हम महिला विश्व कप का फाइनल खेलना चाहती हैं : सलीमा टेटे

We want to play the Women's World Cup final: Salima Tete

  • हमारी भारतीय टीम की सबसे बड़ी है आपस में संवाद
  • हॉकी विश्व कप जैसे टूर्नामेंट में टीम की जुगलबंदी बेहद जरूरी
  • सबसे बड़ी चुनौती दबाव में घबराने की बजाय इसे जज्ब करने की होगी
  • पहले मैच में चीन की चुनौती से निबटने के लिए तैयार
  • हर खिलाड़ी को मैच में आखिरी क्षण तक लड़ती देखना चाहती हूं
  • हॉकी उस्तादों का भरोसा ही हमें मैदान पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को प्रेरित करता है

सत्येन्द्र पाल सिंह

नई दिल्ली : आक्रामक सेंटर हाफ सलीमा टेटे की अगुआई में भारत अब से करीब एक महीने बाद शुरू हो रहे एफआईएच हॉकी विश्व कप बेल्जियम एंड नीदरलैंड 2026 में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों को पूरे आत्मविश्वास,भरोसे और नए संकल्प के साथ चुनौती देने उतरेगी। भारत ने बीते महीने ऑकलैंड में महिला नेशंस कप फाइनल में ऑकलैंड में मेजबान न्यूजीलैंड को हरा खिताब जीता और इससे वह पूरे संकल्प के साथ इसमें खेलने उतरेगी। भारतीय महिला हॉकी टीम 15 से 30 अगस्त तक होने एफआईएच विश्व कप में अपने अभियान का आगाज एशिया और दुनिया की सबसे मजबूत टीमों से एक चीन के खिलाफ 16 अगस्त को मैच खेल कर करेगी और इसके बाद 18 अगस्त को दक्षिण अफ्रीका और 20 अगस्त को फाइनल खेलेगी। सलीमा टेटे पहली बार एफआईएच हॉकी विश्व कप में भारतीय टीम की की अगुआई कर रही है। एफआइर्एच विश्व कप के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम फिलहाल बेंगलुरु में शिद्दत से तैयारी मे जुटी है। भारत की कप्तान सलीमा टेटे को महिला हॉकी विश्व कप की बाबत विस्तार से बात करते हुए कहा उन्हें इस बार लय बनाए रख कर महिला हॉकी विश्व कप में इतिहास बनाने का भरोसा है।

पहली बार महिला हॉकी विश्व कप में भारत की कप्तानी करने की बाबत सलीमा टेटे ने कहा, ‘ भारत की महिला हॉकी विश्व कप में पहली बार कप्तानी करना मेरे लिए वाकई खास अहसास होगा। मैं महिला हॉकी विश्व कप में भारत की कप्तानी करने और खेलने को लेकर रोमांचित होने के साथ थोड़ी नर्वस भी हूं क्योंकि यह हॉकी का सबसे बड़ा टूर्नामेंट है। महिला हॉकी विश्व कप में भारत की कप्तानी करना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। हर हॉकी खिलाड़ी का सपना होता विश्व कप में खेलना और मुझे तो अब इसमें खेलने के साथ भारत की कप्तानी करने का मौका मिलना बेहद खास है। हमारी भारतीय महिला हॉकी टीम ने पिछले विश्व कप में बढ़िया हॉकी खेली थी लेकिन नतीजे हमारे लिए मनमाफिक नहीं रहे थे। इस बार हम महिला हॉकी विश्व कप में बहुत आगे जाने और इसके फाइनल तक में पहुंचने की बात कर रहे हैं। हम महिला विश्व कप का फाइनल खेलना चाहती हैं। मैं जानती हूं कि मेरी पहली जिम्मेदारी है इस विश्व कप में बढ़िया प्रदर्शन करना क्योंकि मैं बतौर कप्तान अनुकरणीय प्रदर्शन कर अपनी टीम की बेहतर ढंग से मदद कर सकती हूं। मैं अपनी टीम की हर खिलाड़ी, खासतौर पर नौजवान खिलाड़ियो के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उनकी मैदान पर मदद करना चाहती हूं।नौजवान और अनुभवी प्रतिभाशाली खिलाड़ियों से सज्जित हमारी भारतीय टीम की सबसे बड़ी है इसका आपस में संवाद। हमारी टीम की नौजवान खिलाड़ी कभी भी मैदान पर उससे कोई सलाह लेने अथवा चर्चा करने में कभी नहीं झिझकती। साथ ही सभी अनुभवी खिलाड़ी हमेशा नौजवान खिलाड़ियों के मार्गदर्शन को तैयार रहती हैं। बतौर कप्तान मेरी कोशिश रहती है कि टीम की हर खिलाड़ी अपनी बात मुझसे साझा करे। हमारे लिए यह बेहद अहम है कि हम एक दूसरे की बात बराबर सुने और एक दूसरे से सीखे और टीम के रूप में साथ साथ रहें। हॉकी विश्व कप जैसे टूर्नामेंट में टीम की जुगलबंदी बेहद जरूरी है क्योंकि इसमें हर किसी को अपना किरदार अदा करना है। जब हम एक दूसरे पर भरोसा कर संवाद करेंगी तो दबाव को झेलना आसान हो जाएगा और हम बतौर टीम बढ़िया प्रदर्शन कर सकेंगी।’

वह कहती हैं, ‘ हर विश्व कप में चुनौती अलग होती है क्योंकि आप इसमें आपके सामने विश्व की कुछ श्रेष्ठ टीमें होती है। विश्व कप में हमारे पूल में चीन सहित कई मजबूत प्रतिद्वंद्वी है और हर मैच में हमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती दबाव में घबराने की बजाय इसे जज्ब करने की होगी। हमारा भरोसा दबाव को सकारात्मक ढंग से लेने में विश्वास रखते हैं। हमारी तैयारी बढ़िया है। हमें बस जरूरत खुद पर भरोसा बनाए रख कर अपनी योजनाओं पर काबिज रहने की है। हम यदि जेहनी तौर पर मजबूत रहते हैं और एक दूसरे के साथ कदमताल करते हैं और आत्मविश्वास बनाए रखते हैं तो हम अपने रास्ते की हर चुनौती को पार कर सकते हैं। हम अपने पूल में पहले मैच में चीन की चुनौती से निबटने के लिए तैयार हैं। हमें मालूम है कि जब हम उसके खिलाफ आखिरी बार खेले तो क्या हुआ था। महिला हॉकी विश्व कप नया टूर्नामेंट है और यह हमारे लिए नया मौका है। मेरी अपनी टीम की सभी साथियों को साफ संदेश है पूरे आत्मविश्वास और जीवट से खेलो। हमें प्रतिद्वंद्वी को देख कर अपना खेल नहीं बदलना चाहिए। बजाय इसके हमें अपनी शैली की हॉकी खेल कर उन्हें अपने मुताबिक खेलने पर मजबूर करना चाहते हैं। मैं अपनी टीम की हर खिलाड़ी को मैच में आखिरी क्षण तक लड़ती देखना चाहती हूं। हमारी जुझारू क्षमता मैच में शुरू से आखिर तक दिखनी चाहिए। हम सभी बतौर टीम एकजुट होकर खेल कर मनमाफिक नतीजे हासिल कर सकते हैं।

सलीमा टेटे कहती हैं,‘ इस महिला विश्व कप से पहले मैंने टीम की नौजवान खिलाड़ियों से बस यही कहा वे अपनी मेहनत पर भरोसा रखें क्योंकि उन्होंने अपनी मेहनत से ही इस भारतीय टीम में जगह पाई। खुद पर यह सोच कर बेवजह का अतिरिक्त दबाव डालने की जरूरत नहीं है यह विश्व कप है।मैंने टीम की नौजवान खिलाड़ियों को बराबर खुल कर खेलने को ही प्रोत्साहित किया है। रही बात गलतियों की यह खेल का हिस्सा है और टीम की सीनियर खिलाड़ी भी गलतियां करती हैं। अहम है सही सोच और आत्मविश्वास बनाए रख कर अपनी ताकत के मुताबिक खेलना। मेरा मानना है कि खासतौर हमारी नौजवान खिलाड़ी विश्व कप जैसे बड़े मंच पर खेलने का लुत्फ उठा और खुद पर भरोसा बना कर खेलेंगी तो वे बेशक अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगी।

भारत की हॉकी विश्व कप में नुमाइंदगी करना ही सबसे बड़ी प्रेरणा है। जब भी हम भारत की जर्सी पहन कर मैदान पर खेलने उतरती हैं तो हम जानती हैं कि हम अपने भारत के लिए खेल रही हैं और इसी से हमें बेहद गर्व की अनुभूति करते हैं। मैचों से पहले हमारी कोशिश बराबर माहौल को सकारात्मक और जोश से सराबोर रखने की होती है। हम खुद को यह याद दिलाते हैं बतौर टीम हम एक है और हमें मैदान पर एक दूसरे के लिए प्रतिद्वंद्वी से लड़ना है। हमारे हॉकी उस्तादों का संदेश भी बेहद सीधा होता है। हमारे हॉकी उस्ताद टीम में हम सभी खिलाड़ियों से यही कहते हैं कि खुद पर भरोसा रखो और वैसी हॉकी खेले जैसी हम जानती हैं। हमारे हॉकी उस्तादों को हमारी क्षमता पर भरोसा है। हमारे हॉकी उस्तादों का भरोसा ही हमें मैदान पर अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है। जब हम अपनी तैयारियों पर भरोसा कर बतौर टीम एक संगठित होकर खेलेंगे तो हम जानती हैं कि हम किसी भी टीम का मुकाबला कर सकती हैं।‘