डॉक्टर बनने की बढ़ती चाह: आठ वर्षों में मेडिकल आवेदनों में 50% उछाल

Growing Desire to Become a Doctor: 50% Surge in Medical Applications Over Eight Years

डॉ विजय गर्ग

भारत में चिकित्सा शिक्षा के प्रति युवाओं का आकर्षण लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले आठ वर्षों में मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए किए जाने वाले आवेदनों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि डॉक्टर बनने का सपना पहले से कहीं अधिक युवाओं को प्रेरित कर रहा है। हर वर्ष लाखों विद्यार्थी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में भाग लेते हैं और सीमित सीटों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करते हैं।

मेडिकल क्षेत्र के प्रति बढ़ते आकर्षण के पीछे कई कारण हैं। सबसे महत्वपूर्ण कारण है समाज में डॉक्टरों को मिलने वाला सम्मान। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती आवश्यकता, चिकित्सा क्षेत्र में रोजगार की स्थिरता, बेहतर आय की संभावनाएँ तथा आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में तेजी से हो रही प्रगति भी विद्यार्थियों को इस क्षेत्र की ओर आकर्षित कर रही है। कोविड-19 महामारी के दौरान डॉक्टरों की भूमिका ने भी युवाओं के मन में चिकित्सा पेशे के प्रति नई प्रेरणा जगाई।

हालाँकि आवेदनों की संख्या में तेज़ वृद्धि हुई है, लेकिन मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या उसी अनुपात में नहीं बढ़ी। परिणामस्वरूप प्रतियोगिता अत्यंत कठिन हो गई है। लाखों अभ्यर्थियों में से केवल एक सीमित संख्या ही सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्राप्त कर पाती है। यही कारण है कि विद्यार्थी वर्षों तक तैयारी करते हैं और कोचिंग संस्थानों पर बड़ी राशि खर्च करते हैं।

सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में नए मेडिकल कॉलेज स्थापित करने तथा एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इससे अधिक विद्यार्थियों को अवसर मिलने लगे हैं, फिर भी बढ़ती मांग के मुकाबले उपलब्ध सीटें अभी भी कम हैं। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण मेडिकल शिक्षा के विस्तार की आवश्यकता बनी हुई है।

मेडिकल शिक्षा का बढ़ता आकर्षण केवल एमबीबीएस तक सीमित नहीं है। अब विद्यार्थी बीडीएस, आयुष, नर्सिंग, फिजियोथेरेपी, फार्मेसी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, रेडियोलॉजी, मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी और अन्य सहयोगी स्वास्थ्य विज्ञान पाठ्यक्रमों में भी रुचि दिखा रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में करियर के अनेक नए अवसर खुलने से युवाओं के विकल्प भी बढ़े हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सीटों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा। मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता, आधुनिक प्रयोगशालाएँ, प्रशिक्षित संकाय, शोध सुविधाएँ और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। साथ ही विद्यार्थियों को यह समझाना भी जरूरी है कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सफलता केवल डॉक्टर बनने तक सीमित नहीं है, बल्कि अनेक अन्य चिकित्सा व्यवसाय भी समाज के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

बढ़ते आवेदनों का एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। अधिक संख्या में युवा चिकित्सा क्षेत्र को अपना भविष्य मान रहे हैं, जो आने वाले समय में देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है।

निष्कर्षतः, मेडिकल में दाखिले का बढ़ता क्रेज़ युवाओं की आकांक्षाओं, समाज की बदलती आवश्यकताओं और स्वास्थ्य क्षेत्र के महत्व को दर्शाता है। अब आवश्यकता इस बात की है कि चिकित्सा शिक्षा के अवसरों का विस्तार किया जाए, गुणवत्ता में सुधार लाया जाए और विद्यार्थियों को विविध स्वास्थ्य करियर विकल्पों के प्रति भी जागरूक बनाया जाए, ताकि देश को अधिक संख्या में कुशल और संवेदनशील स्वास्थ्य पेशेवर मिल सकें।