तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की ओर से इमर्जिंग ट्रेंड्स इन कंटेंपरेरी डेंटिस्ट्री पर दो दिनी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का शंखनाद, मलेशिया के हेल्थ मिनिस्ट्री के सुल्तान अब्दुल हलीम अस्पताल में चीफ कंसल्टेंट एंड जानी मानी ओरल मेडिसिन की एक्सपर्ट डॉ. नोराटिखा बिन्ती अवांग हसीम ने की शिकात
रविवार दिल्ली नेटवर्क
- डॉ. नोराटिखा ने ट्रॉमैटिक, इंफेक्शियस, और प्री कैंसरस अल्सर को बताया प्रमुख
- सही निदान के लिए बायोप्सी, क्लिनिकल परीक्षण और इमेजिंग तकनीकों का उपयोग जरुरी
- मेहमानों ने किया कांफ्रेंस प्रोसिडिंग का विमोचन
- उत्कृष्टता श्रेणी में कोठीवाल डेंटल के प्रिंसिपल समेत 20 डेंटल शिक्षाविद सम्मानित
- डिजिटल डेंटिस्ट्री, थ्री डी इमेजिंग और लेज़र तकनीक के उपयोग से दंत चिकित्सा में क्रांतिकारी बदलाव: डॉ. एवी रामा राजू
- डेंटल स्टुडेंट्स एवम् फैकल्टीज ने विभिन्न प्रश्नों के माध्यम से शंकाओं का समाधान
मलेशिया के हेल्थ मिनिस्ट्री के सुल्तान अब्दुल हलीम अस्पताल में चीफ कंसल्टेंट एंड जानी मानी ओरल मेडिसिन की एक्सपर्ट डॉ. नोराटिखा बिन्ती अवांग हसीम ने नॉन हीलिंग अल्सर पर कहा,अल्सर की अनदेखी से जीवन संकट में आ जाता है। मुंह के छालों के विभिन्न आकार जैसे गोल, अंडाकार एवम् अनियमित हो सकते हैं, जिनकी प्रकृति से रोग की गंभीरता का अनुमान लगाया जाता है। नॉन-हीलिंग अल्सर वे होते हैं, जो सामान्य उपचार के बाद भी 2–3 सप्ताह में ठीक नहीं होते। डॉ. नोराटिखा ने ट्रॉमैटिक, इंफेक्शियस, और प्री कैंसरस अल्सर को प्रमुख बताया। इसके प्रमुख कारणों में तंबाकू सेवन, धूम्रपान, विटामिन की कमी, संक्रमण और लगातार घाव शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सही निदान के लिए बायोप्सी, क्लिनिकल परीक्षण और इमेजिंग तकनीकों का उपयोग किया जाता है। पीपी के जरिए एक मरीज का केस इतिहास भी साझा किया, जिसमें लंबे समय से न भरने वाले अल्सर को शुरुआती चरण में पहचानकर सफल उपचार किया गया। अल्सर की अवस्थाओं को समझाया गया। उपचार में दवाइयों के साथ- साथ आवश्यक होने पर सर्जिकल हस्तक्षेप की भूमिका भी बताई गई। अंत में समय पर जांच और जागरूकता को सबसे प्रभावी बचाव उपाय बताया गया। डॉ. नोराटिखा तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की ओर से इमर्जिंग ट्रेंड्स इन कंटेंपरेरी डेंटिस्ट्री पर ऑडी में आयोजित दो दिनी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में बतौर की नोट स्पीकर बोल रही थीं। कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना से हुआ।कार्यक्रम के दौरान कांफ्रेंस प्रोसिडिंग का विमोचन किया गया। संचालन स्टुडेंट्स वंशिका त्यागी, हृदेश सुरेखा आदि ने किया। कॉन्फ्रेंस में कोठीवाल डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर,मुरादाबाद के प्रिंसिपल डॉ. स्वतंत्र अग्रवाल, केडी डेंटल कॉलेज,मथुरा की प्रिंसिपल डॉ. नवप्रीत कौर समेत 20 डेंटल शिक्षाविदों को उत्कृष्टता के लिए विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया।
आंध्र प्रदेश से आए विष्णु डेंटल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एवी रामा राजू ने आधुनिक दंत चिकित्सा एवं भविष्य की डेंटिस्ट्री के परिवर्तन पर एक प्रभावशाली व्याख्यान दिया। डॉ. राम राजू ने बताया कि आधुनिक तकनीकों जैसे डिजिटल डेंटिस्ट्री, थ्री डी इमेजिंग और लेज़र तकनीक के उपयोग से दंत चिकित्सा में क्रांतिकारी बदलाव आया है। उन्होंने भविष्य की डेंटिस्ट्री को अधिक सटीक, तेज़ और मरीज-केंद्रित बताते हुए छात्रों को नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान डेंटल स्टुडेंट्स एवम् फैकल्टीज ने विभिन्न प्रश्नों के माध्यम से अपनी शंकाओं का समाधान किया। कॉन्फ्रेंस में टीएमयू के कुलपति प्रो. वी.के. जैन, डीन गवर्निंग डॉ. नीलिमा जैन,टीएमयू डेंटल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. प्रदीप तांगड़े, वाइस प्रिंसिपल डॉ. अंकिता जैन के अलावा विशिष्ट अतिथियों में कोठीवाल डेंटल कॉलेज और अनुसंधान केंद्र से डॉ. स्वतंत्र अग्रवाल, मानव रचना डेंटल कॉलेज की डीन डॉ. पुनीत बत्रा, दंत विज्ञान संस्थान, बरेली के प्रिंसिपल डॉ. सत्यजीत नाइक, केडी डेंटल कॉलेज मथुरा से डॉ. नवप्रीत कौर आदि की उल्लेखनीय मौजूदगी रही। इनके अलावा डॉ. विनीता निखिल , डॉ. सुनीता गुप्ता, डॉ. के.वी. अरुण , डॉ. नवीन पी.जी, डॉ. विक्रांत मोहंती , डॉ. शौर्य टंडन , डॉ. राजेंद्र गौड़ा पाटिल आदि भी शामिल रहे।





