बेहद प्रेरक है नौशीन नाज का सिवनी में सब्जी बेचने से अंडर 18 महिला राष्ट्रीय हॉकी शिविर तक का सफर

Nausheen Naaz's journey from selling vegetables in Seoni to the Under-18 Women's National Hockey Camp is inspiring

नौशीन बोली, मेरा लक्ष्य भारत के लिए हॉकी खेलना

सत्येन्द्र पाल सिंह

नई दिल्ली : मध्यप्रदेश के छोटे से आदिवासी जिले सिवनी के सब्जी बेचने वाले की बेटी 15 बरस की स्ट्राइकर नौशीन नाज ने अभावों और व्यवस्था से लड़ कर खुद का हॉकी में एक अलग मुकाम बनाया है। नौशीन नाज 16 वीं सब जूनियर महिला राष्ट्रीय हॉकी चैंपियनशिप 2026 में मध्य प्रदेश की नुमाइंदगी कर सबसे ज्यादा नौ गोल दागे। नौशीन नाज फिलहाल साई ,भोपाल में अंडर 18 महिला राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में भारत की पूर्व महिला हॉकी कप्तान रानी रामपाल के मार्गदर्शन में अपना हॉकी कौशल निखार रही हैं। मध्यप्रदेश के छोटे से शहर सिवनी से अंडर 18 महिला राष्ट्रीय हॉकी शिविर तक का नौशीन नाज का सफर बेहद प्रेरक है। नौशीन नाज कभी अपने पिता के साथ सब्जी तक बेची।

नौशीन नाज ने मात्र दस बरस की उम्र में अपनी बड़ी बहन ताहूर नाज को हॉकी खेलता देखकर जब हॉकी खेलनी शुरू की तब उनके पास हॉकी तक नहीं थी। नौशीन नाज बताती हैं,‘ मैंने अपनी बड़ी बहन से कहा कि मैं भी हॉकी खेलना चाहती हें लेकिन हमारे पास पर न तो पैसा है न ही हॉकी स्टिक। मुझे मैदान पर एक टूटी हॉकी मिली और मैं इसे घर ले आई। मैं इस टूटी फूटी हॉकी को लेकर एक लौहार के पास गई और कील से इसके टुकड़ों को जोड़ इसे हॉकी खेलने लायक बनाया। मैंने टूटी फूटी ठीक की हुई इस हॉकी से साल भर अभ्यास किया। आखिरकार एक डे बार्डिंग प्रोग्राम में मुझे खेलने को सही हॉकी मिल गई।’
नौशीन बेहद गरीब परिवार से हैं। नौशीन की राह बहुत आर्थिक अभावों ने और मुश्किल बना दी। उनके पिता ने कभी सब्जी बेची और कभी ट्रक चलाया। नौशीन के पिता परिवार को चलाने के लिए डिब्बे एक से दूसरी जगह पहुंचाने का काम करते हैं। आर्थिक तंगी के साथ नौशीन को अपने गृह नगर में सामाजिक संघर्ष भी झेलने पड़े। नौशीन बताती हैं, ’मैं बहुत गरीब परिवार से हूं। हमारे समुदाय में बहुत कम लोग हैं जो लड़कियों को खेलने के लिए उनकी हौसलाअफजाई करते हैं। लोग कहते हैं कि लड़कियों को खेलने के लिए घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। हालात इतने बिगड़े कि मैंने दो बरस तक खेलना छोड़ दिया और सब्जियां बेचने में अपने पिता की मदद की। ऐसी मुश्किल घड़ी में मेरी मां साथ मेरे समर्थन में खड़ी हुई। मेरी मां ने मेरे पिता से कहा कि यह सोचना छोड़ कर लोग क्या कहते हैं उन्हें अपनी बेटियों का साथ देना चाहिए। मैं अपनी मां के मिले साथ ही ग्वालियर हॉकी अकादमी में शामिल होने के साथ शिविर में जगह बना सकी।‘

नौशीन अब भारत की पूर्व महिला हॉकी कप्तान ओलंपियन रानी रामपाल के मार्गदर्शन में भोपाल में हॉकी शिविर में शिरकत कर रही है। नौशीन का ध्यान अपनी बेसिक्स बेहतर करने पर है। नौशीन एक ऐसी लड़की के लिए जिसने अपने जूते टूट जाने पर कभी अपनी साथी खिलाड़ियों से जूते उधार लिए अब अपनी आदर्श रानी रामपाल के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही है और उनके लिए यह जिंदगी बदलने वाला अनुभव है। नौशीन कहती हैं,‘ मैंने रानी रामपाल से बहुत कुछ सीखा। रानी जी बहुत ही बढ़िया ढंग से यह बताती हैं कि दौड़ते हुए गेंद ठीक ढंग से कैसे रोकनी हैं और कैसे आगे बढ़ाना है। रानी रामपाल भारत के लिए सर्वोच्च स्तर पर हॉकी खेली और वह जानती हैं कि आगे उस मुकाम तक पहुंचने के लिए क्या करना है। मैं इसीलिए रानी रामपाल की तरह बनना चाहती हूं।’

जिंदगी की चुनौतियों किराये के घर में रहते और सीमित साधनों के बावजूद नौशीन पूरी तरह फोकस है और उनकी निगाहें अंडर 18 महिला हॉकी एशिया कप के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने पर है। नौशीन नाज कहते हैं, ‘मेरा लक्ष्य भारत के लिए हॉकी खेलना है,जिससे कि मैं अपने माता पिता की मदद कर सकूं। मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि मेरे पिता अब और काम न करें। मैं हर किसी को दिखाना चाहती हूं यदि आपके पास खेलने का जिगरा है तो फिर आपको खेलने से कोई नहीं रोक सकता।’