनेक अस्पताल स्वयं प्रभावित होने के कारण घायलों के उपचार में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। कराकास का अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और सार्वजनिक परिवहन तंत्र भी नुकसान की चपेट में आया है, जिससे राहत कार्यों की गति प्रभावित हुई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहायता की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, स्पेन, फ्रांस तथा अन्य देशों ने खोज एवं बचाव दल, चिकित्सकीय सहायता और मानवीय राहत सामग्री भेजने की घोषणा की है। प्रभावित क्षेत्रों में सेना, पुलिस और आपदा प्रबंधन बलों को तैनात किया गया है, जो दिन-रात मलबे में फँसे लोगों को निकालने में जुटे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार यह भूकम्प केवल अपनी तीव्रता के कारण ही नहीं, बल्कि लगातार आ रहे आफ्टर शॉक्स के कारण भी अत्यंत खतरनाक साबित हो रहा है। दर्जनों झटके महसूस किए जा चुके हैं, जिससे पहले से क्षतिग्रस्त इमारतों के और अधिक गिरने का खतरा बना हुआ है। राहतकर्मियों को हर पल जोखिम उठाकर बचाव अभियान चलाना पड़ रहा है। कई स्थानों पर लोग खुले मैदानों और सड़कों पर रात बिताने को मजबूर हैं। वेनेजुएला का इतिहास भूकम्पीय गतिविधियों से जुड़ा रहा है, लेकिन वर्तमान आपदा को पिछले एक शताब्दी से अधिक समय की सबसे भीषण घटनाओं में गिना जा रहा है। इतिहासकारों और भूवैज्ञानिकों का मानना है कि 1812 के विनाशकारी कराकास भूकम्प के बाद यह सबसे गंभीर संकट हो सकता है। इस त्रासदी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि विकासशील देशों में आपदा-रोधी निर्माण और शहरी नियोजन की कितनी आवश्यकता है। अनेक इमारतों के ढहने से संकेत मिलता है कि भूकम्पीय सुरक्षा मानकों का पर्याप्त पालन नहीं किया गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भवन निर्माण में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग होता तो जनहानि को काफी हद तक कम किया जा सकता था।

वेनेजुएला आज मानवीय संकट के एक कठिन दौर से गुजर रहा है। हजारों परिवार अपने प्रियजनों की तलाश में अस्पतालों, राहत शिविरों और मलबों के आसपास भटक रहे हैं। बचाव कार्य अभी जारी हैं और जैसे-जैसे मलबा हटेगा, मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। पूरी दुनिया की निगाहें इस समय वेनेजुएला पर टिकी हैं और वेनेजुएला में भूकम्प में हजारों लोगों के हताहत होने की आशंका के बीच भारत सहित विश्व समुदाय ने मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाएं हैं।इस त्रासदी से उबरने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग वेनेजुएला की सबसे बड़ी आशा बनकर सामने आया है।