सीटीसी के शताब्दी समारोह में कानून और टैक्स जगत की दिग्गज हस्तियां हुईं सम्मानित

Luminaries from the legal and tax sectors were honored at the CTC centenary celebrations

मुंबई (अनिल बेदाग) : द चैंबर ऑफ टैक्स कंसल्टेंट्स (सीटीसी) , जो टैक्स, अकाउंटिंग, कानूनी और संबंधित क्षेत्रों को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित एक प्रमुख संस्था है, ने अपने शताब्दी समारोह के तहत ‘शताब्दी मंथन’ कार्यक्रम में मानद सदस्यता प्रदान करने का समारोह आयोजित किया।

सीटीसी की उत्कृष्टता के 100 साल पूरे होने के` मौके पर आयोजित इस समापन समारोह में कुछ जाने-माने पेशेवरों के बेहतरीन काम को मान्यता दी गई और कानूनी व पेशेवर समुदाय में उनके शानदार नेतृत्व, तकनीकी महारत और अहम योगदान को उजागर किया गया।

सम्मानित होने वाले प्रतिष्ठित पेशेवरों में जस्टिस आर.वी. ईश्वर (रिटायर्ड) – जाने-माने कानून विशेषज्ञ एवं पूर्व जज; श्री सौरभ सोपारकर – सीनियर एडवोकेट और श्री पर्सी पारदीवाला – सीनियर एडवोकेट शामिल थे। यात्रा पर होने के कारण श्री अरविंद दातार – सीनियर एडवोकेट ने वर्चुअल रूप से यह सम्मान स्वीकार किया।* कानून-शास्त्र, संवैधानिक कानून, टैक्स और कानूनी ज्ञान के क्षेत्र में उनके काम ने भारत के पेशेवर और न्यायिक परिदृश्य को काफी प्रभावित किया है। ‘द न्यू टैक्स कोड’ (नया टैक्स कोड) पर हुए सत्र के मॉडरेटर सीए अनीश ठाकर ने कहा, “शताब्दी मंथन सिर्फ एक यादगार कार्यक्रम नहीं है; यह उन स्थायी मूल्यों पर विचार करने का एक मौका था, जिन्होंने इतने सालों में इस पेशे को आकार दिया है। कानूनी जगत के दिग्गजों और पेशेवर लीडरों को एक साथ लाने से सार्थक चिंतन और अगली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का माहौल बना।” सीनियर एडवोकेट श्री रफीक दादा और सुश्री मालती श्रीधरन (पूर्व पीसीसीआईटी) सहित जाने-माने पैनलिस्टों ने इन सुधारों को लागू करने के लिए कई व्यावहारिक समाधान बताए।

कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर सीए नीलेश शाह ने कहा,”भारत की आर्थिक प्रगति उन संस्थानों और पेशेवरों पर ज्यादा निर्भर करेगी जो भरोसा, जवाबदेही और लंबी अवधि की सोच को बनाए रखते हैं। सीटीसी जैसे प्लेटफॉर्म, जिन्होंने एक सदी से ज्ञान और पेशेवर उत्कृष्टता में लगातार निवेश किया है, भविष्य के लिए तैयार नेतृत्व और जिम्मेदार विकास को आकार देने में अहम भूमिका निभाते हैं।”

यह कार्यक्रम ‘शताब्दी मंथन’ का एक अहम हिस्सा है, जो सीटीसी की शताब्दी पहल है और जिसका मकसद एक सदी के ज्ञान को संजोते हुए भविष्य के लिए दृष्टिकोण तैयार करना है। इसने पेशेवर उत्कृष्टता, विचार-नेतृत्व और टैक्स व कानूनी इकोसिस्टम में सार्थक योगदान को प्रोत्साहित करने के प्रति संस्था की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।